- पुरानी दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के एक हिस्से को लेकर कोर्ट और एमसीडी के आदेश से विवाद उत्पन्न हुआ है.
- एमसीडी ने मस्जिद परिसर के अतिरिक्त 0.195 एकड़ हिस्से को अतिक्रमण करार देते हुए हटाने के आदेश दिए हैं.
- मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने एमसीडी के आदेश का विरोध शुरू कर दिया है और मामले की संवेदनशीलता बनी हुई है.
पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के एक हिस्से पर डिमोलिशन की तलवार लटकी है. मस्जिद के बाहरी हिस्से को लेकर कोर्ट और एमसीडी के आदेश के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है. हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है.
22 दिसंबर 2025 को जारी एक आदेश में एमसीडी ने कहा था कि मस्जिद परिसर के कुल 0.195 एकड़ से अतिरिक्त हिस्सा अतिक्रमण की श्रेणी में आता है. एमसीडी के मुताबिक इस अवैध हिस्से में बारात घर और एक डिस्पेंसरी चल रही है, जिसे हटाने के आदेश दिए गए हैं. आदेश सामने आते ही मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने उसका विरोध करना शुरू कर दिया.
इसके बाद पुलिस ने स्थानीय लोगों के साथ मीटिंग भी की. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीसीपी, एसीपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मस्जिद का निरीक्षण किया. कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद के बाहरी हिस्से की पैमाइश भी पूरी कर ली गई है.
मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी का कहना है कि विवादित जमीन दिल्ली वक्फ बोर्ड की है और इससे जुड़े सभी वैध दस्तावेज वक्फ बोर्ड की ओर से पेश किए जाएंगे. इसी सिलसिले में मस्जिद कमेटी से जुड़े पदाधिकारी कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुके हैं.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की शाही जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी भी सक्रिय हो गए हैं. उन्होंने रविवार देर रात खुद फैज-ए-इलाही मस्जिद का दौरा किया. सोमवार को उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की और उनसे अपील की. उन्होंने कहा कि यह मसला अभी कोर्ट में है. मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इसलिए पुलिस और प्रशासन को फिलहाल कोई तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.
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