- हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के दो मामलों में कार्रवाई को गलत और मनमाना बताया है
- अदालत ने एजेंसी पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन न करने और तकनीकी पहलुओं पर फोकस करने का आरोप लगाया है
- महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन परिसर के रेस्तरां में बिना जांच आदेश पारित करने पर कोर्ट ने तीखी फटकार लगाई है
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन को फटकार लगाई है. उच्च न्यायालय ने दो मामलो में एजेंसी के एक्शन को गलत और मनमाना करार दिया. इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि क्या आप खुद को भगवान समझते हैं. अदालत ने एजेंसी से कहा कि आपने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का ही पालन नहीं किया. इसके अलावा एक्शन लेने में आपने व्यवहारिक नजरिए की बजाय तकनीकी पहलुओं पर ही फोकस किया. अदालत ने महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन परिसर में स्थित रेस्तरां में छापे को लेकर कहा कि आपने बिना पूरे मामले को समझे ही आदेश पारित कर दिया. इसी मामले में बेंच ने कहा कि क्या आप खुद को भगवान समझते है कि जो चाहे, वह करेंगे.
दूसरा मामला सिप्ला फार्मा से जुड़ा है. उसकी एक यूनिट का पुणे में लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया था. अब इस फैसले को एफडीए ने पलट दिया है. यही नहीं मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्थित एमसीए के परिसर में 5 रेस्तरां को निलंबित किए जाने के फैसले को भी पलटा गया है. एफडीए ने खुद यह जानकारी हाई कोर्ट को दी है. एफडीए ने कहा कि इनका फिर से निरीक्षण किया गया है और पाया गया कि ये रेस्तरां फूड सेफ्टी रूल्स का 88 फीसदी तक पालन कर रहे हैं. अदालत ने कहा कि हमने पिछली सुनवाई में भी एफडीए के अधिकारियों से कहा था कि वह कोई भी एक्शन लेने से पहले अपने विवेक का भी इस्तेमाल करें.
अदालत ने कहा, 'हमारे स्पष्ट कहने के बाद भी एफडीए ने आदेश का पालन नहीं किया. कोई फैसला लेने से पहले तार्किक ढंग से विचार नहीं किया और कानून का हवाला देकर मनमाना एक्शन लिया. हमने हमेशा अधिकारियों और विभाग को नसीहत दी है. अब समय है कि जब आपके खिलाफ सख्त आदेश ही पारित करना होगा. अब हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का आदेश पारित करेंगे. इसलिए अब हमें संतुष्ट करें या फिर जेल जाने के लिए तैयार रहें.' अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने पर एफडीए ने कहा कि हम एमसीए को एक और नया नोटिस देंगे. इसके अलावा उन्हें सुनवाई का भी अवसर दिया जाएगा.
कोर्ट ने इस बात को स्वीकार कर लिया. इसके साथ ही यह भी कहा कि अब रेस्तरां नियमों का पालन कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें खोल दिया जाए ताकि वे अपना कामकाज पहले की तरह कर सकें. अदालत ने कहा कि आखिर एफडीए हर बार इतनी जल्दी में क्यों होता है कि बिना कुछ सोचे ही निर्णय ले लेता है. अदालत ने यह भी कहा कि आप एक मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं. क्या आप खुद को भगवान समझते हैं कि जो चाहें, वह करेंगे.
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