- एआई‑इम्पैक्ट समिट में शर्टलेस प्रदर्शन के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली और हिमाचल पुलिस में तकरार
- शिमला से दिल्ली ले जाते समय दिल्ली पुलिस को हिमाचल पुलिस ने रोक लिया और आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया
- दोनों पुलिस बलों के बीच रातभर गतिरोध चला और जब्ती ज्ञापन साझा करने के बाद ही दिल्ली पुलिस को अनुमति मिली
देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई‑इम्पैक्ट समिट में कथित ‘शर्ट उतारकर प्रदर्शन' करने के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर हाल में दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच गतिरोध पैदा हो गया. यह विवाद तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस की टीम आरोपियों को पकड़कर शिमला से रवाना होने लगी और बीच में रोक ली गई.
शोगी सीमा पर ‘चाय' वाली टिप्पणी
26 फरवरी की सुबह, शिमला से करीब 15 किलोमीटर दूर शोगी सीमा से राष्ट्रीय राजधानी के लिए निकलते समय दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने हिमाचल पुलिस के समकक्षों से कहा कि आपने हमारे काम में बहुत बाधा डाली, हमें पूरी रात हिरासत में रखा, कम से कम चाय के लिए तो पूछ सकते थे. इस पर मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने आगे बढ़कर चाय की पेशकश की, लेकिन अधिकारी ने जवाब दिया—“धन्यवाद, लेकिन अब हम यहां से चले जाएंगे.”
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रातभर का गतिरोध और अंततः अनुमति
एआई‑इम्पैक्ट समिट में हुए ‘बिना शर्ट के विरोध' प्रकरण के सिलसिले में तीन लोगों की गिरफ्तारी पर शिमला में दोनों बलों के बीच रात भर गतिरोध चलता रहा. आखिरकार दिल्ली पुलिस की टीम को तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली लौटने की अनुमति मिल गई.
दस्तावेज़ साझा करने के बाद सुलह
गतिरोध तब खत्म हुआ जब दिल्ली पुलिस ने जब्ती ज्ञापन (Seizure Memo) की एक प्रति हिमाचल पुलिस के साथ साझा की. हालांकि, डिजिटल सबूत दिल्ली पुलिस ने साझा नहीं किए. दिल्ली पुलिस का कहना था कि शिमला पुलिस को इसके अलावा किसी भी चीज़ के लिए लिखित अनुरोध देना होगा.
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रिटायर्ड डीजी स्तर के अधिकारी की राय
पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त एक अधिकारी ने ‘पीटीआई‑भाषा' से कहा कि रोकने के बाद पहचान पत्रों की जांच हो जाने पर हिमाचल पुलिस को दिल्ली पुलिस टीम को छोड़ देना चाहिए था. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस को स्थानीय थाने को सूचित करना चाहिए था.
गिरफ्तारियां: कहां से और कैसे
बीते मंगलवार देर रात, शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र के चिरगांव स्थित एक होटल से दिल्ली पुलिस ने युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया. इसके बाद, स्थानीय पुलिस ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को रोक लिया और आरोपियों को शिमला वापस लाकर स्थानीय अदालत में पेश किया.
दोबारा रोक, कई धाराएं दर्ज
उसी शाम, जब टीम आरोपियों को दिल्ली ले जाने की दोबारा कोशिश कर रही थी, तो उन्हें शोगी में फिर से रोक लिया गया. इस दौरान अपहरण, संपत्ति छिपाने, गलत तरीके से कैद करने और गैरकानूनी सभा के मामले दर्ज किए गए.
आरोपी कौन हैं. खबरों के मुताबिक, युवा कांग्रेस के तीनों कार्यकर्ता सौरभ सिंह, अरबाज और सिद्धार्थ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के निवासी बताए गए.
(भाषा इनपुट्स के साथ)
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