
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
चंडीगढ़:
कांग्रेस पार्टी ने कानून व्यवस्था के बिगड़ते हालात को लेकर पंजाब की अकाली-बीजेपी सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। पिछले एक पखवाड़े से प्रदेश के ज़्यादातर ज़िलों में तनाव की स्थिति है और राजमार्गों पर प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं जिन्हें रोकने में सरकारी तंत्र विफल रहा है।
सोमवार को भी राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर एक समेत पंजाब के ज़्यादातर राजमार्गों पर जाम जैसे हालात रहे। सिख संगठनों के 25 अक्टूबर तक रोजाना 3 घंटे के जाम से प्रदेश में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सिखों के पवित्र गुरु ग्रन्थ साहब की बेअदबी मामले और पिछले हफ्ते फरीदकोट में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में दोषियों की गिरफ्तारी से नाराज़ धार्मिक संगठनों की अगुवाई में सरकार विरोधी अभियान का असर कारोबार पर भी नज़र आने लगा है। मसले को लेकर पार्टी में भी बगावत से आहत मुख्यमंत्री बादल ने मंगलवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है। उन्होंने ने आरोप लगाया कि कुछ ताक़तें इस सब के पीछे हैं। ये सब बड़ी एजेंसी करवा रही है, लोगों को उनकी साजिश समझनी चाहिए और सचेत रहना चाहिए।
प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों में जबरन बाजार बंद करवाने की कोशिश ने आग में घी का काम किया है और विपक्षी दल मौके का पूरा फैयदा उठाने की फ़िराक में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वर्ण मंदिर परिसर से बादल सरकार को बर्खास्त करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पंजाब में अगर शांति बहाल करनी है तो बादल सरकार को फ़ौरन बर्खास्त किया जाना चाहिए।
वहीं संगरूर से 'आप' सांसद भगवंत मान भी धरने में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हम पंजाब की कानून व्यवस्था की बात संसद में रखेंगे, हम राष्ट्रपति शासन की मांग करते हैं।
विरोध प्रदर्शन के चलते शिरोमणि अकाली दल में भी बगावत के सुर सुनायी पड़ने लगे हैं। पार्टी के दो बड़े नेता इस्तीफ़ा दे चुके हैं। अकाली दल के असर वाली गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से भी इस्तीफों का सिलसिला जारी है। जानकार पूरे मामले को 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की सियासत से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस फिलहाल लुधियाना और अमृतसर में धार्मिक ग्रन्थ की बेअदबी के आरोपियों को ही पकड़ पायी है।
सोमवार को भी राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर एक समेत पंजाब के ज़्यादातर राजमार्गों पर जाम जैसे हालात रहे। सिख संगठनों के 25 अक्टूबर तक रोजाना 3 घंटे के जाम से प्रदेश में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सिखों के पवित्र गुरु ग्रन्थ साहब की बेअदबी मामले और पिछले हफ्ते फरीदकोट में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में दोषियों की गिरफ्तारी से नाराज़ धार्मिक संगठनों की अगुवाई में सरकार विरोधी अभियान का असर कारोबार पर भी नज़र आने लगा है। मसले को लेकर पार्टी में भी बगावत से आहत मुख्यमंत्री बादल ने मंगलवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है। उन्होंने ने आरोप लगाया कि कुछ ताक़तें इस सब के पीछे हैं। ये सब बड़ी एजेंसी करवा रही है, लोगों को उनकी साजिश समझनी चाहिए और सचेत रहना चाहिए।
प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों में जबरन बाजार बंद करवाने की कोशिश ने आग में घी का काम किया है और विपक्षी दल मौके का पूरा फैयदा उठाने की फ़िराक में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वर्ण मंदिर परिसर से बादल सरकार को बर्खास्त करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पंजाब में अगर शांति बहाल करनी है तो बादल सरकार को फ़ौरन बर्खास्त किया जाना चाहिए।
वहीं संगरूर से 'आप' सांसद भगवंत मान भी धरने में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हम पंजाब की कानून व्यवस्था की बात संसद में रखेंगे, हम राष्ट्रपति शासन की मांग करते हैं।
विरोध प्रदर्शन के चलते शिरोमणि अकाली दल में भी बगावत के सुर सुनायी पड़ने लगे हैं। पार्टी के दो बड़े नेता इस्तीफ़ा दे चुके हैं। अकाली दल के असर वाली गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से भी इस्तीफों का सिलसिला जारी है। जानकार पूरे मामले को 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की सियासत से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस फिलहाल लुधियाना और अमृतसर में धार्मिक ग्रन्थ की बेअदबी के आरोपियों को ही पकड़ पायी है।
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