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डिफेंस में आत्मनिर्भर बनने के लिए क्या कर रहा भारत, NDTV डिफेंस समिट में राजनाथ सिंह ने बताया

NDTV Defence Summit: राजनाथ सिंह ने कहा कि दस साल पहले ही हमारी सरकार ने स्पष्ट रूप से समझ लिया था कि भारत को आत्मनिर्भर होना जरूरी है. तब सबसे बड़ी समस्या ये थी कि हमारा डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम काफी लिमिटेड था,

डिफेंस में आत्मनिर्भर बनने के लिए क्या कर रहा भारत, NDTV डिफेंस समिट में राजनाथ सिंह ने बताया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

NDTV Defence Summit: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह NDTV डिफेंस समिट में शामिल हुए, जहां उन्होंने बताया कि डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत क्या-क्या कर रहा है. रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ सालों में भारत एक बड़ा एक्सपोर्टर बन गया है और अब हर चीज के लिए दूसरे देशों की तरफ देखने की जरूरत नहीं पड़ती है. 

डिफेंस सेक्टर को किया आत्मनिर्भर

रक्षा मंत्री ने कहा, दस साल पहले ही हमारी सरकार ने स्पष्ट रूप से समझ लिया था कि भारत को आत्मनिर्भर होना जरूरी है. तब सबसे बड़ी समस्या ये थी कि हमारा डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम काफी लिमिटेड था, हम पूरी तरह से इंपोर्ट पर निर्भर थे. तब डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम में प्राइवेट सेक्टर की भी खास भागीदारी नहीं थी, ये सब पब्लिक सेक्टर तक ही सीमित था और इनोवेशन पर फोकस नहीं होता था. यही वजह थी कि हमें हर चीज के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहना पड़ता था. इसी सोच ने हमें नई दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. 

  • हमने डिफेंस एक्सपोर्ट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. 
  • 2014 में डिफेंस एक्सपोर्ट 700 करोड़ से कम था, आज वो बढ़कर 24 हजार करोड़ तक पहुंच गया है. 
  • भारत अब केवल खरीदार नहीं है, भारत अब एक्सपोर्टर बन चुका है. 
  • डीआरडीओ, डिफेंस स्टार्टअप्स और MSME'S को लेकर फॉर्वर्ड 
  • डिफेंस लाइसेंसिंग की प्रक्रिया आसान बनाई है, FDI की सीमा 74% तक बढ़ाई है और मेक इन इंडिया की प्रक्रिया को सरल किया है. 

  • उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थापित किए गए हैं, अन्य राज्यों में भी बनाए जाएंगे.

वॉरशिप निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर हुआ भारत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए हमने कई पॉजिटिव इंडेजिनाइजेशन लिस्ट जारी किए, जिसमें ये तय किया गया कि करीब 50500 से ज्यादा चीजों को अब इंपोर्ट नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें एक तय सीमा के अंदर भारत की धरती में ही बनाया जाएगा. अब तक इनमें से 3000 से ज्यादा आइटम भारत में बनाए जा रहे हैं, जिन्हें पहले इंपोर्ट किया जाता था. हम वॉरशिप के निर्माण में भी पूर तरह आत्मनिर्भर हो गए हैं. अब हम अपने सारे वॉरशिप अपने देश में अपनी जमीन पर ही बना रहे हैं. 

इकनॉमी को बूस्ट कर रहा डिफेंस सेक्टर 

रक्षा मंत्री ने कहा कि डिफेंस सेक्टर आज इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और इकनॉमिक सिक्योरिटी का एफिशिएंट इको सिस्टम बन चुका है. यही वो सोच है, जो भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाते हुए विश्व मंच पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है. आमतौर पर हम ये सोचकर चलते हैं कि डिफेंस सेक्टर सिर्फ सीमाओं की रक्षा तक सीमित है, लेकिन सच्चाई इससे कई ज्यादा व्यापक है. ये हमारी इकनॉमी को सशक्त बनाने और उसके भविष्य को सुरक्षित रखने वाला स्तंभ बन चुका है. 

  • भारत ने 1.5 लाख करोड़ से अधिक का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन हासिल कर लिया है, जो एक रिकॉर्ड है. 
  • ये एक नए और उभरते हुए भारत की तस्वीर है, जिसमें सभी का योगदान है. 
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डिफेंस कैपेबिलिटी का नमूना देखा, जिसमें स्वदेशी इक्विपमेंट्स के साथ टारगेट पर स्ट्राइक की गई. 
  • ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ भारत की विजय और पाकिस्तान की पराजय नहीं है, इसके पीछे कई सालों की रणनीतिक तैयारी की बड़ी भूमिका रही है.

मिनटों में दुश्मन को मात दे सकता है भारत

1998 का जो पोखरण परमाणु परीक्षण हुआ, उसके बाद जो प्रतिबंध और चुनौती हमारे सामने आई थी, उसे हमने अपनी स्वदेशी एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस एयरक्राफ्ट कैरियर, रडार सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन के माध्यम से पार किया है. ये सिर्फ सैन्य ताकत को नहीं दिखाता है, बल्कि हमारी टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल स्ट्रेंथ का उदाहरण है. आज पूरी दुनिया जानती है कि भारत कुछ ही मिनटों में दुश्मन को मात दे सकता है. 

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