दिल्ली की अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ नौकरी के बदले जमीन हथियाने के मामले में आरोप तय करने का आदेश सुनाया है. कोर्ट के मुताबिक चार्जशीट में यह संकेत मिलता है कि लालू यादव ने रेल मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी पदों के बदले सरकारी जमीनों पर कब्जा करने की साजिश रची थी.
दिल्ली की अदालत ने तेज प्रताप और तेजस्वी के खिलाफ भी आरोप तय करने का निर्देश दिया है. अदालत ने संदेह के आधार पर पाया कि लालू और उनके परिवार की ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी.आरोपपत्र में नौकरी के बदले जमीन अधिग्रहण का स्पष्ट जिक्र है.
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गिरोह की तरह काम कर रहा था लालू परिवार- कोर्ट
अदालत ने संदेह के आधार पर पाया कि लालू और उनके परिवार की ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी. चार्जशीट में स्पष्ट रूप से नौकरी के बदले जमीन अधिग्रहण का जिक्र है. इस पर कोर्ट ने माना कि लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहा था.
अदालत ने 52 लोगों को बरी किया
अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार समेत 40 से अधिक लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं. इस मामले में कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया है.
क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम?
'लैंड फॉर जॉब' स्कैम उस समय का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे. आरोपों के मुताबिक लालू यादव ने रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में लोगों को नौकरी देने के बदले उनसे जमीन ली थी. लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहे थे.
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नौकरी के बदले जमीन अपने नाम कराई
सीबीआई के मुताबिक, ये जमीनें बेहद कम दामों में बेच दी गई थीं. सीबीआई ने ये भी पाया कि जोनल रेलवे में भर्ती का कोई विज्ञापन या पब्लिक नोटिस जारी नहीं किया गया था. लेकिन, जिन परिवारों ने यादव परिवार को अपनी जमीन दी, उनके सदस्यों को रेलवे में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्ति दी गई.
ED के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों के आवेदनों को अप्रूव करने में जल्दबाजी दिखाई गई. कुछ आवेदनों को तीन दिनों में ही अप्रूव कर दिया गया था. पश्चिम मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने उम्मीदवारों के आवेदनों को बिना पूरे पते के भी अप्रूव कर नियुक्त कर दिया.
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