देश के लाखों मजदूरों और कर्मचारियों की आवाज बनने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सबसे बड़े मजदूर संगठन 'भारतीय मजदूर संघ' (BMS) ने 17 अगस्त 2026 को देशव्यापी 'मांग दिवस' मनाया. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिल्ली प्रदेश BMS के तत्वावधान में हजारों कार्यकर्ताओं और श्रमिकों का भारी जमावड़ा देखने को मिला.
हाल ही में 26 से 28 जुलाई 2026 तक रांची में आयोजित BMS की 161वीं केंद्रीय कार्य समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया था. उसी फैसले पर अमल करते हुए आज देशभर में प्रदर्शन किए गए और दिल्ली के जंतर-मंतर से केंद्र सरकार के खिलाफ 11 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर हुंकार भरी गई.
श्रम सचिव को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान भारतीय मजदूर संघ, दिल्ली प्रदेश के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम सचिव से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा.
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि ये 11 मांगें महज वेतन-भत्ते की नहीं हैं, बल्कि यह श्रमिकों की गरिमा, सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक कार्यस्थिति और उनके परिवारों के आर्थिक भविष्य से सीधे जुड़ी हुई हैं.
जानिए BMS नेताओं ने उठाईं कौन-कौन सी 11 प्रमुख मांगें.
पेंशन, लेबर कोड और OPS को लेकर राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी. सुरेंद्रन ने कहा कि EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से सीधे बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रतिमाह किया जाए. इसके साथ ही VDA दिया जाए और सभी पेंशनभोगियों को 'आयुष्मान भारत योजना' से जोड़ा जाए.
- सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को देश में फिर से बहाल किया जाए. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम संहिताओं में शामिल श्रमिक-विरोधी प्रावधानों को तुरंत हटाया जाए और उसमें जरूरी संशोधन किए जाएं.
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने EPF, ग्रेच्युटी और LIC सुरक्षा की बात कही. उन्होंने कहा कि EPF, ESIC और बोनस गणना के लिए निर्धारित कवरेज की वर्तमान सीमा को सीधे दोगुना किया जाए.
- ग्रेच्युटी की गणना मौजूदा 15 दिनों के स्थान पर 30 दिनों के वेतन के आधार पर की जाए, और इस पर लगी सीलिंग लिमिट को पूरी तरह खत्म किया जाए.
- LIC में कार्यरत डेवलपमेंट ऑफिसर्स की नौकरी की पूर्ण सुरक्षा तय हो और 'No Termination, No Decrement' (ना बर्खास्तगी, ना वेतन कटौती) की नीति लागू की जाए.
वहीं संगठन के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अनुपम ने कहा कि समान वेतन और बैंक टाइमिंग की व्यवस्था हो. उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर समेत सभी वर्ग के कर्मचारियों पर 'समान काम के लिए समान दाम' का सिद्धांत लागू हो.
- महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए देश में न्यूनतम वेतन की दरों में पारदर्शी बढ़ोतरी की जाए. देश के सभी बैंकिंग संस्थानों में सप्ताह में केवल 5 दिन कार्य प्रणाली (Five-Day Working) को जल्द लागू किया जाए.
प्रदेश महामंत्री डॉ. दीपेंद्र चाहर ने स्कीम वर्कर्स और टेक्सटाइल-HEC मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील, NHM और अन्य योजना कार्यकर्ताओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए.
- रांची के हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC) तथा देश के 8 राज्यों में स्थित 23 नेशनल टेक्सटाइल मिल्स के कर्मचारियों की लंबे समय से अटकी समस्याओं का फौरन समाधान किया जाए.
समयबद्ध समाधान की मांग
जंतर-मंतर पर हुए इस विशाल प्रदर्शन में दिल्ली प्रदेश के तमाम जिलों, उद्योगों, विभागों और विभिन्न यूनियनों के हजारों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. प्रतिनिधिमंडल ने श्रम सचिव से साफ शब्दों में आग्रह किया है कि सरकार श्रमिकों की इन मांगों पर बिना किसी देरी के समयबद्ध सीमा के भीतर सकारात्मक फैसला ले.
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