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This Article is From Oct 31, 2025

राजस्थान के 4 गांवों में मिला सोने का बड़ा खजाना! तांबा-कोबाल्ट का विशाल भंडार भी करेगा मालामाल

Gold Deposit in Rajasthan: राजस्थान में सोने के बड़े भंडार का पता चला है. यहां तांबा, कोबाल्ट और निकेल जैसी धातुओं के विशाल भंडार का भी सर्वे में संकेत मिला है.

राजस्थान के 4 गांवों में मिला सोने का बड़ा खजाना! तांबा-कोबाल्ट का विशाल भंडार भी करेगा मालामाल
Gold Mines in Rajasthan (File Photo)
बांसवाड़ा:

राजस्थान में सोने की बड़ी खान का पता चला है. वैज्ञानिकों को यहां सर्वे में सोने के साथ तांबे-कोबाल्ट जैसी बहुमूल्य धातुओं के विशालकाय भंडार का पता चला है. बांसवाड़ा के कांकरिया समेत कुछ गांवों के तीन किलोमीटर के इलाके में उत्खनन के लिए तैयारी भी शुरू कर दी गई है. जानकारी के मुताबिक, बांसवाड़ा के कांकरिया समेत चार गांवों के तीन किलोमीटर के इलाके में हजारों किलोग्राम शुद्ध सोने के भंडार का अनुमान भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने लगाया है. गोल्ड, कॉपर-निकल के साथ कोबाल्ट धातु का भी भंडार मिला है. सरकार ने सर्वे और उत्खनन की तैयारी शुरू कर दी है. 

मोदी सरकार ने गोल्ड माइनिंग सर्वे के लिए के लिए 3 नवंबर आवेदन मांगे हैं. सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी को  एक्सप्लोरेशन का लाइसेंस मिलेगा. 

4 गांवों का सर्वे होगा
कांकरियागढ़ा प्रखंड में कांकरियागढ़ा, डूंगरियापाड़ा, देलवाड़ा रावना और देलवाड़ा लोकिया गांव में सर्वेक्षण कराया गया है. ये पूरा तीन वर्ग किलोमीटर का इलाका है.सोने-तांबे और अन्य धातुओं का यहां बड़ा भंडार मिलता है तो यह देश के लिए बड़े फायदे वाली बात होगी. यहां करीब तीन किलोमीटर के दायरे में डीप ड्रिलिंग और सैंपलिंग की तैयारी है. 

पहले भी कराया गया था सर्वे
GSI ने 5-6 साल पहले भी राजस्थान के इसी इलाके में 12 स्थानों पर 600–700 फीट गहराई तक खुदाई कराई थी.इसमें 1000 टन तांबा, 1.20 टन सोना और कुछ कोबाल्ट और निकेल की बात भी सामने आई थी.सर्वे और सोना निकलने में 2-3 साल का वक्त लग सकता है.

घाटोल में सोने का भंडार
राजस्थान के घाटोल के भुखिया-जगपुरा इलाके में भी देश का सबसे बड़ा सोने का भंडार (11.5 करोड़ टन) खोजा गया था. यहां करीब 14 हजार टन कोबाल्ट और 11 हजार टन निकेल भी मिला था. खनन का काम रतलाम की एक कंपनी को दिया गया है.

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बांसवाड़ा है सोने का खजाना
भू वैज्ञानिकों के अनुसार, अरावली के पहाड़ों से सटे होने की वजह से बांसवाड़ा का भूगर्भीय ढांचा करीब 5 हजार साल पुराना है. भूगर्भीय बदलावों से खनिज सतह के नजदीक आ गए.इसमें मार्बल और सोने दोनों की उपस्थिति संभव है.ऐसा हुआ तो पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी.

आदिवासियों में दहशत
बांसवाड़ा में माही बांध, परमाणु संयंत्र और अब सोने की खदान मिलने के बाद आदिवासियों में भय है कि कहीं उन्हें यहां से विस्थापित न होना पड़े. जिस इलाके में सोना मिलने की बात है, वहां 90 फीसदी आदिवासियों की आबादी है. 

इनपुट -निखिलेश सोनी
 

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