- दिल्ली के गाजीपुर पुलिस स्टेशन को राष्ट्रीय पुलिस सम्मेलन में देश का नंबर-एक थाना घोषित किया गया है.
- गाजीपुर थाने की कार्यप्रणाली को साफ-सफाई, केस वर्क, शिकायत निपटान सहित सत्तर से अधिक मानकों पर आंका गया.
- थाने में बच्चों के लिए केयर रूम, स्टाफ के लिए आरामदायक व्यवस्था और प्रदूषण कम करने के उपाय किए गए हैं.
Ghazipur Police Station: देश की राजधानी दिल्ली में कूड़े के तीन पहाड़ हैं- गाजीपुर, भलस्वा और ओखला. कई किलोमीटर दूर से कूड़े का यह पहाड़ दिखने लगता है. जैसे-जैसे इसके पास जाएंगे दुर्गंध आपको अहसास करा देती है कि आप कचड़े के पहाड़ के पास पहुंच चुके हैं. नजदीक पहुंचने पर बस यही मन करता है कि जितनी जल्दी हो सके यहां से दूर निकले. लेकिन इस कूड़े के पहाड़ ही कई जिंदगियां भी दिन-रात जीती है. गाजीपुर कूड़े के पहाड़ के ठीक सामने गाजीपुर पुलिस स्टेशन भी है. इस थाने तक कूड़े के लैंडफिल का दुर्गंध भयानक रूप से आता है. लेकिन इसके बाद भी इस थाने में पुलिस की टीम पूरी सजगता से अपना काम करती है.
रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय पुलिस सम्मेलन में मिला सम्मान
दिल्ली-यूपी बॉर्डर के पास स्थित गाज़ीपुर थाना जिसके ठीक सामने कूड़े का लैंडफिल, पास ही फिश मार्केट और मुर्गा मंडी रोज़ भारी भीड़, ट्रैफिक और प्रदूषण के बीच काम करता है. इन्हीं परिस्थितियों में इस थाने को रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय पुलिस सम्मेलन में देश का नंबर-1 पुलिस स्टेशन घोषित किया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने SHO उपाध्याय बाला शंकरम को यह ट्रॉफी दी.

देश का नंबर-1 थाना घोषित होने पर गाजीपुर पुलिस स्टेशन को मिली ट्रॉफी.
सीमाई चुनौतियाँ और रोज़मर्रा का दबाव
टेरेस से गाज़ीपुर लैंडफिल का पहाड़ साफ दिखाई देता है. बदबू, धूल और लगातार आवाजाही ये स्थितियाँ काम को प्रभावित करती हैं. SHO का कहना है कि इलाके की प्रकृति के कारण पुलिस को रोज़ कई तरह की स्थिति संभालनी पड़ती है.

देश का नंबर-1 थाना घोषित होने पर मिठाई बांटकर खाते गाजीपुर थाने के स्टाफ.
70 से ज़्यादा पैमानों पर मूल्यांकन
रायपुर सम्मेलन में देशभर के थानों को साफ़-सफ़ाई, शिकायत निपटान, केस वर्क, रिकॉर्ड-कीपिंग, पब्लिक इंटरफ़ेस और स्टाफ मैनेजमेंट सहित 70 से अधिक मानकों पर परखा गया. गाज़ीपुर थाना इन मानकों पर शीर्ष पर रहा.

गाजीपुर पुलिस स्टेशन के अंदर बच्चों के लिए केयर रूम.
थाने के अंदर की व्यवस्था -NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट
थाने में NDTV ने जो प्रमुख सुविधाएँ देखीं, उनमें शामिल हैं-
- IOs के लिए अलग वर्क रूम
- बच्चों के लिए केयर रूम
- स्टाफ के आराम और रहने की जगह
- योगा-मेडिटेशन और खेल के लिए स्पेस
- थाने के बाहर और अंदर एयर प्यूरीफायर लगाए गए हैं, ताकि आसपास के प्रदूषण का असर कम हो सके.
- स्टाफ को AIIMS आयुर्वेद की इम्युनिटी किट भी दी गई है.

गाजीपुर पुलिस स्टेशन के अंदर सीसीटीवी कंट्रोल रूम.
गाजीपुर पुलिस स्टेशन में कुल 134 स्टाफ है. जिसमें से 23 महिला कर्मचारी हैं. एक 24×7 महिला हेल्प डेस्क भी संचालित होती है.
शिकायतों तक सीधा पहुंच
थाने में SHO ने अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है, ताकि शिकायतकर्ता सीधे संपर्क कर सकें.महिला स्टाफ के अनुसार, शिकायत मिलने पर प्रक्रिया तय समय में आगे बढ़ाई जाती है.

गाजीपुर थाने का रिस्पेशन. जहां शिकायतकर्ता अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं.
क्राइम और पब्लिक कोऑर्डिनेशन पर फोकस
- थाने के काम का फोकस
- संगठित अपराध
- वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों से जुड़े मामले
- सीमा से जुड़े अपराधों की निगरानी
- RWAs, अमन कमेटियों और ऑपरेशन प्रहरी के साथ नियमित समन्वय बैठकें होती हैं.
- SHO का कहना है कि व्यवहार और संचार भी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

आगे की दिशा
थाना ISO 9000 सर्टिफिकेशन की तैयारी में है- यह काम की प्रक्रिया और सेवा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परखने वाला प्रमाण माना जाता है.यानी यह काम की प्रक्रिया और गुणवत्ता का एक अंतरराष्ट्रीय प्रमाण है.

गाजीपुर थाना के एसएचओ उपाध्याय बाला शंकरम.
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