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गोवा क्लब अग्निकांड: बर्च बाय रोमियो लेन पर ED का शिकंजा, 11 करोड़ की संपत्ति अटैच, 25 लोगों की हुई थी मौत

गोवा के चर्चित बर्च बाय रोमियो लेन क्लब अग्निकांड मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 11.01 करोड़ की संपत्ति अटैच की है. बिना फायर NOC और फर्जी दस्तावेजों पर चल रहे इस क्लब में पिछले साल आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी.

गोवा क्लब अग्निकांड: बर्च बाय रोमियो लेन पर ED का शिकंजा, 11 करोड़ की संपत्ति अटैच, 25 लोगों की हुई थी मौत
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गोवा के चर्चित क्लब 'बर्च बाय रोमियो लेन' अग्निकांड मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए क्लब से जुड़ी करीब 11.01 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी तौर पर कुर्क  कर लिया है. यह पूरा मामला गोवा के अर्पोरा इलाके में स्थित इस क्लब से जुड़ा है, जहाँ पिछले साल दिसंबर में भीषण आग लगने के कारण 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

FIR के आधार पर ED ने शुरू की जांच

ईडी ने इस मामले की वित्तीय जांच गोवा पुलिस के अंजुना और मापुसा पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की थी. इन एफआईआर में मुख्य आरोपी सौरभ लूथरा और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. जांच में यह बात सामने आई कि यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना या आग लगने की घटना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे लाइसेंस और सरकारी मंजूरियां हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था.

बिना फायर NOC चल रहा था क्लब

ईडी की तफ्तीश में खुलासा हुआ कि 'बर्च बाय रोमियो लेन' क्लब का संचालन 'बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अर्पोरा एलएलपी' नाम की कंपनी कर रही थी. चौंकाने वाली बात यह है कि इस कंपनी के पास क्लब चलाने के लिए जरूरी सरकारी मंजूरियां ही नहीं थीं. जांच एजेंसी के अनुसार, इतने बड़े कमर्शियल प्रतिष्ठान को चलाने के लिए अनिवार्य 'फायर एनओसी' तक नहीं ली गई थी, फिर भी क्लब को धड़ल्ले से चलाया जा रहा था.

फर्जी दस्तावेजों के सहारे धोखाधड़ी

जांच में यह भी पाया गया कि क्लब के पार्टनर्स ने प्रशासन को गुमराह करने और लाइसेंस हासिल करने के लिए जाली 'हेल्थ एनओसी'  और नकली 'पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट' जैसे फर्जी दस्तावेज जमा किए थे. यानी पूरे अवैध प्रतिष्ठान को कानूनी रूप से वैध दिखाने के लिए जालसाजी का सहारा लिया गया. इसके अलावा, क्लब का ट्रेड लाइसेंस 31 मार्च 2024 को ही समाप्त हो चुका था और उसे दोबारा रिन्यू भी नहीं कराया गया था. इसके बावजूद, पार्टनर्स ने आपसी मिलीभगत से जानबूझकर बिना किसी वैध कागजात के क्लब का कमर्शियल ऑपरेशन जारी रखा.

29.78 करोड़ रुपये की कमाई 'अपराध की कमाई' घोषित

ईडी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 6 दिसंबर 2025 तक इस क्लब ने अवैध रूप से करीब 29.78 करोड़ रुपये का बिजनेस किया और कमाई की. जांच एजेंसी ने इस पूरी रकम को अवैध गतिविधियों से अर्जित आय यानी 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' माना है.

इससे पहले, 23 जनवरी 2026 को ईडी ने इस मामले से जुड़े कई संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी. उस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे, साथ ही करीब 59 लाख रुपये की नकदी वाले बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था.

अब तक कुल 29.05 करोड़ की संपत्ति कुर्क

ईडी ने बताया कि इस नए एक्शन से पहले भी मामले में करीब 17.45 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका था. अब 11.01 करोड़ रुपये की नई कुर्की के बाद, इस केस में कुल अटैच और फ्रीज की गई संपत्तियों का आंकड़ा बढ़कर लगभग 29.05 करोड़ रुपये हो गया है. फिलहाल ईडी इस पूरे रैकेट और मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क को खंगालने के लिए आगे की जांच में जुटी है.

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