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This Article is From Feb 05, 2023

SP नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ दिल्ली में दर्ज हुई शिकायत, रामचरितमानस के अपमान करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ दिल्ली के पश्चिम विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है.

SP नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ दिल्ली में दर्ज हुई शिकायत, रामचरितमानस के अपमान करने का है आरोप
दिल्ली में स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ मामला दर्ज
नई दिल्ली:

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ दिल्ली में एक शिकायत दर्ज की गई है. पूरा मामला रामचरितमानस से जुड़ा है. बीते दिनों स्वामी प्रसाद मौर्या ने रामचरितमानस को लेकर एक बयान दिया था, जिसे लेकर बाद में काफी विवाद हुआ. उनके उसी बयान को लेकर अब दिल्ली में यह शिकायत दर्ज कराई गई है.

दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ दिल्ली के पश्चिम विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. मौर्या के खिलाफ महादेव सेना के अध्यक्ष पंकज नंदा ने शिकायत दी है. नंदा का आरोप है कि मौर्या के बयान की वजह से रामचरितमानस का अपमान हुआ है. पुलिस ने फिलहाल शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. 

बता दें कि कुछ दिन पहले ही स्वामी के बयान के बाद कई जगहों से रामचरितमानस की प्रतियां फाड़े जाने या जलाए जाने की खबरें आई थीं. इसके कुछ वीडियो भी वायरल हुए थे. इसके बाद उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए. एआईआर भी दर्ज हुई. सपा से बहिष्कार की अपील भी की गई थी. इसी बीच अयोध्या के एक महंत ने स्वामी प्रसाद के सिर को काटने पर 21 लाख रुपये का इनाम भी रख दिया था. इस पूरे मामले में स्वामी प्रसाद मौर्या से NDTV ने  एक्सक्लूसिव बातचीत की थी. मौर्या ने इस दौरान दावा किया था कि कहीं भी रामचरितमानस की एक भी कॉपी न फाड़ी गई और न ही जलाई गई है.

विरोध के नाम पर क्या ग्रंथों को फाड़ना और जलाना उचित है? इस सवाल के जवाब में सपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा था कि मैं तो सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि कोई भी धर्म मानव कल्याण के लिए होता है. मानव संस्कृतिकरण के लिए होता है. उन्होंने कहा था कि पहली बात तो मैं बता दूं कि रामचरितमानस की कोई भी प्रति न तो फाड़ी गई और न ही जलाई गई. प्रति जलाने का जो भी वीडियो सामने आया है, वो दरअसल तख्तियों पर लिखे गए स्लोगन थे. इस विषय को कुछ ताकतें दबाने की कोशिश कर रही हैं. बात को तोड़-मरोड़ कर रखा जा रहा है.

आपको कब लगने लगा कि रामचरितमानस में लिखी गई बातें स्त्री विरोधी या अनुचित हैं और इसका विरोध होना चाहिए? आपने विरोध के लिए ये समय ही क्यों चुना? स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा था कि मैंने 1989 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी छोड़ी थी. उसके बाद से मैं राजनीतिक कार्यों में लगा हूं. सार्वजनिक मंचों से मैं लगातार धर्म के आड़ में पाखंड और ऐसे तथ्य जो अपने ही धर्माम्बलियों को अपमानित किए जाने के रूप में पेश किए गए थे.उसका विरोध करता रहा हूं. मैं सार्वजनिक मंचों में सैकड़ों बार इस विषय का पुरजोर विरोध कर चुका हूं. ये बात और है कि पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंचों और राजनीति में इसपर चर्चा हो रही है. अगर सकारात्मक चर्चा चल रही है, तो इसके सकारात्मक और सुखद परिणाम आने की संभावना है.

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