- दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों के प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने कई वकीलों को हिरासत में लिया था
- CJI सूर्यकांत ने वकीलों की हिरासत मामले में अधिकारियों से बातचीत कर उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया
- बार एसोसिएशन ने सीजेआई को चिट्ठी लिखकर पुलिस की कार्रवाई पर दखल देने की मांग की थी
राजधानी दिल्ली में सीजेपी का प्रदर्शन चल रहा है. सुबह से ही दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही है. दिल्ली पुलिस ने कुछ वकीलों को भी हिरासत में लिया. इसके बाद मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने दखल दी. उन्होंने वकीलों की हिरासत पर अधिकारियों से बात की और वकीलों को रिहा करने के लिए कहा. सीजेआई की दखल के बाद दिल्ली पुलिस ने वकीलों को रिहा कर दिया.
सीजेआई ने अधिकारियों से की बात
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष ने बताया कि सीजेआई सूर्यकांत ने अधिकारियों से बात की है. अब वकीलों को रिहा किया जा रहा है. कई वकीलों को पहले ही रिहा कर दिया गया है और उन्हें सुप्रीम कोर्ट वापस भेज दिया गया है, बाकी को रिहा किया जा रहा है.
बार एसोसिएशन ने सीजेआई को लिखी थी चिट्ठी
SCBA और SCAORA दोनों ने आज CJI को लिखकर दखल देने की मांग की थी. एसोसिएशन ने शनिवार को एक प्रस्ताव पास कर प्रदर्शन कर रहे वकीलों के खिलाफ अधिकारियों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने की भी आलोचना की. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे वकीलों और अपने चैंबरों के अंदर मौजूद वकीलों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद सीजेआई से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की गई थी.
एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में कहा, "सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन आज सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे सीनियर और युवा वकीलों, विशेष रूप से महिला वकीलों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग और हिरासत में लिए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है और इसकी निंदा करता है."
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने बताया कि उसे जानकारी मिली है कि कई वकीलों को हिरासत में लिया गया है. प्रस्ताव में कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन भारत के चीफ जस्टिस से तत्काल हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाने का अनुरोध करने का संकल्प लेता है, ताकि प्रत्येक हिरासत में लिए गए वकील के ठिकाने और सुरक्षा का पता लगाया जा सके, उन्हें कानूनी सहायता तक पहुंच प्रदान की जाए और जिनके खिलाफ हिरासत के लिए कोई वैध आधार नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए."
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