Karur Stampede Case In Supreme Court: करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई की मांग की गई है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि TVK के कुछ मंत्री, जो इस मामले में आरोपी हैं कथित तौर पर गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. वकील ने कहा कि इस मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चल रही है इसलिए गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है.इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है.
करूर भगदड़ मामले में DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
बता दें कि करूर भगदड़ मामले में DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और मुख्यमंत्री विजय और मंत्रियों की बयानबाजी रोकने की मांग की है. इसके साथ ही खुद को पक्षकार बनाने की भी मांग की गई है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के संगठन सचिव आरएस भारती ने करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है. उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और मामले के अन्य आरोपियों को चल रही CBI जांच पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए.
27 सितंबर 2025 को सीएम विजय की एक जनसभा के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी
गौरतलब है कि 27 सितंबर 2025 को सीएम विजय की एक जनसभा के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी और इसमें 41 लोगों की मौत हुई थी और 142 लोग घायल हुए थे. सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को इस मामले की जांच CBI को सौंप दी थी. इसकी जांच पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली कमेटी कर रही है. आरएस भारती ने अपनी याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपी CBI जांच पूरी होने तक मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी न करें. 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन के दिए बयान को जांच को प्रभावित करने वाला माना जाना चाहिए. उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि करूर घटना को लेकर 'हिसाब बराबर करना है' और पूर्व की DMK सरकार पर लोगों की मौतों का आरोप लगाया था. याचिकाकर्ता ने कहा कि इस तरह के बयान जांच और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं.
याचिकाकर्ता ने जांच की निष्पक्षता को लेकर उठाए हैं ये सवाल
याचिका में ये भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री विजय का 10 जुलाई के आसपास करूर जाकर पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता और अन्य लाभ देने का कार्यक्रम है. डीएमके ने कहा कि उसे पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता देने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ये भी नहीं भूलना चाहिए कि ये परिवार CBI जांच में गवाह भी हैं. ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं. याचिका में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 में जब मामला अदालत में लंबित था तब विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी. आरएस भारती ने अदालत से मांग की है कि मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सीटीआर निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए.पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सुरक्षा उपायों और CBI को जानकारी देने के बाद ही दी जाए. CBI को मंत्री आधव अर्जुन के 2 जुलाई के बयान की जांच कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए.
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