- वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति ने राज्य सभा के लिए मनोनीत किया और उन्होंने तीसरी बार शपथ ली
- हरिवंश पहले दो बार जनता दल यूनाईटेड से राज्यसभा सदस्य रहे और दो बार उपसभापति भी चुने गए थे
- संविधान में मनोनीत सांसद के उपसभापति बनने पर कोई रोक नहीं है और वे लगातार तीसरी बार यह पद संभाल सकते हैं
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति ने आज राज्य सभा के लिए मनोनीत किया. हरिवंश ने आज ही तीसरी बार राज्यसभा की शपथ भी ले ली. वे दो बार जनता दल यूनाईटेड से राज्यसभा के लिए चुने गए थे और कल ही उनका कार्यकाल समाप्त हुआ. वे राज्य सभा के उपसभापति के तौर पर भी दो बार चुने गए. अब सवाल उठ रहा है कि क्या मनोनीत सांसद होने के नाते वे एक बार फिर उपसभापति के रूप में चुने जा सकेंगे? इतिहास देखें तो पता चलता है कि आज तक कोई भी मनोनीत सांसद उपसभापति नहीं बना है.
दरअसल, इस बारे में नियम स्पष्ट हैं. राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत बारह सदस्यों को अन्य निर्वाचित सदस्यों का तरह ही सभी अधिकार तथा विशेषाधिकार प्राप्त हैं. वे दूसरे सदस्यों की तरह ही सदन में मतदान में हिस्सा ले सकते हैं और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी वोट डाल सकते हैं. मनोनीत सदस्य केवल राष्ट्रपति के चुनाव में वोट नहीं डाल सकते. इसके पीछे कारण यह है कि उनका मनोनयन राष्ट्रपति ही करते हैं.
9 अप्रैल को समाप्त हो गया था कार्यकाल
राज्य सभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार उपसभापति के लिए चुनाव कराया जाना होगा क्योंकि बतौर राज्य सभा सदस्य हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था और उसी के साथ उपसभापति के रूप में उनका कार्यकाल भी पूरा हो गया था. मनोनीत सदस्य के रूप में उनका नया कार्यकाल आज से प्रारंभ हुआ है क्योंकि आज ही उनके मनोनयन की अधिसूचना जारी की गई और उन्होंने आज ही दोपहर में शपथ ली.नियमों के अनुसार उपसभापति के चुनाव की तारीख़ सभापति तय करेंगे. इसके बाद महासचिव चुनाव का नोटिस जारी करेंगे. कोई भी सदस्य इसके लिए नामांकित कर सकता है. चुनाव में सामान्य बहुमत से जीत तय होती है. उपसभापति के चुनाव के लिए केवल राज्य सभा के सदस्य ही वोट डालते हैं.
कई विपक्षी सदस्यों से भी की गई बात
हालाँकि, इस बार भी मतदान होना तय है क्योंकि विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करने का मन बना चुका है. सूत्रों के अनुसार आज हरिवंश ने कुछ विपक्षी सदस्यों से संपर्क किया था और उन्हें शुभकामनाओं समेत जानकारी दी गई कि विपक्ष सांकेतिक ही सही लेकिन लोकतंत्र की मजबूती के लिए अपना उम्मीदवार अवश्य उतारेगा. इससे पहले भी हरिवंश का मुक़ाबला यूपीए के उम्मीदवारों से हो चुका है. पहली बार अगस्त 2018 में उन्होंने बी के हरिप्रसाद को और दूसरी बार सितंबर 2020 में मनोज झा को हराया था. वैसे यह भी देखना होगा कि क्या हरिवंश मनोनीत सांसद बने रहते हैं या फिर औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल होते हैं. किसी भी मनोनीत सांसद के लिए यह अवसर होता है कि वह चाहें तो शपथ लेने के छह महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाए. अभी पाँच मनोनीत सांसद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं जिनमें हर्षवर्धन शृंगला, सी सदानंदन मास्टर और उज्ज्वल निकम जैसे नाम हैं.
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