- गुरुग्राम में दीपक नांदल गैंग के चार गुर्गे मुठभेड़ में मारे गए जबकि एक घायल हुआ है
- 1994 में बृजमोहन त्यागी के एनकाउंटर से दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर युग की शुरुआत हुई थी
- 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर में इंडियन मुजाहिद्दीन के दो आतंकी मारे गए और एक पुलिस अधिकारी शहीद हुआ था
गुरुग्राम में एक मुठभेड़ में पुलिस ने दीपक नांदल नाम के गैंगस्टर के 4 गुर्गों को ढेर कर दिया और एक गुर्गा घायल हो गया. गुरुग्राम के इतिहास में हुई ये मुठभेड़ अब तक की सबसे बड़ी मुठभेड़ है, जिसमें एक साथ 4 बदमाश मारे गए और 1 घायल है. लेकिन इतने बड़े इनकाउंटर से दिल्ली और एनसीआर थर्राया हो ऐसा पहली बार नहीं हुआ.
दिल्ली और एनसीआर... देश की राजधानी का वह इलाका, जहां एक दौर ऐसा भी था जब गैंगस्टरों, सुपारी किलर्स और आतंकियों का खौफ आम लोगों के सिर पर मंडराता था. 1990 के दशक से लेकर आज तक दिल्ली पुलिस, यूपी एसटीएफ और हरियाणा एसटीएफ ने सैकड़ों मुठभेड़ें कीं. इनमें कई कुख्यात गैंगस्टर और आतंकी मारे गए, लेकिन कुछ एनकाउंटर ऐसे भी रहे जिन पर सवाल उठे और अदालत तक मामला पहुंचा.
दिल्ली-NCR के एनकाउंटर का 3 दशक का इतिहास
अगर पिछले तीन दशक के इतिहास को देखें तो दिल्ली-एनसीआर के एनकाउंटर केवल अपराधियों के खात्मे की कहानी नहीं हैं, बल्कि पुलिस की बदलती रणनीति, अंडरवर्ल्ड की ताकत और न्यायिक जांच के अहम पड़ाव भी हैं. हम आपको दिल्ली और एनसीआर के की कुछ बड़ी मुठभेड़ के बारे में पिछले तीन दशकों की कहानी बताते हैं.
1994: जब बृजमोहन त्यागी के एनकाउंटर ने बदल दी तस्वीर
1994 में दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली में कुख्यात गैंगस्टर बृजमोहन त्यागी को मुठभेड़ में मार गिराया. उस समय दिल्ली में रंगदारी, सुपारी किलिंग और गैंगवार अपने चरम पर थी. इस कार्रवाई को दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर युग की शुरुआत माना जाता है.
1995: राजबीर रमाला और रणपाल गुर्जर का अंत
इसके बाद दिल्ली पुलिस के तत्कालीन इंस्पेक्टर राजबीर सिंह तेजी से सुर्खियों में आए. उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन किए और 40 से ज्यादा मामलों में वांछित गैंगस्टर राजबीर रमाला को मार गिराया. इसी दौर में हरियाणा के फरीदाबाद में दो लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर रणपाल गुर्जर भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. इन कार्रवाइयों ने दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर सक्रिय कई गैंगों की कमर तोड़ दी.
1997: जब पुलिस से हुई सबसे बड़ी गलती
31 मार्च 1997... दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुई एक मुठभेड़ आज भी पुलिस इतिहास का सबसे विवादित अध्याय मानी जाती है.दिल्ली पुलिस यासीन गैंग के बदमाशों की तलाश में थी. मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने एक मारुति एस्टीम कार को घेरकर गोलियां बरसा दीं. लेकिन कार में गैंगस्टर नहीं, बल्कि दो निर्दोष कारोबारी प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह बैठे थे. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. बाद में अदालत ने इसे फर्जी एनकाउंटर माना और तत्कालीन एसीपी एसएस. राठी समेत कई पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. यह मामला आज भी पुलिस प्रशिक्षण में एक बड़ी सीख माना जाता है.
1998: श्रीप्रकाश शुक्ला... जिसने यूपी पुलिस की तस्वीर बदल दी
22 सितंबर 1998 को यूपी एसटीएफ ने गाजियाबाद में देश के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में गिने जाने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला को मार गिराया. श्रीप्रकाश शुक्ला पर तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी लेने का आरोप था. उसे पकड़ने के लिए यूपी एसटीएफ का गठन हुआ था. मोबाइल सर्विलांस जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुलिस ने उसे ट्रैक किया और गाजियाबाद में हुई मुठभेड़ में ढेर कर दिया. इस ऑपरेशन को भारतीय पुलिसिंग के सबसे सफल ऑपरेशनों में गिना जाता है.
2000 से 2006: आतंकवाद के खिलाफ स्पेशल सेल की बड़ी लड़ाई
साल 2000 में दिल्ली पुलिस ने रेड फोर्ट हमले के आरोपी लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबू शमाल को मार गिराया.इसके बाद 2002 में अंसल प्लाजा एनकाउंटर हुआ. दीपावली से ठीक पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने मॉल के बेसमेंट में दो संदिग्ध लश्कर आतंकियों को मार गिराया. हालांकि बाद में इस एनकाउंटर पर सवाल उठे, लेकिन अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को सही माना. इसी दौरान तुगलकाबाद में दो और आतंकियों को मार गिराया गया. 2004 में मोहम्मद यासीन गैंग पर कार्रवाई हुई, जबकि 2005 और 2006 में सोनिया विहार इलाके में अयूब-असलम गैंग के कई बदमाश पुलिस मुठभेड़ में मारे गए.
2008: बाटला हाउस... जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
19 सितंबर 2008... दिल्ली सीरियल ब्लास्ट के महज छह दिन बाद स्पेशल सेल जामिया नगर के बाटला हाउस पहुंची.यहां इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी आतिफ अमीन और छोटा साजिद मारे गए. लेकिन इस ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस के जांबाज इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए.
बाटला हाउस एनकाउंटर देश के सबसे चर्चित और सबसे ज्यादा बहस वाले पुलिस ऑपरेशनों में शामिल है. बाद में अदालतों ने पुलिस की कार्रवाई को सही माना और फरार आरोपी आरिज खान को भी दोषी ठहराया गया.
2013: नीतू दाबोदिया का अंत
24 अक्टूबर 2013 को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने वसंत कुंज में दिल्ली के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर सुरेंद्र सिंह उर्फ नीतू दाबोदिया को घेर लिया. दोनों तरफ से जबरदस्त फायरिंग हुई और दाबोदिया अपने दो साथियों के साथ मारा गया. पुलिस का दावा था कि इस कार्रवाई से दिल्ली में चल रहा रंगदारी का एक बड़ा नेटवर्क खत्म हो गया.
2016: संदीप गाडोली एनकाउंटर और नया विवाद
7 फरवरी 2016 को गुरुग्राम का इनामी गैंगस्टर संदीप गाडोली मुंबई के एक होटल में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया.
लेकिन बाद में जांच में यह मामला फर्जी एनकाउंटर निकला. आरोप लगा कि पुलिस और विरोधी गैंग की मिलीभगत से हनीट्रैप के जरिए गाडोली की लोकेशन हासिल की गई. इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई और यह देश के चर्चित फर्जी एनकाउंटर मामलों में शामिल हो गया.
2018: दो बड़े ऑपरेशन
2018 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने छतरपुर इलाके में क्रांति गैंग के सरगना राजेश भारती और उसके तीन साथियों को मार गिराया. इस मुठभेड़ में 100 से ज्यादा राउंड फायरिंग हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए. इसी साल नोएडा में सुंदर भाटी गैंग के शार्पशूटर बलराज भाटी को यूपी एसटीएफ और हरियाणा एसटीएफ ने संयुक्त ऑपरेशन में ढेर कर दिया.
2023: अनिल दुजाना का अंत
4 मई 2023 को यूपी एसटीएफ ने मेरठ में कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना को मार गिराया. ग्रेटर नोएडा के दुजाना गांव का रहने वाला अनिल दुजाना हत्या, रंगदारी और गैंगवार के 60 से ज्यादा मामलों में आरोपी था. पुलिस का कहना था कि उसने टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.
जुलाई 2024:हिमांशु भाऊ गैंग के 3 गुर्गे ढेर
जुलाई 2024 में हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की हिमांशु भाऊ गैंग से एक बड़ी मुठभेड़ सोनीपत में हुई, जिसमें हिमांशु भाऊ गैंग के 3 गुर्गे मारे गए. तीनों शूटर गोहाना के मातूराम हलवाई की दुकान पर फायरिंग, हिसार में महिंद्रा शोरूम पर फायरिंग और मुरथल के गुलशन ढाबे पर शराब कारोबारी सुंदर की हत्या में शामिल थे.
17 सितंबर 2025: गाजियाबाद में दिशा पाटनी के घर फायरिंग करने वाले शूटर ढेर
17 सितंबर 2025 को यूपी एसटीएफ और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल मिलकर गाजियाबाद के लोन इलाके में फिल्म एक्ट्रेस दिशा पाटनी के घर फायरिंग करने वाले दो शूटरों को मुठभेड़ में देर कर दिया.
हाल के सालों में बदली रणनीति
2017 के बाद यूपी पुलिस ने ऑपरेशन लंगड़ा जैसी रणनीति अपनाई, जिसमें कई बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया. वहीं दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और हरियाणा एसटीएफ ने लॉरेंस बिश्नोई, काला जठेड़ी, नीरज बवाना, कपिल सांगवान उर्फ नंदू, हिमांशु भाऊ और अन्य गैंगों के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की. हालांकि हाल के सालों में ज्यादातर ऑपरेशन गिरफ्तारी या सीमित गोलीबारी तक ही सीमित रहे.
1990 के दशक में जहां दिल्ली-एनसीआर में गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार एनकाउंटर होते थे, वहीं 2000 के दशक में फोकस आतंकवाद पर आ गया. इसके बाद संगठित अपराध, गैंगवार और अंतरराज्यीय गिरोहों के खिलाफ पुलिस की रणनीति बदली.
दिल्ली-एनसीआर के एनकाउंटरों का इतिहास
इन तीन दशकों में कई एनकाउंटर अपराध के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के तौर पर याद किए जाते हैं, तो कुछ मामलों ने यह भी दिखाया कि पुलिस कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए. यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर के एनकाउंटरों का इतिहास सिर्फ अपराधियों के अंत की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय पुलिस व्यवस्था, न्यायिक जांच और कानून के शासन की भी एक अहम दास्तान है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं