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This Article is From Sep 08, 2017

सोशल मीडिया पर चलने वाले इस झूठ को कैसे पहचाना जाए?

कुछ लोग लगातार ग़लत ख़बरें फैला रहे हैं. सवाल है कि सोशल मीडिया पर चल रही ये फर्जीवाड़ा कैसे रुकेगा ? आख़िर आज की तारीख़ में इसका शिकार एक सम्मानित पत्रकार को होना पड़ा है.

सोशल मीडिया पर चलने वाले इस झूठ को कैसे पहचाना जाए?
नई दिल्ली:

गौरी लंकेश की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर जैसे एक जंग छिड़ी हुई है. हालत ये है कि कुछ लोग हत्या का जश्न मना रहे हैं. कुछ पूछ रहे हैं कि पहले की हत्याओं पर शोक क्यों नहीं मनाया ? वहीं कुछ लोग लगातार ग़लत ख़बरें फैला रहे हैं. सवाल है कि सोशल मीडिया पर चल रही ये  फर्जी कैसे रुकेगा? आख़िर आज की तारीख़ में इसका शिकार एक सम्मानित पत्रकार को होना पड़ा है. शुक्रवार को दिन भर रवीश कुमार के नाम पर ये फ़र्ज़ी ख़बर ट्वीट की जाती रही और तो और, दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता ने भी इसे फारवर्ड करने की गलती की. हालांकि बाद में इसके लिए उन्होंने माफी मांगी. गौरी लंकेश की हत्या के बाद नफ़रत और झूठ का ये खेल सोशल मीडिया पर लगातार धड़ल्ले से चल रहा है. प्रेस क्लब के कार्यक्रम में मौजूद जाने-पहचाने पत्रकारों ने भी तस्दीक की है कि रवीश कुमार ने ऐसी कोई बात नहीं की. गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में प्रेस क्लब में हुए सम्मेलन में दरअसल रवीश कुमार ने सोशल मीडिया के इस ख़तरनाक खेल की ओर भी इशारा किया था. ये भी कहा था कि ट्विटर पर हत्या का जश्न मनाने वालों को प्रधानमंत्री क्यों फॉलो करते हैं.

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दिल्ली के प्रेस क्लब में गौरी लंकेश की हत्या के विरोध प्रदर्शन में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार ने ओम थानवी ने कहा कि यह कहना गलत है कि रवीश ने ऐसा कुछ कहा है. वहां कोई किसी को जिम्मेदारी नहीं ठहरा रहा था. यह बातें मुंह में ठूंसी जा रही हैं सिर्फ एक एक संकेत किया जा रहा है कि जिन लोगों ने कुलबर्गी और पानसरे को मारा है, उन्ही लोगों पर शक गौरी लंकेश की हत्या को लेकर भी किया जा रहा है. वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा है कि ट्रोलिंग चिंता का विषय है. इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए. ट्रोलिंग के जरिए व्यक्तिगत हमले और चरित्र हनन की कोशिश हो रही है. इस को लेकर पैमाना बनाने की जरूरत है. ट्रोलिंग एक खतनाक प्रवृत्ति है इसको रेगुलेट करने की जरूरत है.

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वहीं बीजेपी के आईटी सेल ने पीएम मोदी का उस शख्स को फॉ़लो करना जिसने गौरी लंकेश के बारे में आपत्तिजनक बयान पोस्ट किया है, पर सफ़ाई जारी की है. बीजेपी का कहना है कि किसी को फॉलो करना उसे 'कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट' देना नहीं है. बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री अपने आलोचकों को भी फ़ॉलो करते हैं. लूट-धोखाधड़ी के आरोपी राहुल गांधी को भी फ़ॉलो करते हैं. ट्विटर पर गाली देने वाले केजरीवाल को भी फ़ॉलो करते हैं और यौन शोषण की पीड़ित महिला से कहते हैं 'सेटल कर लो. मोदी बोलने की आज़ादी में विश्वास रखते हैं और कभी किसी को ब्लॉक या अनफ़ॉलो नहीं किया. जबकि पहले ट्विटर पर गौरी लंकेश की हत्या की जश्न मनाने वालों की तीखी निंदा करने वाले देश के क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को मोर्चा संभाला. गौरी लंकेश की हत्या की निंदा करने के साथ-साथ उन्होंने पूछा कि केरल-कर्नाटक में जब आरएसएस के लोग मारे जाते हैं, तब उनकी निंदा क्यों नहीं होती है.

वीडियो : रवीश कुमार की सुनिए
इन सबके बीच ये सवाल लगातार बड़ा हो रहा है कि सोशल मीडिया पर चलने वाले इस झूठ को कैसे पहचाना और पकड़ा जाए. मामला सिर्फ़ गौरी लंकेश का नहीं है, नफ़रत और झूठ बोने वाली उस पूरी राजनीति का भी है जो सोशल मीडिया को और उसकी मार्फ़त हमारे समाज को भी ज़हरीला बना रही है. इस खेल का ख़तरनाक पहलू एक और है. सोशल मीडिया पर जब आप एक बार एक गलत ख़बर चला देते हैं तो फिर वह फैलती जाती है. जबकि उसके खंडन को अक्सर वो तवज्जो नहीं दी जाती. जाहिर है, जो लोग रवीश कुमार को बदनाम करना चाहते थे, वो अपना मक़सद हासिल कर चुके हैं. सवाल यही है, इस ट्रेंड को सबसे ज़्यादा हवा कौन दे रहा है और इसे रोकने का क्या तरीक़ा हो सकता है.

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