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15 दिन में फैसला लें... मिशनरी ग्राहम स्टेंस की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट

याचिका में दारा सिंह ने दावा किया है कि अपराध के समय वह “युवावस्था के गुस्से” में था और अब उसे अपने कृत्य पर पछतावा है.उसने दंड के सुधारात्मक सिद्धांत का हवाला देते हुए समाज में एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में वापस जाने का अवसर मांगा है.

15 दिन में फैसला लें... मिशनरी ग्राहम स्टेंस की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट का समयपूर्व रिहाई पर ओडिशा सरकार को निर्देश.
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई पर फैसला लेने के लिए ओडिशा के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को आखिरी मौका दिया है. मामला ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या से जुड़ा है. अदालत ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक बोर्ड ने फैसला नहीं लिया तो सुप्रीम कोर्ट खुद याचिका पर निर्णय लेगा. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष बुधवार को बताया गया कि अब तक दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर कोई फैसला नहीं लिया गया है.पिछली सुनवाई में अदालत ने ओडिशा सरकार को 19 अगस्त तक निर्णय लेने का निर्देश दिया था.

कोर्ट ने पूछा-अब तक फैसला क्यों नहीं हुआ?

सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने पहले मामले को बाद में सुनने का अनुरोध किया. अदालत ने जब पूछा कि अब तक फैसला क्यों नहीं हुआ, तो वकील ने जेल और सुधार सेवाओं के महानिदेशालय की ओर से भेजा गया पत्र रिकॉर्ड पर रखा. बताया गया कि दारा सिंह के गृह राज्य उत्तर प्रदेश से उसके इतिहास संबंधी जानकारी मांगी गई है.  जस्टिस मनोज मिश्रा ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत निर्णय लेने में इस तरह की अनिर्णय की स्थिति बर्दाश्त नहीं करेगी. पीठ ने निर्देश दिया कि सेंटेंस रिव्यू बोर्ड 2 सितंबर तक फैसला ले और अदालत को इसकी जानकारी दे.अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि आप जो भी निर्णय लेना चाहते हैं लें, अन्यथा हम निर्णय लेंगे.

 कोर्ट ने कहा कि हमें इस बात से मतलब नहीं है कि आप आपस में कैसे संवाद कर रहे हैं, बस निर्णय लीजिए. हम निर्णय लेने से बचने की इस प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं कर सकते.दारा सिंह ने अपनी सजा में रियायत और समयपूर्व रिहाई की मांग की है.याचिका में कहा गया है कि वह 25 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है.

समयपूर्व रिहाई पर विचार संभव

 राज्य की मौजूदा रिमिशन नीति के तहत ऐसे मामलों में समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जा सकता है, जहां मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया हो और कैदी 25 वर्ष की हिरासत पूरी कर चुकी हो. दारा सिंह को 2003 में ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. इसके बाद 2005 में उड़ीसा हाईकोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में बरकरार रखा.

अपनी याचिका में दारा सिंह ने दावा किया है कि अपराध के समय वह “युवावस्था के गुस्से” में था और अब उसे अपने कृत्य पर पछतावा है.उसने दंड के सुधारात्मक सिद्धांत का हवाला देते हुए समाज में एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में वापस जाने का अवसर मांगा है.

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई का हवाला

उसने 2022 के उस सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई की अनुमति दी गई थी.22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक भीड़ ने ग्राहम स्टेन्स की गाड़ी में आग लगा दी थी.उस समय ग्राहम स्टेन्स अपने दो बेटों, 10 साल के फिलिप और 6 साल के टिमोथी के साथ वाहन में सो रहे थे. इस घटना में तीनों की मौत हो गई थी.अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को निर्धारित की है. तब तक सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर अपना निर्णय अदालत के समक्ष रखना होगा.

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