असम में बाढ़ की वजह से हालात चिंताजनक बने हुए हैं. यहां भी शिवसागर में तो स्थिति ज्यादा विस्फोटक है जहां तक 48 लोगों की मौत हो चुकी है. पूरे असम की बात करें तो मौत का आंकड़ा 88 चल रहा है. कई घर जलमग्न हो चुके हैं, सड़कें डूब चुकी हैं और गांव पूरी तरह मुख्यधारा से कट चुके हैं.
शिवसागर में कैसे हैं हालात?
शिवसागर की स्थिति को लेकर एक अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया है कि इस जिल में सबसे ज्यादा प्रभावित नजीरा क्षेत्र है जहां 29 मौतें हुई हैं, इसके बाद शिवसागर में 9 मौतें हो चुकी हैं. 6 लोग तो सोनारी आरसी पार्ट में जान गंवा चुके है. दो मौतें अमगुरी और डेमो में भी दर्ज की गई हैं. शिवसागर में तो कई घर इस बाढ़ की वजह से प्रभावित हो चुके हैं.
दूसरे जिलों का क्या है हाल?
अधिकारियों के मुताबिक शिवसागर के अलावा चराईदेव में 29 मौतें हो चुकी हैं, जोहराट में 9, गोलाघाट में 4, धेमाजी, सोनितपुर में 1 और कार्बी अंगलोंग में दो. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने खुद बाढ़ प्रभावित शिवसागर और चराईदेव का दौरा किया और पीड़ित परिवार वालों से बात की. रिलीफ कैंप तक पहुंचने के लिए नड्डा ने ट्रैक्टर की मदद ली और नुकसान का जायजा लिया.
राहत शिविरों में कैसी स्थिति?
जानकारी के लिए बता दें कि बाढ़ के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए विभिन्न जिलों में राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक 16,500 से अधिक लोगों ने राज्यभर में बनाए गए 71 राहत शिविरों में शरण ली हुई है. इसके अलावा 30 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 72 हजार से अधिक लोगों तक खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है. राज्य सरकार और प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटे हैं, हालांकि कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने और जलभराव के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं.
कृषि क्षेत्र को पहुंचा भारी नुकसान
बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है. एएसडीएमए के अनुसार राज्य में 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी जलमग्न है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है. इसके अलावा 11,000 से अधिक मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए हैं, जबकि करीब 17,000 अन्य पशु प्रभावित हुए हैं.
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