भारत का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज इंस्पेक्शन घोटाला गुरु जी से लेकर कथित धर्मगुरु के बीच घूम रहा है. इनमें पहला है बनारस का कथित ज्योतिषी इंदर बाली मिश्रा और दूसरे हैं धर्मगुरु रावतपुरा सरकार उर्फ रवि शंकर महाराज. दोनों का घोटाले में नाम आरोपी के तौर पर है. मिश्रा की घोटाले में भूमिका बिचौलिए के तौर पर है, जबकि रावतपुरा सरकार का मेडिकल कॉलेज जांच के दायरे में हैं.
आश्रम और वीआईपी कल्चर का विवाद
रावतपुरा सरकार का मध्य प्रदेश के रावतपुरा में बड़ा आश्रम है. कुछ साल पहले तक एक धर्मगुरु के तौर पर उनका काफी नाम था, उनके आश्रम में हर रोज हजारों की संख्या में लोग आते थे. लेकिन धीरे धीरे उन पर आरोप लगने लगा कि आश्रम में केवल वीआईपी लोगों को ही रावतपुरा सरकार पूरा समय देते हैं. उस दौर में मध्य प्रदेश के कई बड़े नेता अक्सर आश्रम में आते थे. वीआईपी कल्चर को बढ़ावा देने के चलते धीरे धीरे आम लोग रावतपुरा सरकार से दूर होते गए. हालांकि अभी भी श्रद्धालु उनके आश्रम में आते हैं. इसी बीच रावतपुरा सरकार ने मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी शुरू की. लेकिन इसके चलते वो विवादों में आ गए.
मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी से नया विवाद
नेशनल मेडिकल कमीशन से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार मामले में एक और नाम चर्चा में है. ये नाम ह इंद्र बाली मिश्रा, जिन्हें लोग ‘गुरुजी' के नाम से जानते हैं. CBI ने कहा है कि गुरुजी इस पूरे मल्टी-लेयर्ड भ्रष्टाचार नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी थे. CBI की FIR के मुताबिक वाराणसी निवासी इंद्र बाली मिश्रा, उर्फ गुरुजी, की सीधी पकड़ NMC के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के पूरे समय के सदस्य जीतू लाल मीणा तक थी. CBI का आरोप है कि गुरुजी निजी मेडिकल कॉलेजों से बड़ी रकम इकट्ठा करवाते थे. यह पैसा लाखों रुपये तक पहुंचता था. गुरुजी इस पैसे को जीतू लाल मीणा तक पहुंचवाने में अहम भूमिका निभाते थे. बदले में मीणा कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट और गोपनीय फाइलें लीक करते थे.
NMC भ्रष्टाचार केस में ‘गुरुजी' की अहम भूमिका
CBI के मुताबिक, गुरुजी के जीजा शिवम पांडे इस रिश्वत के पैसों को इकट्ठा करते थे और आगे पहुंचाते थे. एजेंसी का दावा है कि जीतू लाल मीणा ने इस रिश्वत की रकम का एक हिस्सा राजस्थान के दौसा जिले में मंदिर बनवाने में खर्च किया. इस खुलासे से इस पूरे घोटाले में धार्मिक मोड़ भी आ गया है. जहां धार्मिक दान और छवि का इस्तेमाल भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए किया जा रहा था. CBI की जांच में पता चला है कि गुरुजी विरेंद्र कुमार नाम के एक बड़े बिचौलिए के लिए काम कर रहे थे. विरेंद्र कुमार दक्षिण भारत के कई निजी मेडिकल कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करता था, जिनमें शामिल है गायत्री मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम,फादर कोलंबो इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वारंगल.
रिश्वत से मंदिर तक: जांच में धार्मिक मोड़
इन कॉलेजों के निदेशकों पर आरोप है कि वह फर्जी फैकल्टी,नकली बायोमेट्रिक अटेंडेंस,घोस्ट पेशेंट और गलत दस्तावेज का इस्तेमाल कर NMC टीम को गुमराह करते थे. लेकिन असल खेल यह था कि उन्हें पहले से ही यह पता होता था कि कौन-सी फाइल कब जांची जाएगी क्योंकि दस्तावेज मीणा द्वारा लीक किए जा रहे थे. एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज पूरे मामले में वाराणसी के इस कथित ‘गुरुजी', रावतपुरा सरकार के मेडिकल कॉलेज , कुछ सीनियर हेल्थ मिनिस्ट्री अधिकारी और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से जुड़े लोगों के यहां छापेमारी की.
ED ने बताया कि उसने देश के 10 राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्लीमें कम से कम 15 जगहों पर छापेमारी की है,इनमें 7 मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं.
कैसे हुआ घोटाला
मामला CBI की FIR से शुरू हुआ था, जो 30 जून को दर्ज की गई थी. FIR में आरोप है कि मेडिकल कॉलेजों की इंस्पेक्शन से जुड़ी गोपनीय जानकारी अधिकारियों को घूस देकर लीक की जाती थी. ये जानकारी कॉलेजों के मालिकों, मैनेजमेंट और कुछ बिचौलियों तक पहुंचाई जाती थी. कॉलेज प्रबंधन उसके बाद इंस्पेक्शन से पहले सारे पैरामीटर सेट कर लेते थे ताकि उन्हें आसानी से मान्यता मिल सके और अलग अलग कोर्सेज के लिए मंजूरी मिल सकें. CBI FIR में कुल 34 आरोपियों का नाम है, जिनमे NMC के अधिकारी,स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी,वाराणसी का ‘गुरुजी' ,रावतपुरा सरकारऔर कई बिचौलिए शामिल बताए गए हैं.
ED की छापेमारी – मेडिकल कॉलेज भी रडार पर
ED ने अपनी छापेमारी में सात मेडिकल कॉलेजों के परिसरों,कई राज्यों में फैले अधिकारियों और प्राइवेट व्यक्तियों के घरों की तलाशी ली। ये वही लोग हैं जिनके नाम CBI FIR में आते हैं.
घूस देने का तरीका क्या था
जांच एजेंसियों के अनुसार घूस की रकम हवाला चैनल के जरिए दिल्ली के एक डॉक्टर के माध्यम से आगे भेजी जाती थी. ‘गुरुजी' के ज़रिए एक MARB (Medical Assessment & Rating Board) सदस्य से संपर्क साधा गया. इसके बाद कॉलेजों को अनुचित फायदे दिलवाए गए.
कैसे किया जाता था खेल
CBI FIR में कहा गया है कि आरोपी मेडिकल कॉलेजों के गोपनीय दस्तावेज और फाइलें अवैध रूप से कॉपी करके आगे भेजते थे. कॉलेजों को इंस्पेक्शन की तारीख और टीम के नाम पहले से बता देते थे, जबकि ये जानकारी बेहद गोपनीय होती है. इंस्पेक्शन में जाने वाले डॉक्टरों को अवैध रूप से प्रभावित किया जाता था. बदले में मेडिकल कॉलेज भारी रकम देकर नियमों में ढील और मान्यता हासिल कर लेते थे.
जून में CBI ने इस मामले में 6 राज्यों के 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिनमें कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, यूपी, दिल्ली और मध्यप्रदेश शामिल हैं. सीबीआई पहले ही इस मामले में 12 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. यह मामला अब देश का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज इंस्पेक्शन और रेग्युलेटरी करप्शन घोटाला माना जा रहा है. ED और CBI दोनों एजेंसियां अब समानांतर जांच कर रही हैं. आने वाले दिनों में बड़ी गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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