- CBI ने हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी फंड के कथित गबन मामले में छह परिसरों पर छापेमारी की है
- जांच में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के फंड में गड़बड़ी पाई गई है
- वरिष्ठ लोक सेवकों और बैंक अधिकारियों पर सरकारी पैसों की हेराफेरी और अनुचित लाभ लेने का आरोप है
CBI ने हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी फंड के कथित गबन मामले में 6 ठिकानों पर छापेमारी की है. छापे चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में 6 परिसरों पर 6 जून 2026 को मारे गए. ये छापेमारी IDFC First Bank और AU Finance Bank के जरिए सरकारी पैसों की कथित हेराफेरी से जुड़ा है. जांच में हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों, नगर निगम चंडीगढ़ और क्रेस्ट चंडीगढ़ (Municipal Corporation Chandigarh and CREST Chandigarh) के फंड में गड़बड़ी सामने आई है.
वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर कार्रवाई
छापेमारी के दौरान CBI ने हरियाणा कैडर के वरिष्ठ लोक सेवकों के आवासों पर भी तलाशी ली. विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के परिसरों की भी जांच की गई. एजेंसी को संदेह है कि अपराध से कमाए गई रकम कंपनी के खातों में पहुंची और बाद में निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर की गई. जांच में सामने आया है कि कुछ लोक सेवकों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर खातों के संचालन, पैसे का ट्रांसफर और रकम के डायवर्जन में मदद की. आरोप है कि इसके बदले उन्हें अनुचित लाभ प्राप्त हुआ.
कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस मिले
सीबीआई ने छापेमारी के के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए. यह मामला हरियाणा विजिलेंस एवं ACB से ट्रांसफर किए गए एक केस और चंडीगढ़ पुलिस के आर्थिक अपराध थाने में दर्ज दो मामलों से जुड़ा है. जांच के अनुसार, इस घोटाले में करीब 661 करोड़ रुपये के सरकारी फंड की कथित हेराफेरी हुई.
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CBI ने विशेष अदालत में दाखिल की पहली चार्जशीट
चार्जशीट में हरियाणा पावर जेनरेशन कॉपारेशन लिमिटे और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका बताई गई है. जांच एजेंसी ने सरकारी पैसे को को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) और एयू फाइनेंस बैंक (AU Finance Bank) के माध्यम से कथित तौर पर निकालने के तरीके (Modus Operandi) का भी खुलासा किया है. CBI के मुताबिक, तीनों मामलों की जांच तेजी से जारी है और मामले में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. एजेंसी जल्द ही सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है.
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