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This Article is From Dec 30, 2025

मजाक में कही गई बातें नस्लीय हमला नहीं... देहरादून पुलिस अधिकारी का त्रिपुरा के छात्र की मौत पर बयान

9 दिसंबर को अंजेल चकमा और उनके भाई मिशेल का कुछ स्थानीय लोगों और पूर्वोत्तर के एक अन्य व्यक्ति से झगड़ा हो गया, जिन्होंने कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणी की थी. जब अंजेल और उनके भाई ने इसका विरोध किया तो उनके बीच हाथापाई शुरू हो गई. इस दौरान उन पर चाकू और अन्य वस्तुओं से हमला किया गया.

मजाक में कही गई बातें नस्लीय हमला नहीं... देहरादून पुलिस अधिकारी का त्रिपुरा के छात्र की मौत पर बयान
  • देहरादून में त्रिपुरा के छात्र पर हमला नस्लीय नहीं था, पुलिस ने कहा कि मजाक में की गई टिप्पणियों से विवाद हुआ.
  • 9 दिसंबर को अंजेल और उनके भाई का झगड़ा हुआ, जिसमें चाकू से हमले के बाद अंजेल की 26 दिसंबर को मौत हो गई.
  • पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी नेपाल भाग गया है. मामले की जांच जारी है.

त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा पर देहरादून में हुआ हमला नस्लीय हमला नहीं था. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एनडीटीवी को यह बताया है. पुलिस के अनुसार, मजाक में की गई अपमानजनक टिप्पणियों से यह गलत धारणा बनी कि छात्र को निशाना बनाया जा रहा है. देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कहा, "यह नस्लीय टिप्पणी की श्रेणी में नहीं आता क्योंकि घटना में शामिल युवक भी उसी राज्य का निवासी है."

पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक साथ बैठे लोगों के समूह के बीच कुछ अपमानजनक टिप्पणियां हो रही थीं और किसी तरह से यह धारणा बन गई कि टिप्पणियां उन्‍हें लक्ष्य बनाकर की गई हैं. इसी भ्रम में झड़प हुई और यह पूरी घटना उसी झड़प का परिणाम है.

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9 दिसंबर की घटना, 26 दिसंबर को मौत  

9 दिसंबर को अंजेल चकमा और उनके भाई मिशेल का कुछ स्थानीय लोगों और पूर्वोत्तर के एक अन्य व्यक्ति से झगड़ा हो गया, जिन्होंने कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणी की थी. जब अंजेल और उनके भाई ने इसका विरोध किया तो उनके बीच हाथापाई शुरू हो गई. इस दौरान उन पर चाकू और अन्य वस्तुओं से हमला किया गया.

माइकल के सिर पर कथित तौर पर वार किया गया, जबकि अंजेल को गर्दन और पेट में चाकू मारा गया. अंजेल चकमा की 26 दिसंबर को मौत हो गई. वह 24 वर्ष के थे.

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आरोपी मजाक में कर रहे थे ऐसी बातें: पुलिस

अधिकारी ने कहा, "वे एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे, उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था और न ही उनके बीच कभी कोई लड़ाई या बहस हुई थी. यह लड़ाई अजनबियों के बीच हुई और पूर्वोत्तर के लड़कों में से एक ने पूछताछ के दौरान खुद स्वीकार किया कि टिप्पणियां किसी और के लिए नहीं थीं, वे बस आपस में मजाक में ऐसी बातें कर रहे थे." उन्होंने हमले के नस्लीय रूप से प्रेरित होने की बात को खारिज कर दिया.

पुलिस ने हत्या के सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस मामले में नेपाल के रहने वाला आरोपी सीमा पार करने में सफल रहा है. 

अंजेल के भाई ने अपनी शिकायत में क्‍या कहा?

अंजेल चकमा के भाई मिशेल की शिकायत पर दर्ज पुलिस केस के अनुसार, वे 9 दिसंबर की शाम को बाजार गए थे. जब दोनों कुछ घरेलू सामान खरीद रहे थे तभी कुछ नशे में धुत लोगों ने पीड़ित के खिलाफ जाति आधारित अपशब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया.

12 दिसंबर को दर्ज एफआईआर में लिखा है, "जब मेरे भाई ने उनके जाति आधारित अपशब्दों का विरोध किया तो आरोपियों ने उन पर चाकू और रॉड से हमला कर दिया."

नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेता ऋषिकेश बरुआ ने बताया कि त्रिपुरा के छात्र से "यह दिखाने के लिए कहा गया कि वह हिंदी बोल सकता है".

कोई छात्र नस्‍लवाद का सामना न करे: बरुआ

उन्‍होंने कहा, "उन्हें ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी. हमारा देश विविधताओं से भरा है. यहां अनेक भाषाएं और जनजातियां हैं. जब वे बाजार गए तो उनकी हिंदी सही नहीं थी, इसलिए वहां मिले लोगों ने टिप्पणी की कि "ये लोग भारत से नहीं हैं, हमें हिंदी बोल कर दिखाओ." तब मेरे दोनों भाई उनका समर्थन करने गए और कहा कि वे वास्तव में भारत से हैं. इसी दौरान उनके बीच कहासुनी हो गई, जो इतनी बढ़ गई कि किसी ने चाकू निकालकर उन पर तीन बार वार कर दिया."

बरुआ पिछले छह वर्षों से देहरादून में रह रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्तर के अधिकांश छात्रों को किसी न किसी रूप में नस्लवाद का सामना करना पड़ा है.

बरुआ ने कहा, “यह शिक्षा की कमी के कारण है. जब आप बाहर की दुनिया देखेंगे तो आपको एहसास होगा कि भारत कितना विविधतापूर्ण है. ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ कानून बनाया जाना चाहिए, ताकि यहां पढ़ने आने वाले किसी भी छात्र को इसका सामना न करना पड़े.”

पूर्वोत्तर के लोग भी भारतीय हैं: अजेल के‍ पिता

अंजेल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी भारतीय हैं और उन्होंने सरकार से समान व्यवहार सुनिश्चित करने का आग्रह किया.

पीड़ित के पिता बीएसएफ जवान हैं. उन्‍होंने कहा, “हमारे पूर्वोत्तर के बच्चे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे विभिन्न स्थानों पर काम करने या पढ़ाई करने जाते हैं, उनके साथ इतना भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. हम सभी भी भारतीय हैं. मैं सरकार से सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने का अनुरोध करता हूं.”

सोमवार को उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अंजेल चकमा पर हुए क्रूर हमले पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इस घटना को "मानवता और संवेदनशीलता पर गहरा आघात" बताया.

सिंधिया ने अपने पोस्ट में लिखा, "देहरादून में अंजेल चकमा और त्रिपुरा के मिशेल के साथ हुई अमानवीय घटना ने मुझे बहुत दुखी और स्तब्ध कर दिया है. यह मात्र एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता पर गहरा आघात है. मैं पीड़ित परिवार के असहनीय दुख को समझता हूं और इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा हूं."

गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने की सीएम से बात 

अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्र के पिता से फोन पर बात की और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और विदेश से बच्चे उत्तराखंड में पढ़ने आते हैं और ऐसा माहौल पहले कभी यहां नहीं रहा.

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने इस घटना के संबंध में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की है.

धामी ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी तरह खड़ी है.

विविधता का सम्मान न करने की विफलता: थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने छात्र की मृत्यु को "राष्ट्रीय अपमान" और समाज की अपनी विविधता का सम्मान न करने की विफलता बताया. उन्होंने कहा, "यह महज एक त्रासदी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अपमान है," और नागरिकों से एक ऐसे समाज के निर्माण का आग्रह किया जहां "किसी भी भारतीय को अपनी ही धरती पर पराया महसूस न कराया जाए."

थरूर ने कहा, "त्रिपुरा के एक युवक, एक गौरवान्वित भारतीय को नस्लीय रूप से प्रताड़ित किया गया, 'चीनी' और 'मोमो' जैसे अपशब्दों से अपमानित किया गया और आखिर में उसकी हत्या कर दी गई." उन्होंने तर्क दिया कि यह हत्या हिंसा की एक अकेली घटना नहीं थी, बल्कि "अज्ञानता, पूर्वाग्रह और समाज की अपनी विविधता को पहचानने और उसका सम्मान करने में विफलता का चरम" थी.

यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर कलंक: केजरीवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को "हृदयविदारक" बताया है. 

केजरीवाल ने कहा कि यह बेहद भयावह और दिल दहला देने वाली घटना है. त्रिपुरा के एक युवा एमबीए छात्र की देहरादून में उसकी पहचान के कारण चाकू मारकर हत्या कर दी गई. यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर कलंक है. देश को नस्लवाद और घृणा अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और राष्ट्रीय कानून की जरूरत है. न्याय त्वरित और उदाहरण बनना चाहिए.

छात्र पर हुए हमले की निंदा करते हुए नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर राज्य भारत का अभिन्न अंग है.

उन्‍होंने कहा, "सबसे पहले हमें बोलने से पहले सोचना चाहिए. मैं पूरे समुदाय की निंदा नहीं कर सकता, लेकिन जिन्होंने यह किया है वे बुद्धिजीवी नहीं हैं और पूर्वोत्तर के लोगों के बारे में कुछ नहीं जानते. हम किसी भी तरह से खुद को चीनी नहीं मानते और किसी भी रूप में हम 'मोमो' नहीं हैं. मोमो एक व्यंजन है; यह बहुत स्वादिष्ट होता है और उन्हें भी इसे खाना चाहिए, लेकिन हमारे प्रति यह रवैया गलत है."

17 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद अंतिम वर्ष के एमबीए छात्र की 26 दिसंबर को मौत हो गई थी.

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