- पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब 'Four Stars of Destiny' को लेकर संसद और सोशल मीडिया में विवाद पैदा हुआ है.
- राहुल ने दावा किया कि नरवणे की किताब अमेजन पर उपलब्ध है, जबकि पब्लिशर ने इसे प्रकाशित न होने की बात कही है.
- पेंगुइन पब्लिशर ने स्पष्ट किया कि किताब की कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी बाजार में उपलब्ध नहीं है.
पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब 'Four Stars of Destiny' को लेकर संसद से लेकर सोशल मीडिया तक जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया. सवाल सिर्फ किताब का नहीं, बल्कि यह भी है कि आखिर सच कौन बोल रहा है. राहुल गांधी, पब्लिशर या खुद जनरल नरवणे?
राहुल गांधी का पक्ष (LoP, लोकसभा)
लोकसभा में संसद के कामकाज में बाधा और सेना से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए राहुल गांधी ने बड़ा दावा किया. राहुल गांधी ने कहा, जनरल नरवणे की किताब बाजार में उपलब्ध है. 2023 में खुद नरवणे ने ट्वीट कर कहा था कि उनकी किताब Amazon पर उपलब्ध है. इसलिए या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर पब्लिशर Penguin Random House India.
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राहुल गांधी ने साफ कहा, 'I'll trust the Army Chief.' यानी उनका भरोसा पब्लिशर के बजाय सेना प्रमुख के बयान पर है.
पब्लिशर Penguin Random House India का पक्ष

इस मामले को तूल पकड़ता देख Penguin Random House India ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरी तरह पलटवार किया है.
पब्लिशर ने साफ किया कि 'Four Stars of Destiny' अब तक प्रकाशित नहीं हुई है. इसकी कोई प्रिंट कॉपी बाजार में नहीं है. कोई डिजिटल या ई-बुक उपलब्ध नहीं है. किसी को भी किताब की प्रति नहीं दी गई है. साथ ही पब्लिशर ने यह भी साफ कहा कि अगर कहीं किताब की कोई कॉपी मिलती है, तो वह कॉपीराइट का उल्लंघन है.
जनरल नरवणे का पक्ष (और कन्फ्यूजन की जड़)
यहीं से मामला सबसे पेचीदा हो जाता है.
2023 का ट्वीट
Hello friends. My book is available now. Just follow the link. Happy reading. Jai Hind pic.twitter.com/VCiLiZOWIi
— Manoj Naravane (@ManojNaravane) December 15, 2023
जनरल नरवणे ने 2023 में सोशल मीडिया पर संकेत दिया था कि उनकी किताब खरीदी जा सकती है. उसी ट्वीट को आधार बनाकर राहुल गांधी ने दावा किया कि किताब बाजार में उपलब्ध है. हालांकि नरवणे के ट्वीट में किताब की प्री बुकिंग का जिक्र है.
भाजपा ने राहुल गांधी से पूछे सवाल
इस मामले पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने जनरल नरवणे की किताब के विवाद और कांग्रेस सांसदों पर कहा, 'पेंगुइन ने बयान जारी कर कहा है कि किताब छपी या प्रकाशित नहीं हुई है और वे कार्रवाई करेंगे. इस संसद में नियम हैं और कोई उन्हें गुमराह नहीं कर सकता. अगर प्रकाशक कहता है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, तो वह कौन सी किताब दिखा रहे हैं? मैं अध्यक्ष से राहुल गांधी और सोरोस जैसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं जो देश को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं.'
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फिलहाल नरवणे की चुप्पी
हालांकि नरवणे ने हालिया विवाद पर सीधे तौर पर सार्वजनिक बयान देकर पब्लिशर के दावे का खंडन नहीं किया न ही यह स्पष्ट किया कि 2023 में किताब उपलब्ध कैसे थी. अगर थी, तो किस फॉर्म में? यानी जनरल नरवणे की ओर से स्पष्ट सफाई की कमी है.
यही खाली जगह राजनीतिक विवाद का ईंधन बन गई है.
असली सवाल: गड़बड़ी कहां है?
इस पूरे विवाद के केंद्र में तीन संभावनाएं हैं:
संभावना 1:
किताब का प्रारंभिक/ड्राफ्ट संस्करण सीमित लोगों तक पहुंचा हो, जो आधिकारिक प्रकाशन नहीं था.
संभावना 2:
Amazon या किसी प्लेटफॉर्म पर गलत/अनधिकृत लिस्टिंग हुई हो, जिसे बाद में हटाया गया.
संभावना 3:
किताब का प्रचार समय से पहले हो गया, लेकिन अंतिम प्रकाशन रोक दिया गया.
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पब्लिशर तीसरी संभावना की ओर इशारा करता है. राहुल गांधी पहली या दूसरी पर सवाल उठा रहे हैं.
अब क्या है इस मामले की पूरी स्थिति
दरअसल राहुल गांधी 2023 के सार्वजनिक संकेतों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं. पब्लिशर कानूनी और तकनीकी रूप से कह रहा है कि किताब कभी प्रकाशित ही नहीं हुई. जनरल नरवणे की ओर से स्पष्ट और विस्तृत सफाई न आने से भ्रम बना हुआ है.
सच शायद इन तीनों के बीच कहीं है, लेकिन जब तक स्पष्ट डॉक्यूमेंटेड जवाब नहीं आता, तब तक यह विवाद राजनीतिक बनाम संस्थागत टकराव बना रहेगा.
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