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नई दिल्ली:

आज देशभर में दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में दशहरा यानी विजयादशमी का खास महत्व है. ये त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है. हर साल इस दिन लोग भगवान श्रीराम की विजय की खुशी में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करते हैं. इसके साथ ही कई जगहों पर मां दुर्गा की पूजा, शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा भी की जाती है. नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी विजयादशमी उत्सव पर शस्त्र पूजन किया.

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तेज की आराधना में रत है, वह भारत है - मोहन भागवत

डॉ मोहन भागवत ने कहा कि तेज की आराधना में रत है, वह भारत है. सबके पूर्वज समान हैं, उनके गौरव का अनुकरण रखना है. मूल में वही शाश्वत मूल्य होना चाहिए.

सभी विविधता का सम्मान करो और सभी को संरक्षण दो- मोहन भागवत

महापुरुषों के प्रयासों के बाद हम गुलामी से मुक्त हुए- मोहन भागवत

AI का उचित उपयोग और एथिक्स का पालन करना होगा- भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि विज्ञान और तंत्र ज्ञान के साथ इकॉनॉमी के साथ इकॉलॉजी और एथिक्स का विचार करना होगा.  AI का उचित उपयोग और एथिक्स का पालन करना होगा. भारत की सनातन दृष्टी और उसके साथ सनातन की समन्वय और संस्कारों की दृष्टी विश्व को आवश्यक है.

दुनिया को एक नया रास्ता देने का दायित्व भारत का- आरएसएस चीफ

उन्होंने कहा कि दुनिया को एक नया रास्ता देने का दायित्व भारत का है. हिंदू दृष्टी में किसी खास पूजा पद्धति की आवश्यकता नहीं. पूजा करते हैं कि नहीं यह अनिवार्यता भी नहीं है. इन सबसे ऊपर लक्ष्य है विश्व बंधुत्व, बंधुता और मानवता.

नशा एक गंभीर चुनौती- मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि विवेकवान के लिए जानकारी उपकारक होती है, लेकिन विवेकहीन के लिए अपायकारक हो सकती है. उन्होंने कहा कि नशा एक गंभीर चुनौती है. शासन-प्रशासन को इस ओर देखना होगा. स्वयंसेवकों को सोचना होगा, उसका व्यापक समाधान ढूंढना होगा. नई पीढ़ी को तैयार होना पड़ेगा.

भारत के विविधताओं की रक्षा करना हमारी पारंपरिक पहचान- मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है और विविधताओं को स्वीकार करना व उनकी रक्षा करना हमारी पारंपरिक पहचान रही है.

मोहन भागवत ने नागपुर में शस्त्र पूजा किया

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के रेशिमबाग मैदान में संगठन के विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया

दुनिया में भारत का स्थान बढ़ा है- मोहन भागवत

 दुनिया में भारत का स्थान बढ़ा है. विश्व का ध्यान भारत की ओर बढ़ा है. दुनिया में भारत के लिए जिज्ञासा बढ़ी है. 
 

दुनिया में भू राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं- मोहन भागवत

दुनिया में भू राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं. आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है. दुनिया में उथल पुथल मची है. हमारी परपंरा विश्व को परिवार मानने की रही है.

बदलते समय के साथ हमको भी बदलना चाहिए- मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि बदलते समय के साथ हमको भी बदलना चाहिए. पहले से ज्यादा आत्मसमर्पण जरूरी है.
 

देश में विविधिताओं का सम्मान जरूरी है- मोहन भागवत

भारत में अनेक प्रकार की विविधता है. सभी विविधिताओं का सम्मान जरूरी है. हमारी परंपरा विश्व को परिवार मानने वाली रही है. संपूर्ण विश्व को परिवार मानने की हमारी परंपरा रही है.
 

विभाजित होने की वजह से हम कमजोर हुए- भागवत

विजयादशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि संतों ने समाज को रास्ता दिखाया. राष्ट्र, निष्ठा और कर्तव्यबोध जरूरी है. एकता और प्रगति की राह पर चलना जरूरी है. सत्य की राह दिखाने वाला समाज आज भी मौजूद है. विभाजित होने की वजह से हम कमजोर हुए. एकता और प्रगति की राह पर चलना जरूरी है.

मोहन भागवत ने विजयादशमी पर किया शस्त्र पूजन

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजन किया. इस दिन लोग अपनी परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं. कई जगहों पर वाहन, मशीनों, औजारों और कारोबार में इस्तेमाल होने वाली चीजों की भी पूजा की जाती है.

दशहरे पर रावण दहन की परंपरा

दशहरे की सबसे खास परंपराओं में रावण दहन शामिल है. उत्तर भारत के कई हिस्सों में 20 अक्टूबर की शाम को रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा. मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध करके माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था. इसी विजय की याद में हर साल रावण दहन किया जाता है.
 

सूर्यास्त के बाद होता है रावण दहन

आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद होता है, लेकिन पूरे देश के लिए इसका कोई एक निश्चित समय नहीं है. अलग-अलग शहरों में रामलीला समितियां और स्थानीय आयोजक अपने कार्यक्रम के अनुसार समय तय करते हैं.

उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में आज मनाया जा रहा है दशहरा

हिंदू पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दशहरा आज मनाया जा रहा है. हालांकि, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 21 अक्टूबर की दोपहर तक रहने के कारण कुछ क्षेत्रों में पर्व की तारीख भिन्न हो गई है. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी. इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है और महिलाएं 'सिंदूर खेला' की परंपरा भी निभाती हैं.

विजयादशमी के दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना शुभ

पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो रही है और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी. विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. विजयादशमी के दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय किए गए पूजा-पाठ और शुभ कार्यों से सफलता की कामना की जाती है. वहीं, अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक बताया गया है.

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