- तमिलनाडु के देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय ने लगातार दलित आरक्षण को छोड़कर SC सूची से बाहर निकलने की मांग की है
- इस समुदाय के नेता अनाथन अय्यासामी ने IIT बॉम्बे छात्र के केस में SC/ST एक्ट के गलत उपयोग पर चिंता जताई है
- देवेंद्रकुला वेल्लालर जाति को 1957 में SC सूची में शामिल किया गया था, जिससे सामाजिक आर्थिक लाभ मिले थे
आरक्षण पर जंग के बीच एक ऐसा समुदाय भी है, जिसका कहना है कि उसे दलित न कहा जाए. यह समुदाय है तमिलनाडु का देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय. यह समुदाय दशकों से खुद को दलित जाति से बाहर निकाले जाने की मांग कर रहा है. 2024 में भी इस समुदाय के एक नेता ने कहा था कि हमें दलित कोटा नहीं चाहिए.
अब इस समुदाय के नेता अनाथन अय्यासामी ने हाल ही में X पर पोस्ट कर इस मांग को दोहराया है. उन्होंने आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे के सुसाइड केस के सिलसिले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज केस का जिक्र करते हुए कहा कि इससे छात्रों और शिक्षकों को बहुत गलत संदेश जाता है.
अय्यासामी ने कहा कि एक दलित समुदाय के तौर पर हम ऐसे केस दर्ज करने का समर्थन नहीं करते. अय्यासामी तमिलनाडु के टेंकसी जिले के बीजेपी अध्यक्ष हैं.
क्या कहा अय्यासामी ने?
अय्यासामी ने X पर लिखा 'मैंने उन सभी छात्रों के लिए पूरे दिल से काम किया है जो मेरी तरह गरीबी से आए हैं, जिनमें SC समुदाय के छात्र भी शामिल हैं, ताकि वे शिक्षा और कड़ी मेहनत के दम पर जीवन में आगे बढ़ सकें. यह देश की प्राथमिकता है.'
उन्होंने कहा कि 'लेकिन जब हम प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला जैसे अच्छे शिक्षकों की समझ पर सवाल उठाते हैं और SC/ST कल्याण के नाम पर उन्हें मानसिक परेशानी देते हैं, तो हमारा देश उनके जैसे शिक्षकों और आगे बढ़ने की चाह रखने वाले SC/ST छात्रों, दोनों को बहुत गलत संदेश देता है.'

उन्होंने मांग की कि ये केस वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कानून का इस तरह से हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए.
अय्यासामी ने आगे लिखा, 'मुझे यह कहते हुए गर्व है कि मेरे देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय, जिसे SC का दर्जा मिला है और जो तमिलनाडु की आबादी का लगभग 9% है, ने इस मामले पर आम सहमति बना ली है और एक समुदाय के तौर पर हम ऐसे केस दर्ज करने का समर्थन नहीं करते हैं.'
कोटा नहीं चाहता देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय?
अय्यासामी जिस समुदाय से आते हैं, वह SC कैटेगरी में आता है लेकिन इससे जुड़े कई लोग इस लिस्ट से अपना नाम हटवाना चाहते हैं और आरक्षण के फायदों को छोड़ना चाहते हैं.
तमिलनाडु की तमिझागा मक्कल मुनेत्र कझगम (TMMK) पार्टी के संस्थापक जॉन पांडियन ने 2024 में भी यही मांग की थी.
पांडियन ने 'द हिंदू' को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'हमें नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण नहीं चाहिए. हमारे बच्चे बहुत होशियार हैं और हमारे समुदाय के 99% से ज्यादा लोग, यहां तक कि गांवों में रहने वाले लोग भी, आरक्षण नहीं चाहते और न ही उन्हें इसकी जरूरत है.'
अगस्त 2015 में अमित शाह ने इस समुदाय की तारीफ की थी. उन्होंने समुदाय में जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए देवेंद्रकुल वेल्लालर की कोशिशों और कदमों की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि आपका फैसला आने वाले समय में समाज को एक नई दिशा दिखाएगा.
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देवेंद्रकुल वेल्लालर कौन हैं?
देवेंद्रकुल वेल्लालर जाति के लोग दावा करते हैं कि यह नाम उन्हें इसलिए मिला है, क्योंकि वे देवताओं के राजा भगवान इंद्र के वंशज हैं.
इस जाति के ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी से जुड़े है. तमिलनाडु में इनकी 9% आबादी है. इस जाति को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल किया गया है, क्योंकि 17वीं से 20वीं सदी तक इनके लोगों को खेती के गुलाम और बंधुआ मजदूर के तौर पर रखा गया था.
डॉ. के.आर. हनुमंथन, थिरु आर. देवा असिरवथम और बाद में डॉ. गुरुस्वामी सिद्दन और अन्य लोगों की रिसर्च से पता चलता है कि इस जाति के लोग पुराने तमिल राजाओं- चेर, चोल, पांड्य और पल्लव के वंशज हैं. इन राजाओं ने पुराने समय में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों पर राज किया और 16वीं सदी तक तमिलनाडु पर शासन किया.
दावा किया जाता है कि तमिलनाडु और उसके आस-पास के ज्यादातर पुराने मंदिर इसी समूह ने बनवाए थे और उन पर उनका ही अधिकार था.
विजयनगर साम्राज्य और मराठा राजाओं के हमले के बाद, तमिल राजाओं और उनके समूह से उनके खिताब और जमीनें छीन ली गईं और उन्हें अपनी ही जमीनों पर खेतिहर मजदूर बना दिया गया, जबकि पहले वे उन जमीनों के मालिक हुआ करते थे.
1930 के दशक में कई जातियां उभरीं और सब एक-दूसरे को खुद से बेहतर बताने लगीं. आजादी के बाद 1957 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री कामराज ने देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय की गरीबी को देखते हुए उन्हें SC में शामिल कर लिया.
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SC से बाहर क्यों आने चाहते हैं ये लोग?
SC से बाहर आने का मतलब होगा कि आरक्षण के तौर पर मिलने वाली सारी सुविधाएं और लाभ बंद हो जाएंगे. हालांकि, देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय का कहना है कि उसे आरक्षण का लाभ नहीं चाहिए. इस समुदाय के लोग खुद को जनरल कैटेगरी में डालने की मांग करते हैं.
इस समुदाय के लोग खुद को SC की लिस्ट में शामिल किए जाने पर अपमान की नजर से देखते हैं.
'द हिंदू' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में इस समुदाय के एक नेता डॉ. कृष्णासामी ने चेन्नई में प्रोटेस्ट रैली में कहा था, 'SC लिस्ट में शामिल होने से देवेंद्रकुला वेल्लालर समुदाय पर एक तरह का अपमान लगता है. समुदाय के एक हिस्से का मानना है कि उन्हें कभी भी SC लिस्ट में शामिल नहीं किया जाना चाहिए था, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से यह जमीन के मालिक वाला समुदाय रहा है, जो भारत के बाकी दलित समुदायों से अलग है.'
अगस्त 2015 में देवेंद्र चैरिटेबल ट्रस्ट ने एक कार्यक्रम किया था, जिसमें अमित शाह भी शामिल हुए थे. इस ट्रस्ट से जुड़े थंगाराज ने दावा किया था, 'युवा आरक्षण से बाहर निकलना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें आरक्षण से ज्यादा कुछ नहीं मिला. इसलिए युवा वामपंथी-दलित राजनीति से बाहर निकलना चाहते हैं. हम SC की लिस्ट तक ही सीमित नहीं रहना चाहते.'
हालांकि, कई जानकार इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि SC लिस्ट में होने से देवेंद्रुकला वेल्लालर समुदाय का नुकसान हुआ है.
रिटायर्ड IAS अफसर डॉ. आर. क्रिस्टोदास गांधी ने 'द हिंदू' से 2017 में कहा था कि 1950 के दशक में SC की लिस्ट में शामिल होने के बाद से इस समुदाय को सामाजिक और आर्थिक, दोनों ही तरह से बहुत फायदा हुआ है.
हालांकि, जब देश में आरक्षण का फायदा पाने के लिए बहुत से लोग खुद को 'पिछड़ा' कहलवाना चाहते हैं, तब देवेंद्रकुल वेल्लालर एक ऐसा समुदाय है जो SC लिस्ट से अपना नाम हटवाने की मांग कर रहा है.
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