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सर्वाइकल कैंसर से दुनिया में हर साल 3 लाख और भारत में 80 हजार मौतें, जानिए क्या कर रही सरकार

राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल के अनुसार, 20 जुलाई 2025 तक  भारत में 30 वर्ष और उससे अधिक आयु की 25.42 करोड़ महिलाओं की योग्य आबादी में से 10.18 करोड़ की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है.

सर्वाइकल कैंसर से दुनिया में हर साल 3 लाख और भारत में 80 हजार मौतें, जानिए क्या कर रही सरकार
डॉ. अभिषेक शंकर के मुताबिक,आयुष्मान भारत योजना गेम चेंजर साबित हुई है.
  • भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और हर साल लगभग अस्सी हजार महिलाओं की मौत होती है
  • सर्वाइकल कैंसर एक प्रीवेंटेबल बीमारी है जिसे समय पर टीकाकरण द्वारा रोका और इलाज किया जा सकता है
  • आयुष्मान भारत योजना ने कैंसर देखभाल की पहुंच और किफायती उपचार में महत्वपूर्ण सुधार किया है
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"देश में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और हर साल करीब 80,000 महिलाओं की इसकी वजह से मौत हो रही है." एनडीटीवी से बातचीत में AIIMS दिल्ली में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर ने ये महत्वपूर्ण जानकारी दी.

इलाज संभव

इस बढ़ती चुनौती को देखते हुए डॉ. अभिषेक शंकर ने कहा कि कैंसर केयर और इलाज के लिए बजट 2026-27 में अगर फंड अगर बढ़ाया जाए तो अच्छा होगा. सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) एक प्रीवेंटेबल बीमारी है, और समय पर vaccination के जरिये इससे बचा जा सकता है. सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंडा है, क्योंकि अगर जल्दी पता चल जाए तो इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है और इसका इलाज भी संभव है.

आयुष्मान भारत योजना गेम चेंजर

डॉ. अभिषेक शंकर के मुताबिक,"आयुष्मान भारत योजना गेम चेंजर साबित हुई है. इसकी मदद से स्वास्थ्य सेवाओं की एक्सेसिबिलिटी और अफॉर्डेबिलिटी दोनों में बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह से कैंसर देखभाल वितरण (cancer care delivery) व्यवस्था मजबूत हुई है, विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रोगियों तक समय पर कैंसर उपचार पहुंचाना संभव हुआ है. पिछले कुछ साल में इस योजना में कई सुधार किये गए हैं. आने वाले समय में कैंसर के इलाज से जुड़ी ज़रूरतें बढ़ने वाली हैं, और इसका टारगेटेड ट्रीटमेंट जरूरी है. ऐसे में आने वाले समय में अलग-अलग कैंसर के इलाज का कॉस्ट एनालिसिस करके ये देखना जरूरी होगा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को किस तरह के मोडिफिकेशन की जरूरत है.

सरकार क्या कर रही

  1. पिछले केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैंसर, असाधारण रोगों और अन्य गंभीर जीर्ण रोगों के उपचार के लिए 36 जीवनरक्षक औषधियों को बुनियादी सीमा-शुल्‍क ( बेसिक कस्‍टम ड्यूटी) से छूट देना का ऐलान किया था. साथ ही, वित्त मंत्री ने ऐलान किया था, "सरकार अगले 3 वर्षों में सभी जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर केंद्रों (Day Care Cancer Centres) की स्थापना की सुविधा प्रदान करेगी. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 200 ऐसे केंद्र स्थापित किये जायेंगे".
  2. डॉ. अभिषेक शंकर कहते हैं, "कैंसर के इलाज को अफॉर्डेबल बनाने के लिए सरकार गंभीरता से पहल कर रही है. सरकार स्थिति का हमेशा आंकलन करती रहती है. क्रिटिकल मेडिसिन पर ड्यूटी घटाने को लेकर पिछले साल वित्त मंत्री ने ऐलान किया था. सरकार सबूतों के आधार पर, विशेषज्ञों की सलाह पर और प्राथमिकता के तौर पर इस तरह के फैसले करती है". पिछले हफ्ते AIIMS दिल्ली में सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन पर पहला राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया. इसमें देश भर के 500 विशेषज्ञों ने भाग लिया. इस सम्मलेन में विशेषज्ञों और पॉलिसी मेकर्स ने HPV vaccination के विस्तार को मज़बूती से आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया.
  3. इस सम्मलेन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, राज्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), प्रमुख कैंसर संस्थानों, वैश्विक एजेंसियों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, रोगी अधिवक्ताओं और प्रौद्योगिकी भागीदारों ने भाग लिया। इस सम्मलेन में सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन को राष्ट्रीय एजेंडे पर लाने पर सहमति बनी. सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी और नेशनल हेल्थ मिशन की डायरेक्टर जनरल, आराधना पटनायक ने सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने कहा, "भारत में सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन संभव है, और हम इसके रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार में तेजी लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. हमारा फोकस तेजी से एचपीवी टीकाकरण (HPV vaccination) का विस्तार करने, सभी स्तरों पर स्क्रीनिंग को मजबूत करने पर है - विशेष रूप से एचपीवी डीएनए परीक्षण के माध्यम से - हर महिला तक उपचार समय पर सुनिश्चित करने पर है".

राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल के अनुसार, 20 जुलाई 2025 तक  भारत में 30 वर्ष और उससे अधिक आयु की 25.42 करोड़ महिलाओं की योग्य आबादी में से 10.18 करोड़ की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है. सर्वाइकल कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है महिलाओं में, इसकी वजह से हर साल दुनिया में 3,00,000 से अधिक महिलाओं की मौत हो जाती है. 
 

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