- दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई और 26 घायल हैं
- जिस होटल में आग लगी, उसके पास न तो फायर सेफ्टी की NOC थी और न ही निर्माण की कानूनी मंजूरी
- सरकार ने ऐसे सभी अवैध होटलों और इमारतों का निरीक्षण कर उन्हें सील करने और लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया है
दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बने 'फ्लरिश होटल' में बुधवार सुबह जो आग लगी थी, उसमें 21 लोगों की जान चली गई. जबकि 26 लोगों का इलाज चल रहा है. अब तक जो पता चला है, उसमें साफ तौर पर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है. जिस होटल में आग लगी थी, उसके पास न तो फायर सेफ्टी की NOC थी और न ही 5 मंजिला इमारत बनाने की मंजूरी.
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद कह रहे हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए उन सभी इमारतों का निरीक्षण किया जाएगा, जिनके पास जरूरी दस्तावेज और मंजूरी नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि 'हमने फैसला लिया है कि ऐसी इमारतों को सील किया जाएगा और उनके लाइसेंस को रद्द किया जाएगा.'
Delhi: On the fire incident in Malviya Nagar, Minister Ashish Sood says, "The entire administration is deeply concerned and distressed by this tragic incident. We are committed to ensuring that such incidents do not recur. As part of the enforcement action, buildings that do not… pic.twitter.com/nB1KdxA7q0
— IANS (@ians_india) June 3, 2026
इस अग्निकांड को लेकर आशीष सूद ने शाम को एलजी तरनजीत सिंह संधू के साथ एक बैठक की. इस बैठक में फैसला लिया गया कि गुरुवार से पूरी दिल्ली में फायर सेफ्टी के नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए एक कैंपेन शुरू किया जाएगा. आशीष सूद ने बताया कि जहां कहीं भी कोताही पाई जाएगी, वहां कार्रवाई होगी.
Today, along with Hon'ble LG Shri @SandhuTaranjitS Ji, a high-level review meeting was held regarding the tragic fire incident in Malviya Nagar. The loss of innocent lives is deeply painful and demands decisive action. Following detailed deliberations, a coordinated citywide fire… pic.twitter.com/iSaKkaukOo
— Ashish Sood (@ashishsood_bjp) June 3, 2026
हादसे के बाद ही ऐसी कार्रवाई क्यों?
लेकिन सवाल उठता है कि ऐसे हादसों के बाद ही इस तरह की कार्रवाई क्यों की जाती है? जबकि, यह पहली बार नहीं है जहां फायर सेफ्टी के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हों.
दिल्ली के फायर सर्विस डिपार्टमेंट का खुद कहना है कि राजधानी में बहुत से होटल और क्लब ऐसे हैं, जहां फायर सेफ्टी का कोई सर्टिफिकेट नहीं हैं. पिछले साल जब गोवा के एक क्लब में आग लगी थी, तब 8 दिसंबर को न्यूज एजेंसी PTI ने एक रिपोर्ट छापी थी. इस रिपोर्ट में PTI ने फायर सर्विस डिपार्टमेंट (DFS) के हवाले से बताया था कि दिल्ली में सिर्फ 52 होटलों और 38 क्लबों के पास ही फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट है.

उस रिपोर्ट में PTI ने रेस्टोरेंट एसोसिएशन से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया था कि दिल्ली में तकरीबन 5,000 होटल और 1,000 नाइट क्लब हैं.
इसका मतलब हुआ कि दिल्ली में 2% से भी कम होटल-क्लब ही ऐसे हैं, जिनके पास फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट है. यानी 98% होटल और क्लब ऐसे ही बगैर किसी मंजूरी और सर्टिफिकेट के धड़ल्ले से चल रहे हैं. फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट मिलने का मतलब है कि किसी होटल या क्लब में आग लगने पर निपटने के लिए जरूरी उपाय और उपकरण लगे हुए हैं.
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चेकिंग से बदलेंगे हालात?
ऐसी इमारतों में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. सरकार किसी की भी हो, वह सख्त से सख्त कार्रवाई करने का दावा करती है.
'फ्लरिश होटल' में आग लगने के बाद एक बार फिर सरकार एक्टिव हुई है और कार्रवाई करने की बात कह रही है. सरकार आज से सभी होटलों की चेकिंग करेगी, ताकि पता चल सके कि कौन-कौन से होटल बिना फायर सेफ्टी NOC के चल रहे हैं.
PTI की 8 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट से भी पता चलता है कि 98% होटल और क्लब बिना किसी फायर सेफ्टी NOC के चल रहे हैं. हालांकि, PTI की यह रिपोर्ट लगभग 6 महीने पुरानी है और हो सकता है कि अब तक इन आंकड़ों में थोड़ा सुधार हुआ हो.

लेकिन दिल्ली फायर सर्विस के ही आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में आग लगने की दुर्घटनाएं और इनमें होने वाली मौतें लगातार बढ़ रही हैं. DFS के मुताबिक, 2022-23 में आग लगने की दुर्घटनाओं में 1,029 मौतें हुई थीं. 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,303 पर पहुंच गया. इसी साल 30 मई तक आग लगने से 45 लोगों की जान जा चुकी है. सबसे ज्यादा 15 मौतें मार्च महीने में हुई थी.
लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि क्या चेकिंग करने से हालात बदलेंगे? उम्मीद है कि हर बार की तरह इस बार सिर्फ कुछ दिन की चेकिंग के बाद सबकुछ पहले जैसा सामान्य नहीं होगा और वाकई कुछ कार्रवाई होगी, ताकि दिल्ली वाले ही नहीं, बल्कि दिल्ली आने वाले भी सलामत रहें.
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