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This Article is From Jan 03, 2026

दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत पर 5 जनवरी को 'सुप्रीम' फैसला

दिल्ली दंगा मामले में आरोपी शरजील ईमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर ,गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान समेत सात आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पहले ही पूरी हो गई थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत पर 5 जनवरी को 'सुप्रीम' फैसला
उमर खालिद समेत सभी सात आरोपियों की जमानत पर होगी सुनवाई
  • दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत याचिका पर SC जल्द बड़ा फैसला सुनाएगा
  • सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को सुनवाई के बाद जमानत याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए सुनवाई पूरी कर ली है
  • आरोपियों के वकीलों ने ट्रायल में देरी और सजा अवधि को ध्यान में रखते हुए जमानत की मांग की है
नई दिल्ली:

दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत पर जल्दी ही कोई बड़ा फैसला आने वाला है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगामी 5 जनवरी को सुनवाई के बाद बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है. आपको बता दें कि दिल्ली दंगा मामले में आरोपी शरजील ईमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर ,गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान समेत सात आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पहले ही पूरी हो गई थी. कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर तक दोनों पक्षों को अपनी दलीलों के समर्थन में दस्तावेज जमा कराने को कहा था.जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने ये सुनवाई की थी.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल 2 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी छात्र नेताओं उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और अन्य कार्यकर्ताओं की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी. ये सभी छात्र नेता कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत जेल में बंद हैं. कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने बचाव पक्ष की दलीलें सुनी थी.जबरदस्त जिरह के बीच बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि ट्रायल में देरी के आधार पर ज़मानत मिलनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट के कई फ़ैसले ऐसा कहते हैं.

उन्होंने 5 साल जेल में बिताए हैं, और लगभग पूरी सज़ा काट ली है. इसमें कहा गया था कि 2698 पेज की बड़ी चार्जशीट में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि आरोपी ने सरकार बदलने की कोशिश की, यह नाम खराब करने की कोशिश है. इससे पता चलता है कि प्रॉसिक्यूशन का मकसद आरोपी को किसी भी तरह जेल में रखना है.

दलील दी गई थी कि प्रॉसिक्यूटर का मकसद आरोपी को किसी भी तरह हमेशा के लिए जेल में रखना नहीं होना चाहिए.सिर्फ़ भाषण नहीं,उन्हें साज़िश साबित करने के लिए और भी सबूत दिखाने होंगे. इसमें वे फेल हो गए हैं.

वहीं, आरोपी गुलफिशा फातिमा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि वो लगभग 6 साल से जेल में बंद है. 16 सितंबर 2020 को एक चार्जशीट फाइल की गई, लेकिन सप्लीमेंट्री चार्जशीट लगातार फाइल की जा रही हैं. अब तक 4 सप्लीमेंट्री और 1 मेन चार्जशीट फाइल हो चुकी है. ट्रायल खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने कहा था कि बिना सजा के लंबे समय तक किसी को जेल में रखना, हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का मज़ाक है, यह प्री-ट्रायल सज़ा है.

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