पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से मौत का पहला मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि निपाह वायरस के संक्रमण से पश्चिम बंगाल में एक 25 साल की महिला नर्स की मौत हो गई है. बीते कुछ समय से ये निपाह वायरस की वजह से मौत का यह पहला मामला है. आपको बता दें कि पिछले महीने सामने आए दो निपाह संक्रमण के केस में से एक मामला इसी नर्स से जुड़ा हुआ था. दोनों संक्रमित नर्सिंग स्टाफ पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के बारासात के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे.
बताया जा रहा है कि दो संक्रमित लोगों में एक परुष जबकि दूसरी महिला नर्स थी. पुरुष नर्स को इलाज के बाद पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद पिछले महीने ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. लेकिन महिला नर्स की हालात लगातार गंभीर बनी रही. महिला नर्स की हालत इस कदर खराब थी कि उन्हें कई दिनों के लिए आईसीयू में भी रखा गया था.
डॉक्टरों की टीम महिला नर्स पर लगातार नजर बनाए हुई थी. बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले जब महिला नर्स का एक बार फिर टेस्ट कराया गया तो इस बार उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी. लेकिन इसके बावजूद भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इलाज के दौरान महिला नर्स को कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी आज मौत हो गई. हालांकि, निपाह वायरस की चपेट में आने के बाद ही महिला नर्स की हालत बेहद नाजुक हो गई थी.
क्या है ये निपाह वायरस
निपाह वायरस (NiV) एक जूनोटिक वायरस है. यह वो वायरस होते हैं जो जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं. इसके अलावा निपाह दूषित भोजन के माध्यम से या सीधे लोगों के बीच भी फैल सकता है. संक्रमित लोगों में, यह ए-सिम्पटमेटिक संक्रमण से लेकर तीव्र श्वसन बीमारी और घातक इंसेफेलाइटिस (fatal encephalitis) यानी दिमागी सूजन का कारण बन सकता है. जिसके चलते मौत हो सकती है. यह वायरस सूअर जैसे जानवरों में भी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को काफी आर्थिक नुकसान होता है.
कैसे फैलता है निपाह वायरस
निपाह के पहले आउटब्रेक के दौरान ( जोकि मलेशिया में हुआ था) अधिकांश मानव संक्रमण बीमार सूअरों या उनके दूषित ऊतकों के सीधे संपर्क के परिणामस्वरूप हुआ. माना जाता है कि सूअरों के स्राव के असुरक्षित संपर्क या बीमार जानवर के ऊतक के असुरक्षित संपर्क के माध्यम से संचरण हुआ. निपाह वायरस जानवरों (जैसे चमगादड़ या सूअर) या दूषित खाद्य पदार्थों से मनुष्यों में फैल सकता है और सीधे मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकता है. बांग्लादेश और भारत में बाद के निपाह आउटब्रेक में, संक्रमित फल, चमगादड़ों के मूत्र या लार से दूषित फलों या फलों के उत्पादों (जैसे कच्चे खजूर का रस) का सेवन संक्रमण का सबसे संभावित स्रोत था.
क्या-क्या होते हैं लक्षण
कई मामलों में निपाह वायरस ए-सिम्पटमेटिक हो सकता है. यानी इसमें किसी तरह के लक्षण ही न दिखें. इसके अलावा निपाह वायरस होने पर दिखने वाले लक्षण कुछ इस तरह के हो सकते हैं
- तीव्र श्वसन संक्रमण (हल्का, गंभीर)
- घातक एन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार)
संक्रमित लोगों में शुरू में बुखार, सिरदर्द, मायलगिया (मांसपेशियों में दर्द), उल्टी और गले में खराश जैसे लक्षण विकसित होते हैं. इसके बाद चक्कर आना, उनींदापन, चेतना में बदलाव और न्यूरोलॉजिकल संकेत हो सकते हैं जो एक्यूट एन्सेफलाइटिस का संकेत देते हैं. कुछ लोगों को असामान्य निमोनिया और तीव्र श्वसन संकट सहित गंभीर श्वसन समस्याओं का भी अनुभव हो सकता है. एन्सेफलाइटिस और दौरे गंभीर मामलों में होते हैं, जो 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में चले जाते हैं.
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