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This Article is From Jan 29, 2026

दिल्ली दंगों का मामला : कोर्ट ने पूर्व विधायक ताहिर हुसैन और दो अन्य की जमानत याचिका खारिज की

अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के तीन आरोपियों- सलीम मलिक, अथर खान और पूर्व विधायक ताहिर हुसैन, को जमानत मंजूर करने से इनकार किया.

दिल्ली दंगों का मामला : कोर्ट ने पूर्व विधायक ताहिर हुसैन और दो अन्य की जमानत याचिका खारिज की
  • दिल्ली की एक अदालत ने दंगे की बड़ी साजिश के तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं सुनवाई के बाद खारिज कर दीं.
  • आरोपियों पर यूएपीए के तहत 2020 के दिल्ली दंगों में कथित संलिप्तता और भड़काऊ भाषण देने के आरोप हैं.
  • ताहिर हुसैन चार साल नौ महीने से जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी अस्वीकृत हुई.

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के तीन आरोपियों - सलीम मलिक, अथर खान और आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक ताहिर हुसैन - की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे और उन्होंने जमानत देने से इनकार कर दिया.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पांच अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद तीनों ने जमानत याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि उन पर भी समान आरोप हैं और समानता की मांग की थी. इन तीनों आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 2020 के दंगों में कथित संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं. पूर्व कॉल सेंटर कर्मचारी अथर पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग में हुए विरोध प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में से एक होने और वहां भड़काऊ भाषण देने का आरोप है.

दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, अथर ने कथित तौर पर गुप्त बैठकों में भाग लिया, जिनमें उसने कहा कि "दिल्ली को जलाने का समय आ गया है" और सीसीटीवी कैमरों को नष्ट करने का समन्वय किया.

कब से जेल में बंद हैं ताहिर?

ताहिर हुसैन दिल्ली दंगों के आरोप में 4 साल 9 महीने से जेल में बंद हैं. इससे पहले 22 जनवरी को ताहिर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की बेंच में सहमति नहीं बन पाई थी.

दिल्ली में कब और क्यों हुए थे दंगे?

दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को दंगे शुरू हुए थे. ये दंगे नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान शुरू हुए थे. नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में हुए इस दंगे में 53 लोगों की जान चली गई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. दिल्ली के जाफराबाद, सीलमपुर, भजनपुरा, ज्योति नगर, करावल नगर, खजूरी खास, गोकुलपुरी, दयालपुर और न्यू उस्मानपुर समेत 11 पुलिस स्टेशन के इलाकों में दंगाइयों ने जमकर उत्पात मचाया था. इस दंगे में कुल 520 लोगों पर FIR दर्ज की गईं थीं. 25 फरवरी को ही इन दंगों पर रोक लग गई थी.

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