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दिल्ली शराब घोटाले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत निचली अदालत से डिस्चार्ज सभी 20 लोगों को हाईकोर्ट का नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब घोटाले में निचली अदालत से डिस्चार्ज सभी 20 आरोपियों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने इसके अलावा सीबीआई के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी है.

दिल्ली शराब घोटाले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत निचली अदालत से डिस्चार्ज सभी 20 लोगों को हाईकोर्ट का नोटिस
दिल्ली शराब घोटाले पर हाईकोर्ट में सुनवाई
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब घोटाले में डिस्चार्ज सभी 20 लोगों को भेजा नोटिस
  • सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था
  • इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को होगी, तुषार मेहता ने दी दलीलें
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नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता समेत डिस्चार्ज किए सभी 20 लोगों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने इसके अलावा राऊज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई के खिलाफ की कई गई टिप्पणियों पर भी फिलहाल रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को होगी. 

CBI की तरफ से तुषार मेहता हुए पेश 

दिल्ली शराब नीति से जुड़े CBI मामले में अरविंद केजरीवाल और अन्य को आरोपमुक्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली CBI की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी. उन्होंने काह कियह एक याचिका है जिसमें निचली अदालत के आरोपमुक्त करने फैसले को चुनौती दी गई है. यह इस देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और मेरी राय में यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है. इस घोटाले की साइंटिफिक तरीके से जांच की गई, साजिश के हर एक पहलू को स्थापित किया गया है. 

हवाला से पैसे ट्रांसफर करने का आरोप

मेहता ने कहा कि हवाला के माध्यम से और कई किश्तों  में पैसा ट्रांसफर किया गया है. ऐसे मामले में कोई पक्ष बदले की भावना का आरोप लगा सकता है. सभी प्रमुख गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए. उन्होंने कहा कि कुल 164 बयान दर्ज किए गए थे. ऐसे गवाह हैं जिन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि साजिश कैसे रची गई  रिश्वत कैसे दी गई और किस-किस को दी गई. एक व्यक्ति विजय नायर है जो उस राजनीतिक दल का कम्युनिकेशन इंचार्ज है. लोगों को दिए गए फायदों के बदले 19 करोड़ से 100 करोड़ तक की रिश्वत दी गई. इसमें से 44.50 करोड़ हवाला के माध्यम से ट्रांसफर किए गए. मामले में जांच से यह भी दिखाया गया है कि यह पैसा पार्टी के गोवा चुनाव के फंड के लिए भेजा गया था.

एसजी तुषार मेहता ने दी दलीलें 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है. रिश्वत देने, लेने, स्वीकार करने और इस्तेमाल करने का स्पष्ट मामला है. उन्होंने कहा कि हमारे पास ई-मेल और व्हाट्सएप चैट हैं. यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है.तुषार मेहता ने कहा कि ASG ने ट्रायल कोर्ट के सामने 10 दिनों तक बहस की. कुछ ही दिनों में फैसला आ गया. तेजी से न्याय एक लक्ष्य है, लेकिन इसका परिणाम न्याय की विफलता नहीं होना चाहिए. तुषार मेहता ने कहा कि जब हम साजिश का आरोप लगाते हैं, तो हमें हर हिस्से को साबित करना होता है. ट्रायल में इसे साजिश बताने  के लिए सभी हिस्सों को जोड़ना पड़ता है. साजिश कभी भी खुलेआम नहीं रची जाती. डिस्चार्ज ऑर्डर में भी इस पर यकीन नहीं किया जाता, बरी करने के ऑर्डर में नहीं. गवाहों के बयान और होटल के रिकॉर्ड मौजूद हैं और इनकी जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान की जानी चाहिए, न कि बरी किए जाने के चरण में. मेहता ने कहा हमने सबूत नष्ट करने के कई मामले दिखाए है, 170 फोन नष्ट कर दिए गए, हमने जो सबूत जुटाए थे, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन सभी सबूतों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है जो आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले थे.

कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष की तरफ से जो सबूत पेश किए गए थे, उन्हें ऑर्डर में शामिल नहीं किया गया है. यह भी बताया गया कि ऑर्डर में कुछ ऐसी टिप्पणियां की गई हैं जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं. साथ ही यह भी मांग की गई कि CBI अधिकारियों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर फिलहाल रोक लगाई जाए. कोर्ट ने कहा कि इस मामले का फैसला होने तक ट्रायल कोर्ट को ED से जुड़े केस की सुनवाई टालने के लिए कहा जाएगा. इसके अलावा, CBI अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणियों पर रोक लगाने का आदेश दिया जाएगा. साथ ही मामले में नया नोटिस भी जारी कर दिया गया.

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