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सुवेंदु के PA की हत्या से याद आया वो दौर, जब बंगाल में एक ही चुनाव में हुई थी 75 लोगों की हत्या

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का डाटा बताया है कि भारत में राजनीतिक हत्याओं की दर सबसे अधिक पश्चिम बंगाल में रही है. आइए जानते है हाल के सालों में बंगाल के चुनाव की कब कितनी हिंसा हुई? 

सुवेंदु के PA की हत्या से याद आया वो दौर, जब बंगाल में एक ही चुनाव में हुई थी 75 लोगों की हत्या
बंगाल के चुनाव में कब-कब कितनी हुई हिंसा?
  • पश्चिम बंगाल में हाल के चुनावों में हिंसा की घटनाएं लगातार जारी रहीं, जिनमें कई बार पुनः मतदान की घोषणा हुई.
  • गृह मंत्री अमित शाह ने पहली चरण की वोटिंग के बाद बंगाल में अभूतपूर्व शांतिपूर्ण चुनाव होने का दावा किया.
  • पिछले 15 वर्षों में बंगाल में चुनावी हिंसा के दौरान विभिन्न चुनावों में 5 से 75 तक लोगों की मौत हुई.
कोलकाता:

Bengal Election Related Violence: बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ देव की हत्या से बंगाल के चुनावी  हिंसा का दौर फिर से याद आने लगा है. इस बार बंगाल का चुनाव अपेक्षाकृत कम हिंसक रहा था. इस बार सालों बाद बंगाल में ऐसा चुनाव हुआ कि मतदान के दौरान हुई हिंसा में किसी की मौत नहीं हुई. लेकिन वोटों की गिनती के बाद राज्य में जिस तरह से हिंसक घटनाएं फिर से शुरू हुई, उससे राज्य का पुराना इतिहास याद आ गया है.    

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का डाटा बताया है कि भारत में राजनीतिक हत्याओं की दर सबसे अधिक पश्चिम बंगाल में रही है. आइए जानते है हाल के सालों में बंगाल के चुनाव की कब कितनी हिंसा हुई? 

बंगाल विधानसभा चुनाव 2006: 5-6 लोगों की मौत

बंगाल में 2006 हुए विधानसभा चुनाव में वामपंथी सरकार 292 में से 235 सीटों पर बड़ी जीत के सत्ता में वापस आई थी. डाटा बताता है कि यह चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा. हालांकि TMC और CPM के कार्यकर्ताओं के बीच छिटपुट झड़पें हुई थीं. इस चुनाव के दौरान हुई मौतों का कोई पुख्ता डेटा तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 5 से 6 लोगों की मौत हुई थी.

बंगाल पंचायत चुनाव 2008: सिंगुर आंदोलन का दौर, 45 मौत

इस चुनाव में लेफ्ट और टीएमसी के बीच खूब झड़प हुई थी. नंदीग्राम और सिंगुर में हुई भारी झड़पों ने बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत दिया. 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 14 लोगों की जान चली गई थी, और 2008 के चुनावों के बाद मौतों की अनौपचारिक संख्या लगभग 45 बताई गई थी. हालांकि सिंगुर आंदोलन में मौतों का कोई पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. 

लोकसभा चुनाव 2009: CPM, TMC-कांग्रेस और माओवादियों के बीच संघर्ष 

इस चुनाव के दौरान जंगलमहल इलाके में CPM, TMC-कांग्रेस कार्यकर्ताओं और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला. मार्च और मई के बीच चुनाव प्रचार के दौरान कम से कम 15 लोगों की मौत की खबरें आईं, लेकिन चुनाव के बाद हुई हिंसा इतनी बढ़ गई कि वह चौंकाने वाले स्तर तक पहुंच गई.

EPW के 2009 के एक संपादकीय के अनुसार, 16 मई 2009 के बाद हुई राजनीतिक हत्याओं का आंकड़ा 150 के पार पहुंच गया था. लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस ने 'द हिंदू' को 269 समर्थकों की एक सूची की पुष्टि की थी, जिनकी हत्या 2009 के लोकसभा चुनावों से लेकर 2010 के मध्य तक के समय में हुई थी.

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बंगाल विधानसभा चुनाव 2011: लेफ्ट खत्म, टीएमसी का उदय

2011 के चुनाव में ममता बनर्जी ने आखिरकार 34 साल के वामपंथी शासन को खत्म कर दिया, वहीं चुनावों में हिंसा का सिलसिला पहले की तरह ही जारी रहा. कम से कम 17-25 लोगों की मौतें हुईं, और साथ ही यौन उत्पीड़न तथा डराने-धमकाने के कई मामले भी सामने आए. CPM नेताओं के अनुसार, मई 2011 से जुलाई 2016 के बीच 183 वामपंथी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी.

बंगाल पंचायत चुनाव 2013: 20-30 लोगों की मौत

5 चरणों में केंद्रीय बलों की तैनाती के बावजूद, मरने वालों की अनौपचारिक संख्या 20 से 30 बताई गई, और साथ ही सैकड़ों मामले शारीरिक हमले के भी सामने आए. मतदान के दिन ही कम से कम 17 लोगों की मौत दर्ज की गई. इस चुनाव की एक और खास बात यह थी कि इसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच एक लंबी कानूनी लड़ाई चली थी.

लोकसभा चुनाव 2014: 7-16 लोगों की मौत, 1298 लोग घायल  

बंगाल में हिंसा के सबसे ज़्यादा मामले सामने आए, जिनमें 7-16 लोगों की मौत हुई और 1,298 राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता घायल हुए. चुनाव आयोग ने दर्ज किया कि पूरे भारत में चुनावी हिंसा में घायल हुए सभी 1,354 दर्शक (आम नागरिक, जो किसी पार्टी से जुड़े नहीं थे) बंगाल के ही थे.

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बंगाल विधानसभा चुनाव 2016: केंद्रीय बलों की भारी तैनाती, फिर भी 8-12 लोगों की मौत

बंगाल के पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बलों की भारी तैनाती से यह सुनिश्चित हुआ कि हिंसा काबू में रहे, लेकिन चुनाव के बाद के चरण में इसमें ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई. इस चुनाव के दौरान 8-12 लोगों की मौत की खबरें आईं, वहीं बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन और आगज़नी के मामले भी दर्ज किए गए. देसी बमों और आपसी झड़पों में सैकड़ों लोग घायल हुए.

बंगाल पंचायत चुनाव 2018: सबसे हिंसक चुनाव, 75 लोगों की मौत

2018 में बंगाल में हुए पंचायत चुनाव को बीते 20 सालों का सबसे हिंसक चुनाव माना जाता है. चुनाव से पहले और चुनाव के दिन हुई हिंसा में कुल 75 लोगों की मौत की खबर थी, जिनमें से 13 मौतें चुनाव के दिन हुईं. इन चुनावों में अलग-अलग जिलों में देसी बमों से हमले और बूथ पर कब्जे की घटनाएं देखने को मिलीं. इस चुनाव में 34 प्रतिशत सीटें बिना मुकाबले के ही तय हो गईं, जिनमें से ज़्यादातर सीटें TMC ने जीतीं. 

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2019 लोकसभा चुनाव: बीजेपी का उदय, 7 चरणों के चुनाव में 12-15 लोगों की मौत

2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में बीजेपी एक प्रमुख ताकत बनकर उभरी. उत्तरी बंगाल और कोलकाता के पास बैरकपुर में बड़े पैमाने पर झड़पों की ख़बरें आईं. सात चरणों में हुए इस चुनाव के दौरान कम से कम 12 से 15 लोगों की मौत हुई और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए.

2021 विधानसभा चुनाव: तीसरी बार सत्ता में आई टीएमसी

इस चुनाव में BJP के साथ जोरदार मुकाबले के बाद TMC तीसरी बार सत्ता में वापस आई. 'कॉल ऑफ़ जस्टिस' की एक फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान हिंसा की कम से कम 1,300 घटनाएं हुईं, 17 लोगों की मौत हुई और 7,000 छेड़छाड़ के मामले सामने आए.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि 2019 और 2021 के बीच बंगाल में 130 से ज़्यादा BJP कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद चुनाव आयोग जैसे केंद्रीय निकायों ने इसकी जाँच-पड़ताल शुरू कर दी, और कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को बलात्कार और हत्या जैसे सबसे गंभीर अपराधों की जाँच करने का निर्देश दिया.

2023 पंचायत चुनाव: 45 से 55 लोगों की मौत 

बंगाल ने हाल के इतिहास में सबसे हिंसक स्थानीय चुनावों में से एक का अनुभव किया. इन चुनावों की पहचान भारी संख्या में हुई मौतों से रही, जिनकी शुरुआत नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही हो गई थी और जो वोटों की गिनती पूरी होने तक जारी रहीं. इन चुनावों में लगभग 45 से 55 लोगों की मौत की खबरें सामने आईं, जिनमें से 12 से 18 लोगों की जान तो मतदान के दिन ही चली गई थी.

2024 लोकसभा चुनाव: 6-10 लोगों की मौत

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 900 से ज़्यादा कंपनियों ने 2023 के पंचायत चुनावों में बड़े पैमाने पर हुई मौतों को रोकने में मदद की. राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने 6 से 10 मौतों, 100 से ज़्यादा हमलों की घटनाओं और EVM में तोड़फोड़ की कई घटनाओं की रिपोर्ट दी.

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