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This Article is From Sep 19, 2025

'ईगल इन द आर्म’ से बदल रही है भारतीय सेना की युद्धनीति, अब इस तरह छुड़ाएंगे दुश्मनों के छक्के

भारतीय सेना की यह नई सोच 'ईगल इन द आर्म' की अवधारणा पर आधारित है. इसका मतलब है कि हर सैनिक को अपने पारंपरिक हथियार की तरह ही ड्रोन चलाने में पारंगत होना चाहिए.

'ईगल इन द आर्म’ से बदल रही है भारतीय सेना की युद्धनीति, अब इस तरह छुड़ाएंगे दुश्मनों के छक्के
  • ऑपरेशन सिंदूर से सीख लेकर ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम तेजी से अपनाना शुरू
  • ड्रोन सेंटर स्थापित कर सभी शाखाओं के सैनिकों को ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित किया जा रहा है
  • सेना प्रमुख जनरल ने अरुणाचल के लिकाबली में ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र का हाल ही में दौरा किया है
नई दिल्ली:

ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेकर भारतीय सेना अब तेजी से ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम को अपनाती जा रही है. इस दिशा में सेना ने अपनी कई यूनिट को एक्टिव कर दिया है. देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी, महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में भी ड्रोन सेंटर स्थापित किए गए हैं. इस पहल का लक्ष्य सेना की सभी शाखाओं के सैनिकों के लिए ड्रोन संचालन को मानक और अनिवार्य बनाना है. गुरुवार को ही सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अरुणाचल प्रदेश के लिकाबली में ऐसे ही एक केंद्र का दौरा किया. जाहिर है कि भारतीय सेना ड्रोन क्षमताएं हासिल करने को लेकर काफी गंभीर है.

'ईगल इन द आर्म' : हर सैनिक के हाथ में एक ड्रोन

सेना के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना की यह नई सोच 'ईगल इन द आर्म' की अवधारणा पर आधारित है. इसका मतलब है कि हर सैनिक को अपने पारंपरिक हथियार की तरह ही ड्रोन चलाने में पारंगत होना चाहिए. इन ड्रोनों का उपयोग युद्ध, निगरानी, रसद आपूर्ति और घायलों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने में भी किया जाएगा. इसके साथ-साथ, काउंटर-ड्रोन उपायों को भी मज़बूत किया जा रहा है. यानी सैनिकों को ड्रोन के इस्तेमाल के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन से निपटने के तौर तरीके भी सिखाए जा रहे हैं.

हर इन्फैंट्री बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून

इस साल करगिल विजय दिवस के मौके पर 26 जुलाई को द्रास में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि प्रत्येक इन्फैंट्री बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून होगी, आर्टिलरी रेजिमेंट काउंटर-ड्रोन सिस्टम और 'लॉइटरिंग म्यूनिशन' (लड़ाकू ड्रोन) से लैस होंगी। साथ ही सटीकता और युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए 'संयुक्त दिव्यास्त्र बैटरियां' बनाई जाएंगी. जनरल द्विवेदी ने कहा था कि हमारी मारक क्षमता आने वाले दिनों में कई गुना बढ़ जाएगी. संदेश साफ था कि सेना तेज़ी से एक आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार सैन्य बल बनने की राह पर है.

सेना को मॉर्डन बनाने की पहल

सैनिकों को ड्रोन से लैस करने और साथ ही उन्हें काउंटर-ड्रोन तौर तरीके सिखाने से जाहिर होता है कि सेना ने इस मानवरहित सिस्टम को केवल युद्धभूमि में अनोखा ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हिस्सा बना लिया है. भारतीय सेना यह सुनिश्चित कर रही है कि कल का सैनिक अपने साथ सिर्फ़ एक हथियार ही नहीं, बल्कि एक 'ईगल' भी लेकर चलेगा.
 

लेखक के बारे में
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राजीव रंजन
Editor - Defence & Political Affairs
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