पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उससे जुड़े सवाल अब भी देश की राजनीति और छात्र समाज में चर्चा का विषय बने हुए हैं. आंदोलन के दौरान उठी मांगें संसद तक पहुंचीं, कई विपक्षी दलों ने छात्रों की आवाज को अपने भाषणों में जगह दी, लेकिन छात्रों के बीच अब एक नई बहस छिड़ गई है. सवाल यह है कि क्या आंदोलन अपने मूल मुद्दों से भटक गया था और क्या कुछ आपत्तिजनक रील्स तथा नारों ने पूरे आंदोलन की छवि को नुकसान पहुंचाया?
एनडीटीवी ने इस मुद्दे पर 'Gen-Z महापंचायत' प्रोग्राम कर छात्रों के मन में क्या चल रहा है, ये जानने की कोशिश की. यानी क्या वे आंदोलन में गाली और आपत्तिजनक भाषा का समर्थन करते हैं या फिर इसके खिलाफ हैं?
'अपमानजनक भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती'
ABVP की छात्र नेता अपराजिता ने दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में वास्तविक छात्रों के साथ ऐसे लोग भी शामिल थे जो छात्रों के नाम पर राजनीतिक एजेंडा चला रहे थे. कुछ रील्स और नारे छात्र आंदोलन की गरिमा के अनुरूप नहीं थे और किसी भी समुदाय, धर्म, महिला या सुरक्षा बलों के खिलाफ अपमानजनक भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती.
वहीं NSUI और समाजवादी छात्र संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया. उनका कहना था कि आंदोलन की शुरुआत पूरी तरह शांतिपूर्ण थी और छात्रों की मुख्य मांग परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करना था. छात्र नेताओं ने दावा किया कि यदि सरकार समय रहते छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करती तो आंदोलन इतनी दूर तक नहीं जाता.
इन्फ्लुएंसर श्रद्धा सिंह ने माफी मांगने पर क्या कहा?
आंदोलन के दौरान मौजूद रहीं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा सिंह ने माना कि उनके एक वीडियो को लेकर विवाद हुआ और बाद में उन्होंने माफी भी मांगी. श्रद्धा ने कहा कि उनका मकसद किसी सुरक्षा बल या व्यक्ति का अपमान करना नहीं था. उन्होंने दावा किया कि वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकियां तथा आपत्तिजनक संदेश मिलने लगे, जिसके चलते उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगना उचित समझा.
छात्रों के बीच भी इस बात पर सहमति दिखाई दी कि किसी भी आंदोलन में अभद्र भाषा या व्यक्तिगत अपमान की जगह नहीं होनी चाहिए. कई छात्रों ने माना कि आंदोलन का मुद्दा सही था, लेकिन कुछ लोगों की हरकतों ने उसके संदेश को कमजोर किया. वहीं कुछ छात्रों का कहना था कि पुलिस कार्रवाई के बाद गुस्से का माहौल बना, जिससे स्थिति बिगड़ी.
बल प्रयोग के खिलाफ छात्र
इस दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा को लेकर भी तीखी बहस हुई. छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया, जबकि दूसरी ओर यह तर्क दिया गया कि यदि कहीं हिंसा हुई और पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. कई प्रतिभागियों ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए.
हालांकि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक बात पर लगभग सभी सहमत दिखे कि देश के युवाओं में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक को लेकर गहरी नाराजगी है. छात्रों का कहना है कि असली मुद्दा रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही है.
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