उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. डायल-112 पर तैनात सिपाही अभिषेक यादव पर 10 साल की मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का आरोप है. बड़ी बात यह है कि अभिषेक यादव इससे पहले भी एक महिला से छेड़छाड़, मारपीट और लूटपाट के आरोप में जेल जा चुका था. बाद में वह जमानत पर बाहर आया, फिर दोबारा पुलिस की नौकरी जॉइन की और एक बार फिर हैवानियत को अंजाम दे दिया.
बताया जा रहा है कि पहले मामले में जेल से बाहर आने के बाद अभिषेक हाई कोर्ट से एक आदेश लेकर आया था. इसी आदेश के आधार पर उसकी गोरखपुर में दोबारा तैनाती हो गई. लेकिन तैनाती मिलने के कुछ ही महीनों बाद उसने 10 साल की मासूम बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी. आरोप है कि उसने बच्ची के शव को एक नदी में फेंक दिया. फिलहाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है.
बताया जा रहा है कि अभिषेक गोरखपुर पुलिस लाइन में रहता था और डायल-112 में तैनात था. इसी साल 28 जुलाई को उसकी हैवानियत सामने आई. रात करीब 9 बजे गोरखपुर जिला अस्पताल से 10 साल की एक बच्ची लापता हो गई.
बताया जा रहा है कि बच्ची का परिवार आजमगढ़ के कप्तानगंज क्षेत्र का रहने वाला है. परिवार की एक बेटी अस्पताल में भर्ती थी. उसी को खाना देने के लिए 10 साल की बच्ची अस्पताल गई थी, लेकिन वहीं से गायब हो गई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई. जांच के दौरान पुलिस आरोपी अभिषेक तक पहुंची. पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह बच्ची को अगवा कर शहर से दूर एक श्मशान घाट ले गया था. वहां उसने पहले दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद शव को एक नदी में फेंक दिया. पूछताछ के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड पुराना है. साल 2025 में भी उसके खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उस पर एक महिला के अपहरण, छेड़छाड़ और मारपीट के गंभीर आरोप लगे थे. उस मामले में भी उसे जेल जाना पड़ा था.
दरअसल, पुलिस की वर्दी पहनकर अभिषेक ने एक व्यक्ति पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाया था. एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का रहने वाला था. वह बिहार के नरकटियागंज में मजदूरी करता था और अपनी पत्नी के साथ मुंबई जाने के लिए गोरखपुर आया था. दोनों प्लेटफॉर्म नंबर-9 से ट्रेन की जनरल बोगी में बैठे थे. तभी पुलिस की वर्दी पहने अभिषेक उनके पास पहुंचा और मोबाइल चोरी का आरोप लगाकर दोनों को अपने साथ ले गया.
इसके बाद आरोपी उन्हें अपनी बाइक पर बैठाकर गोरखनाथ इलाके की तरफ ले गया. वहां उनके सामान की तलाशी ली. विरोध करने पर उसने महिला के साथ मारपीट की और उसका गला दबाने की भी कोशिश की. इस मामले में आरोपी अभिषेक को जेल भेज दिया गया था. सबसे बड़ी बात यह थी कि जिस समय वह पुलिस की वर्दी पहनकर यह सब कर रहा था, उस समय वह ड्यूटी पर नहीं था, बल्कि लाइन हाजिर था. घटना के बाद उसे तत्काल निलंबित कर जेल भेज दिया गया.
हालांकि, इस मामले में जेल जाने के बाद जब वह जमानत पर बाहर आया, तो उसने हाई कोर्ट का रुख किया और वहां से एक आदेश लेकर आया. उसी आदेश के बाद उसकी गोरखपुर में दोबारा तैनाती हो गई.
फिलहाल पुलिस आरोपी अभिषेक का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने सिर्फ यही दो घटनाएं की हैं या इससे पहले भी वो अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा है.
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