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कांगड़ा में माता बज्रेश्वरी के दरबार में चढ़ा 100 ग्राम सोने का हार, पांडवों से जुड़ा है इस शक्तिपीठ का इतिहास

Himachal Pradesh News: हिमाचल के कांगड़ा स्थित माता बज्रेश्वरी मंदिर में पुणे के एक भक्त ने 16 लाख की कीमत का 100 ग्राम सोने का हार दान किया. बज्रेश्वरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है.

कांगड़ा में माता बज्रेश्वरी के दरबार में चढ़ा 100 ग्राम सोने का हार, पांडवों से जुड़ा है इस शक्तिपीठ का इतिहास
Brajeshwari Devi Temple, Kangra

Kangra Brajeshwari Devi Temple: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में नगरकोट स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक, अत्यंत प्राचीन माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर में इन दिनों एक श्रद्धालु की भक्ति चर्चा का विषय बन गया.  महाराष्ट्र के पुणे से आए एक श्रद्धालु परिवार ने माता के चरणों में एक भक्त ने 100 ग्राम का शुद्ध सोने का हार अर्पित किया है. जिसकी बाजार में अनुमानित  कीमत लगभग 16 लाख रुपये बताई जा रही है.

 मन्नत पूरी होने पर भक्त ने चढाया सोने का हार 

मंदिर कमेटी की अधिकारी शिवाली ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को महाराष्ट्र के पुणे से आए एक भक्त ने विनोद एन. शर्मा ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर देवी के शयन कक्ष के लिए यह सोने का हार भेंट किया. यह परिवार मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए पुणे से यहां आया था.

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाया माता बज्रेश्वरी को सोने का हार

उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि उनके परिवार की माता बज्रेश्वरी में गहरी आस्था है और वे कई वर्षों से इस मंदिर में आते रहे हैं. अपनी एक मनोकामना पूरी होने पर उनके परिवार ने सोने का हार चढ़ाने की मन्नत मांगी थी, और अब उन्होंने अपनी वह मन्नत पूरी कर दी है.

प्राचीन माता बज्रेश्वरी मंदिर

माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है. इसे कांगड़ा देवी मंदिर या नगरकोट धाम भी कहते हैं, जहां माता सती का 'दाहिना वक्ष' (breast) गिरा था. यह मंदिर अपनी भव्यता, इतिहास और मकर संक्रांति पर माता को चढ़ने वाले 'घृतमंडल' (मक्खन) के लिए प्रसिद्ध है. यहां मा दुर्गा पिंडी के रूप में विराजमान हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर को पांडवों के जरिए बनाया गया था.

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाया माता बज्रेश्वरी को सोने का हार

उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि उनके परिवार की माता बज्रेश्वरी में गहरी आस्था है और वे कई वर्षों से इस मंदिर में आते रहे हैं. अपनी एक मनोकामना पूरी होने पर उनके परिवार ने सोने का हार चढ़ाने की मन्नत मांगी थी, और अब उन्होंने अपनी वह मन्नत पूरी कर दी है.


प्राचीन माता बज्रेश्वरी मंदिर

माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है. इसे कांगड़ा देवी मंदिर या नगरकोट धाम भी कहते हैं, जहां माता सती का 'दाहिना वक्ष' (breast) गिरा था. यह मंदिर अपनी भव्यता, इतिहास और मकर संक्रांति पर माता को चढ़ने वाले 'घृतमंडल' (मक्खन) के लिए प्रसिद्ध है. यहां मा दुर्गा पिंडी के रूप में विराजमान हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर को पांडवों के जरिए बनाया गया था.

 स्वप्न में मां दुर्गा ने मंदिर बनाने की कही थी बात

 मंदिर की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, किंवदंती है कि एक दिन पांडवों ने अपने सपने में देवी दुर्गा को देखा.  उन्होंने उनसे कहा कि वह नगरकोट गांव में स्थित हैं और यदि वे चाहते हैं कि वे स्वयं को सुरक्षित रखें तो उन्हें उस क्षेत्र में उनके लिए एक मंदिर बनाना चाहिए अन्यथा वे नष्ट हो जाएंगे . ऐसे मां का स्वप्न में आकर चेताने से उसी रात पांडवों ने नगरकोट गांव में उनके लिए एक भव्य मंदिर बनवाया. 

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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