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BMC मेयर का चुनाव निर्विरोध नहीं होगा? उद्धव ठाकरे की शिवसेना उतार सकती है अपना उम्मीदवार

बीएमसी में महायुति के पास पार्षदों का बहुमत है, ऐसे में महायुति का मेयर और उप महापौर आसानी से चुनकर आ सकते हैं, संख्याबल नहीं होने के बावजूद भी शिवसेना(UBT) मेयर चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है.

BMC मेयर का चुनाव निर्विरोध नहीं होगा? उद्धव ठाकरे की शिवसेना उतार सकती है अपना उम्मीदवार

मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर और उपमेयर पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. अब यह लगभग साफ होता दिख रहा है कि इस बार BMC मेयर का चुनाव निर्विरोध नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) मेयर और उपमेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

11 फरवरी को होगा मेयर-उपमेयर का चुनाव

बीएमसी में मेयर और उपमेयर पद का चुनाव 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे आयोजित किया जाएगा. इसके लिए 7 फरवरी को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है. चुनाव की प्रक्रिया को लेकर बीएमसी प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

संख्याबल महायुति के पक्ष में

फिलहाल बीएमसी में महायुति (भाजपा-शिवसेना शिंदे गुट-एनसीपी) के पास पार्षदों का स्पष्ट बहुमत है. ऐसे में राजनीतिक गणित के लिहाज़ से महायुति के मेयर और उपमेयर का चुना जाना आसान माना जा रहा है. इसके बावजूद शिवसेना (UBT) का चुनावी मैदान में उतरने का फैसला सिर्फ संख्याबल तक सीमित नहीं, बल्कि इसे राजनीतिक संदेश और वैचारिक लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है.

मातोश्री में अहम बैठक

मेयर चुनाव को लेकर आज दोपहर मातोश्री में एक अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिवसेना (UBT) के मुंबई के विधायक और कुछ प्रमुख पार्षद मौजूद रहेंगे. इसी बैठक में यह अंतिम फैसला लिया जाएगा कि पार्टी मेयर और उपमेयर पद के लिए उम्मीदवार उतारेगी या नहीं. बीएमसी में शिवसेना(UBT) की ग्रुप लीडर किशोरी पेडणेकर ने व्हीप जारी किया.  शिवसेना(UBT) के सभी पार्षदों को 11 फरवरी तक मुंबई से बाहर नहीं जाने के आदेश दिए गए। 11 फरवरी को मेयर का चुनाव होने वाला है.

राजनीतिक रणनीति का हिस्सा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिवसेना (UBT) का यह कदम मुंबई की राजनीति में अपनी मौजूदगी और वैचारिक दावा बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. बीएमसी को शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है और ऐसे में मेयर चुनाव को पार्टी प्रतीकात्मक लड़ाई के रूप में देख रही है. अगर शिवसेना (UBT) उम्मीदवार उतारती है तो यह चुनाव केवल औपचारिक न रहकर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल सकता है। इससे मुंबई की राजनीति में आने वाले दिनों में तनाव और बयानबाज़ी तेज होने की पूरी संभावना है. अब सबकी निगाहें मातोश्री में होने वाली बैठक और उसके बाद होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं.

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