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This Article is From Mar 30, 2026

अनिरुद्धाचार्य को अपने वायरल हो रहे वीडियो पर क्यों है आपत्ति? दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- आप ही ऐसा सोचेंगे तो...

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने वीडियो को हटवाने के लिए अनिरुद्धाचार्य ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस पर अदालत में जोरदार बहस हुई.

अनिरुद्धाचार्य को अपने वायरल हो रहे वीडियो पर क्यों है आपत्ति? दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- आप ही ऐसा सोचेंगे तो...
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने धार्मिक वक्ता अनिरुद्धाचार्य के व्यक्तित्व अधिकारों को अंतरिम संरक्षण दिया है
  • कोर्ट ने कहा कि अनिरुद्धाचार्य को आलोचना और प्रशंसा दोनों से ऊपर माना जाता है
  • कोर्ट ने कहा- आदि शंकराचार्य ने कभी मानहानि के मुकदमे नहीं दायर किए, वे वाद-विवाद के माध्यम से बात रखते थे

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य अक्सर अपने बयानों और टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. अब उन्होंने इन्हीं पोस्ट्स को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और इन्हें हटाने का आदेश देने की मांग की है. उनकी याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान जज ने अनिरुद्धाचार्य को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें आलोचना से ऊपर होना चाहिए और अपनी प्रतिष्ठा से इतना मोह नहीं रखना चाहिए. 

अनिरुद्धाचार्य ने कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया, जब उनके बयानों के वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया और उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हो गए. उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई टिप्पणियां कीं. हालांकि, उन्हें राहत देते हुए उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स' को भी अंतरिम सुरक्षा भी दे दी.

कोर्ट में हुई जोरदार बहस

याचिका पर सुनवाई के दौरान जब अनिरुद्धाचार्य के वकील ने इस मामले का जिक्र किया तो जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सवाल किया कि वह कहां हैं? इस पर उनके वकील ने बताया कि वह वृंदावन में हैं. तब जज ने कहा कि 'जब वह वृंदावन में हैं तो दिल्ली हाई कोर्ट क्यों आए हैं?' 

वकील ने जब जवाब देना शुरू किया तो जस्टिस गेडेला ने कहा, 'जिस कॉन्टेंट पर आपत्ति है, वह तो मंगल ग्रह पर भी मौजूद हो सकता है, शायद बृहस्पति पर भी. ये वेबसाइटें कहां-कहां एक्सेस की जा सकती हैं? यहां दिल्ली में इन्हें कौन चला रहा है?'

दरअसल, कोर्ट ने सवाल किया कि जब अनिरुद्धाचार्य वृंदावन में रहते हैं तो दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर क्यों की? वकील ने दलील देते हुए कहा कि उनके ज्यादातर अनुयायी दिल्ली में ही रहते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा, 'यहां ही क्यों आए? हमें बताइए कि कहीं और जाना इतना बड़ा मुद्दा क्यों है? वहां क्यों नहीं गए?'

जस्टिस गेडेला ने आगे कहा, 'आपका अधिकार क्षेत्र तो पूरी दुनिया में है. यहां तक कि टिम्बकटू में भी. टिम्बकटू में क्यों नहीं गए? अगर कलकत्ता हाई कोर्ट कोई आदेश देता, तो क्या गूगल और दूसरी कंपनियां उसका पालन नहीं करतीं? क्या इलाहाबाद और लखनऊ की अदालतें ऐसा नहीं करेंगी?'

इस पर उनके वकील ने जवाब दिया कि उनका बिजनेस दिल्ली से ही चलता है, तो जज ने कहा- 'ओह, तो आपकी कंपनियां भी हैं?' उन्होंने आगे कहा, 'जब पूरे देश में हाई कोर्ट और जिला अदालतें हैं तो यह मामला हम पर क्यों थोपा जा रहा है? ऐसी कोई सिविल कोर्ट नहीं है जो वही आदेश न दे सके?'

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'आपको तो आलोचना से ऊपर होना चाहिए'

सुनवाई के दौरान जस्टिस गेडेला ने उन्हें सलाह देते हुए कहा, 'रिकॉर्ड से हटकर बात करें तो आपको इन सबसे ऊपर होना चाहिए. आप तो धार्मिक गुरु हैं और आप आलोचना, तारीफ और पहचान से ऊपर हैं. आप हर इच्छा से ऊपर हैं. आप अपनी प्रतिष्ठा से जुड़े हुए नहीं हैं. अगर आप हैं तो यह उस सिद्धांत के विपरीत होगा, जिसका आप प्रचार करते हैं.'

अनिरुद्धाचार्य के वकील ने कहा कि वायरल वीडियो उनकी छवि को नुकसान पहुंचाएंगे. उन्होंने दलील दी कि जो कुछ भी फैलाया जा रहा है, उसके कारण लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेंगे. इस पर जज ने कहा, 'सवाल यह है कि अगर आप किसी दर्शन का प्रचार करते हैं तो हमेशा कोई न कोई ऐसा होगा जो सहमत नहीं होगा. तकनीकी तौर पर किसी व्यक्ति के पास आपकी बात का विरोध करने का एक उचित अधिकार होता है. आदि शंकराचार्य ने कभी मानहानि के मुकदमे दायर नहीं किए. इसके बजाय वह बहस करते थे और लोगों से कहते थे कि आप गलत हैं.'

वकील ने कहा कि 'प्रतिष्ठा इतनी महत्वपूर्ण है कि अगर एक भी भक्त यह मानने लगे...' कोर्ट ने बीच में ही टोकते हुए कहा- 'इससे उन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. बल्कि इसका मतलब यह होगा कि उस भक्त का विश्वास कमजोर है. यह आप पर कोई सवाल नहीं उठाता.'

कोर्ट ने दिया ये आदेश

इसके बाद उनके वकील ने डीपफेक का जिक्र किया और कहा कि उन्हें ऐसी टिप्पणियां करते हुए दिखाया जा रहा है जो उन्होंने कभी की ही नहीं. जज इस बात को मानते हुए अनिरुद्धाचार्य के 'पर्सनैलिटी राइट्स' को अंतरिम सुरक्षा दे दी. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए शिकायत में शामिल सभी वीडियो और लिंक्स को यूट्यूब से हटाने का आदेश दिया है. 

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