विज्ञापन

मॉनसून सत्र के लिए सरकार ने तय किया एजेंडा, 5 नए और दो लंबित बिलों को पास कराने पर होगा फोकस

सरकार मॉनसून सत्र से पहले सभी दलों के साथ होने वाली बैठक में अपने एजेंडों की जानकारी देने वाली है. सरकार विस्तार से बताने वाली है कि आखिर इन बिलों को इस बार के सत्र में पास कराना इतना जरूरी क्यों है.

मॉनसून सत्र के लिए सरकार ने तय किया एजेंडा, 5 नए और दो लंबित बिलों को पास कराने पर होगा फोकस
मॉनसून सत्र से पहले सरकार ने तय किया अपना एजेंडा
NDTV

मॉनसून सत्र के लिए सरकार ने अपना एजेंडा तय कर लिया है. बताया जा रहा आगामी सत्र में सरकार पांच नए और दो लंबित बिलों को पारित कराने पर फोकस करेगी. इन बिलों के बारे में सरकार सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में जानकारी भी दे सकती है. हालांकि, मॉनसून सत्र के लिए बिलों की अस्थायी सूची में अभी किसी भी संविधान संशोधन विधेयक का उल्लेख नहीं है.पूर्व में पेश किए गए विधेयकों के अलावा पाँच नए महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं. इनमें से दो पूर्व में जारी अध्यादेशों का स्थान लेंगे.  

ये बिल हैं लंबित और समीक्षाधीन बिल 

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 एफसीआरए संशोधन बिल-यह विधेयक 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे इस सत्र में विचार और पारित करने के लिए रखा जाएगा. इसका उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी अनुदानों की पारदर्शिता बढ़ाना है. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: 15 दिसंबर, 2025 को पेश किए गए इस विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया था. इस सत्र में समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस पर आगे विचार किया जाएगा.

अध्यादेशों का स्थान लेने वाले नए विधेयक

आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच, यह विधेयक भारत के सॉवरन डेट मार्केट को मजबूत करने, वैश्विक पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने और बाजार में तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है.उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सके.

इनके अलावा तीन नए बिल भी लाए जा रहे हैं

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: यह कानून वर्ष 1969 के मूल अधिनियम (जिसमें 2023 में भी संशोधन हुआ था) की धारा 13(3) में बदलाव कर विलंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों को अधिक कड़ा और सुव्यवस्थित बनाएगा.
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026: इसके जरिए वर्ष 1971 के अधिनियम में संशोधन कर राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को सख्त किया जाएगा.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: एमएसएमई (MSME) क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और भरोसा आधारित नियमों को बढ़ावा देने, देरी से होने वाले भुगतानों के तंत्र को मजबूत करने तथा राज्यों को अधिक अधिकार देने के उद्देश्य से यह विधेयक पेश किया जाएगा.

विधायी कार्यों के अलावा, इस सत्र में सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की मांगों को प्रस्तुत किया जाएगा.  इस पर संसद में चर्चा और मतदान किया जाएगा.आगामी सत्र मुख्य रूप से आर्थिक सुधारों (विशेषकर एमएसएमई और पूंजी बाजार) तथा न्यायिक व प्रशासनिक मजबूती पर केंद्रित रहने वाला है. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि और व्यापारिक सुगमता के लिए एमएसएमई नियमों में बदलाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि सरकार दो तिहाई संख्या बल के बारे में आश्वस्त होने के बाद ही परिसीमन और महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिलों पर आगे बढ़ेगी. साथ ही सरकार की योजना जेल से सरकार चलाने पर रोक और एक देश एक चुनाव के लिए भी संविधान संशोधन विधेयक लाने की है. 

यह भी पढ़ें: संख्या बल जुटा तो मॉनसून सत्र में ही पारित हो सकता है एक देश एक चुनाव बिल, पर रास्ता है कठिन और लंबा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Monsoon Session, Congress, PM Modi
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com