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जर्मनी भी भारत के IFC-IOR से जुड़ा, पहला समुद्री संपर्क अधिकारी तैनात

भारत और जर्मनी के समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है. जर्मनी ने गुरुग्राम स्थित IFC-IOR में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी तैनात किया है. 

जर्मनी भी भारत के IFC-IOR से जुड़ा, पहला समुद्री संपर्क अधिकारी तैनात
जर्मनी ने IFC-IOR में पहला अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी तैनात किया है.

India-Germany Relations: भारत और जर्मनी के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग एक नए चरण में पहुंच गया है. जर्मनी ने गुरुग्राम स्थित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी (आईएलओ) तैनात किया है. जर्मन नौसेना के कमांडर ओलिवर वानेक ने गुरुवार को IFC-IOR में कार्यभार संभाला. वह इस केंद्र के 17वें अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी हैं. साथ ही  वह जर्मनी के पहले प्रतिनिधि भी हैं. इस अवसर पर भारत में जर्मनी के रक्षा अताशे कर्नल क्लाउस विली मर्केल भी मौजूद रहे.

समुद्री जानकारी साझा करने में मिलेगी मदद

IFC-IOR हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने का एक अहम केंद्र है. यह केंद्र अलग-अलग देशों के बीच समुद्री सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है. इससे समुद्री सुरक्षा और निगरानी बेहतर होती है. भारतीय नौसेना  का मानना है कि जर्मनी के जुड़ने से समुद्री गतिविधियों की निगरानी मजबूत होगी. देशों के बीच सूचना साझा करना और आसान होगा. इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को भी मदद मिलेगी.

भारत-जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

IFC-IOR ने कहा कि जर्मनी जैसे बड़े यूरोपीय समुद्री साझेदार के शामिल होने से केंद्र का अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत होगा. यह कदम भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्तों को भी दिखाता है. दोनों देश हिंद महासागर में सुरक्षित, खुला और स्थिर समुद्री क्षेत्र बनाए रखने के पक्षधर हैं.

क्या करता है IFC-IOR?

भारतीय नौसेना ने IFC-IOR की स्थापना की थी. यह केंद्र जहाजों की आवाजाही पर नजर रखता है. समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी, समुद्री हादसों और अन्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ साझा करता है. इससे अलग-अलग देशों के बीच तेज़ी से समन्वय और कार्रवाई संभव हो पाती है.

हाल में इंडोनेशिया भी हुआ था शामिल

कुछ दिन पहले ही इंडोनेशिया ने भी IFC-IOR में अपना संपर्क अधिकारी भेजा था. अब जर्मनी के जुड़ने से इस केंद्र का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और मजबूत हो गया है. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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