देश में इन दिनों युवाओं, खासतौर पर Gen Z की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. इसी बीच अब राजनीतिक दलों ने भी इस जेनरेशन को टारगेट करना शुरू कर दिया है. युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए मोदी सरकार हर दिन एक केंद्रीय मंत्री को एक यूनिवर्सिटी में भेजने की योजना बना रही है. मंत्री वहां युवाओं से बातचीत करेंगे, उनकी चिंताओं पर चर्चा करेंगे और देश के सामने मौजूद तमाम मुद्दों पर उनकी राय को बेहतर ढंग से समझेंगे. इस पहल का नाम 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' रखा गया है, जिसमें तमाम केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग यूनिवर्सिटीज के छात्रों से बातचीत के लिए कहा गया है.
Gen Z आउटरीच प्रोग्राम क्या है?
मोदी सरकार का टारगेट Gen Z आउटरीच प्रोग्राम से उन युवाओं तक पहुंचना है, जो अपनी राय खुलकर रखते हैं और खुद से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार से बात करना चाहते हैं. मंत्री अलग-अलग विषयों पर युवाओं से बातचीत करेंगे और उन्हें सरकार की तमाम योजनाओं, खासतौर पर छात्रों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे. बताया गया है कि शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया को यूनिवर्सिटीज और मंत्रियों के दौरों के बीच तालमेल की जिम्मेदारी दी गई है.
पीएम मोदी की पहल
जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था, इसके बाद पीएम मोदी ने खुद इंस्टाग्राम पर रील के जरिए Gen Z से संवाद किया और उनके अंदाज में ही उनसे बात की. साथ ही बाकी मंत्रियों को भी युवाओं से ऐसे ही कनेक्ट करने की सलाह दी गई. अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भी प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए उनके लिए कई योजनाओं की घोषणा की थी. इनमें मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, एआई (AI) कौशल विकास कार्यक्रम, स्पोर्ट्स टैलेंट हंट और सिविल डिफेंस नेटवर्क का विस्तार जैसी पहल शामिल हैं.
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