बांसवाड़ा में संत पॉल स्कूल वैन हादसे के बाद अब केवल हादसे की जांच ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की भूमिका, बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. महात्मा गांधी जिला अस्पताल में घायल छात्रा के परिजनों और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत में कई ऐसे दावे सामने आए हैं, जो पूरे मामले को नया मोड़ देते हैं. बांसवाड़ा शहर के दाहोद मार्ग पर बुधवार, 2ृ9 जुलाई की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूली बच्चों से भरी वैन सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई. इस हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि करीब सात अन्य बच्चे घायल हो गए. इनमें एक घायल की स्थिति गंभीर बनी हुई है.
इस हादसे में घायल छात्रा किंजल के पिता ने बताया कि उन्हें दुर्घटना की जानकारी किसी स्कूल अधिकारी ने नहीं, बल्कि स्कूल के ही एक अन्य वाहन चालक ने फोन कर दी. फोन पर बताया गया कि हादसा हो गया है और बच्चों को महात्मा गांधी चिकित्सालय लाया गया है.
उन्होंने बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो वहां अफरा-तफरी का माहौल था. हर कोई अपने बच्चे को तलाश रहा था. काफी खोजबीन के बाद उनकी बेटी किंजल मिली, जिसके जबड़े पर तीन टांके आए हैं और डॉक्टरों ने माइनर फ्रैक्चर बताया है. फिलहाल उसका इलाज जारी है.

हादसे में 7 बच्चे घायल हुए जिनकी हालत स्थिर है
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स्कूल ने बंद किया वाहनों का संचालन
परिजनों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद स्कूल प्रशासन ने अपने निजी छात्र वाहनों का संचालन बंद कर दिया और अभिभावकों से कह दिया कि अब वे अपने स्तर पर बच्चों के आने-जाने की व्यवस्था करें. उनका कहना है कि जब बच्चा घर से स्कूल के लिए निकलता है, तब से उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल की होती है. ऐसे में हादसे के बाद जिम्मेदारी से पीछे हटना उचित नहीं है.
घायल छात्रा के एक अन्य परिजन ने भी स्कूल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सभी अभिभावक एकजुट होकर इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग करें. उनका कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर सामूहिक रूप से आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं.
उन्होंने प्रशासन पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि सुबह स्कूल खुलने के समय शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस या प्रशासनिक निगरानी लगभग नहीं के बराबर रहती है. इसी का फायदा उठाकर कई स्कूल वाहनों के चालक तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हैं. उनका आरोप है कि यदि समय रहते ट्रैफिक व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता, तो शायद इस तरह का गंभीर हादसा टाला जा सकता था.

खड़ी ट्रक से टकराने के बाद स्कूल वैन की हालत
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दोस्त की मदद करना चाहती थी छात्रा
वहीं, इसी हादसे की प्रत्यक्षदर्शी संत पॉल स्कूल की एक दूसरी छात्रा ने भी बेहद भावुक करने वाली बात बताई. छात्रा लावंगी अग्रवाल के अनुसार, उसकी स्कूल वैन उसी वाहन के पीछे चल रही थी जिसका एक्सीडेंट हुआ. हादसा होते ही उसने अपने ड्राइवर से गाड़ी रोकने की गुहार लगाई.
लावंगी अग्रवाल ने कहा,"मैंने ड्राइवर अंकल से कहा कि मेरी उसी वैन में हैं और वह उतरकर उनकी मदद करना चाहती है. लेकिन उन्होंने गाड़ी नहीं रोकी. उन्होंने कहा कि यदि स्कूल समय पर नहीं पहुंचे तो सजा मिलेगी, इसलिए स्कूल पहुंचना जरूरी है. "
छात्रा ने बताया कि वह पूरी घटना देखकर अंदर से बहुत व्यथित थी और अपने दोस्तों की मदद करना चाहती थी, लेकिन गाड़ी नहीं रोकी गई और उन्हें सीधे स्कूल ले जाया गया.
अब इस हादसे के बाद स्कूल परिवहन व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा, ड्राइवरों पर समय का दबाव और शहर की ट्रैफिक मॉनिटरिंग जैसे कई गंभीर मुद्दे एक साथ सवालों के घेरे में हैं. पुलिस हादसे की जांच कर रही है, जबकि अभिभावक पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. फिलहाल इन सभी आरोपों और दावों पर स्कूल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है.
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