- दिल्ली पुलिस ने बॉस बनकर की गई 80 लाख रुपये की साइबर ठगी का आरोपी दो दिन में गिरफ्तार किया
- आरोपी ने फर्जी पहचान बनाकर अकाउंटेंट को WhatsApp पर फर्जी मैसेज भेजकर पैसे ट्रांसफर करवाए
- ठगी हुई रकम कॉलेज के बैंक खाते से N.S. Traders के खाते में ट्रांसफर हुई, जिसे पुलिस ने तुरंत होल्ड करा लिया
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट IFSO ने बॉस बनकर की गई 80 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है. पुलिस ने न सिर्फ वारदात के महज दो दिन के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, बल्कि ठगी गई पूरी 80 लाख रुपये की रकम भी सुरक्षित करा ली है. इस मामले में साइबर ठगों ने एक कॉलेज के सीनियर पदाधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कॉलेज के अकाउंटेंट को निशाना बनाया. ठग ने WhatsApp पर पदाधिकारी का नाम और फोटो लगाकर अकाउंटेंट को मैसेज किया और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया. अकाउंटेंट ने मैसेज को असली समझ लिया और बिना संबंधित अधिकारी से फोन पर पुष्टि किए कॉलेज के बैंक खाते से 80 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.
दिल्ली के नरेला स्थित चंदर प्रभु जैन कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ का संचालन ऋषि अरबिंदो एजुकेशनल सोसाइटी करती है. इसी सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक जैन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल स्थित IFSO यूनिट में 27 अक्टूबर 2026 को ई-FIR दर्ज की गई थी.
शिकायत के मुताबिक, किसी अज्ञात व्यक्ति ने संस्थान के एक पदाधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हुए WhatsApp के जरिए कॉलेज के अकाउंटेंट से संपर्क किया. आरोपी ने WhatsApp प्रोफाइल पर वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम और तस्वीर लगा रखी थी. इसके बाद अकाउंटेंट को मैसेज भेजकर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। मैसेज में इस तरह निर्देश दिए गए कि अकाउंटेंट को लगा कि आदेश वास्तव में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी की तरफ से आया है.
इसके बाद अकाउंटेंट या वित्तीय लेनदेन संभालने वाले कर्मचारी को मैसेज भेजा जाता है. मैसेज में कहा जाता है कि किसी जरूरी काम के लिए तुरंत बड़ी रकम ट्रांसफर करनी है. कई बार जल्दबाजी और गोपनीयता का हवाला देकर कर्मचारी पर दबाव बनाया जाता है, ताकि वह किसी से पूछताछ या पुष्टि न कर सके.
इसी भरोसे में आकर अकाउंटेंट ने कॉलेज के बैंक खाते से 80 लाख रुपये इंडसइंड बैंक में N.S. Traders के नाम से चल रहे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए. बाद में जब इस लेनदेन की सच्चाई सामने आई तो पता चला कि वरिष्ठ अधिकारी के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की गई है मामला दर्ज होने के बाद IFSO की टीम ने तेजी से जांच शुरू की। पुलिस ने ट्रांसफर की गई रकम के बैंकिंग ट्रांजैक्शन और लाभार्थी खाते की जानकारी जुटाई.
जांच में पता चला कि कॉलेज से ट्रांसफर किए गए 80 लाख रुपये N.S. Traders के बैंक खाते में पहुंचे थे। पुलिस ने तत्काल इस बैंक खाते को ट्रेस किया और उसमें मौजूद ठगी की रकम पर लियन/होल्ड लगवा दिया. इस कार्रवाई की वजह से ठगी गई पूरी 80 लाख रुपये की रकम सुरक्षित हो गई. पुलिस के मुताबिक, इस मामले में रकम का 100 फीसदी हिस्सा सुरक्षित कराने में सफलता मिली है. IFSO की टीम ने तकनीकी जांच और बैंक खाते से मिले सुरागों के आधार पर आरोपी को 29 अक्टूबर 2026 को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया. खास बात यह है कि 27 अक्टूबर को FIR दर्ज हुई थी और महज दो दिन के भीतर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ में दूसरे लोगों के शामिल होने का खुलासा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी नौशाद ने इस साइबर ठगी में कुछ अन्य लोगों की भूमिका होने की बात बताई है. अब पुलिस उसके खुलासों और संदिग्ध सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कॉलेज के अकाउंटेंट तक फर्जी मैसेज किसने पहुंचाया, वरिष्ठ पदाधिकारी की पहचान और तस्वीर का इस्तेमाल किसने किया और ठगी की पूरी साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे.
इस तरह की साइबर ठगी को 'बॉस इम्पर्सनेशन फ्रॉड' कहा जाता है. इसमें साइबर अपराधी किसी कंपनी, संस्थान या संगठन के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान बनाकर उसके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाते हैं. इस तरह के मामलों में अपराधी कई तरीके अपनाते हैं. मसलन, वे किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम और फोटो से फर्जी WhatsApp प्रोफाइल बना सकते हैं या किसी कर्मचारी के WhatsApp अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच बनाकर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसके बाद अकाउंटेंट या वित्तीय लेनदेन संभालने वाले कर्मचारी को मैसेज भेजा जाता है. मैसेज में कहा जाता है कि किसी जरूरी काम के लिए तुरंत बड़ी रकम ट्रांसफर करनी है. कई बार जल्दबाजी और गोपनीयता का हवाला देकर कर्मचारी पर दबाव बनाया जाता है, ताकि वह किसी से पूछताछ या पुष्टि न कर सके.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं