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एकनाथ शिंदे की शिवसेना का मेयर और स्थायी समिति अध्यक्ष पद पर किए गए दावों से बीजपी नेताओं में नाराजगी - सूत्र

शुक्रवार को घोषित अंतिम नतीजों में, 122 सीटों वाली KDMC में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 52 सीटें, जबकि भाजपा ने 51 सीटें जीतीं. यानी शिंदे गुट मात्र एक सीट से आगे रहा.

एकनाथ शिंदे की शिवसेना का मेयर और स्थायी समिति अध्यक्ष पद पर किए गए दावों से बीजपी नेताओं में नाराजगी - सूत्र
  • महायुति गठबंधन में मुंबई महापौर और स्थायी समिति अध्यक्ष पद को लेकर शिवसेना और भाजपा में विवाद की खबर है
  • कई वरिष्ठ नेता शिवसेना द्वारा पदों के लिए दबाव बनाने पर नाराजगी जता रहे हैं
  • कल्याण–डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना ने एक सीट से भाजपा को आगे निकलते हुए सीटों की बढ़त हासिल की है
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मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति गठबंधन के भीतर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना द्वारा मुंबई महानगरपालिका के महापौर और स्थायी समिति अध्यक्ष पद पर दावे किए जाने से भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी है. सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेताओं का मानना है कि मुंबई की जनता ने महायुति पर भरोसा जताया है, लेकिन ऐसे समय में सहयोगी दल द्वारा “दबाव की राजनीति” अच्छे संकेत नहीं देती. यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा नेताओं ने अपनी यह नाराजगी सीधे उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखी है.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह पूरा विवाद केवल मुंबई पदों की लड़ाई नहीं है, बल्कि कल्याण–डोंबिवली नगर निगम (KDMC) की राजनीति से भी जुड़ सकता है. कुछ सूत्रों का दावा है कि शिंदे गुट, जो KDMC में भाजपा से सिर्फ एक सीट आगे है, अब अप्रत्यक्ष दबाव बनाकर गठबंधन के भीतर अधिक पद हासिल करने की रणनीति अपना रहा है.

शुक्रवार को घोषित अंतिम नतीजों में, 122 सीटों वाली KDMC में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 52 सीटें, जबकि भाजपा ने 51 सीटें जीतीं. यानी शिंदे गुट मात्र एक सीट से आगे रहा. वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को केवल 11 सीटें, MNS को 5, कांग्रेस को 2 और NCP (शरद पवार) को 1 सीट मिली.

विश्लेषकों का कहना है कि शिंदे के लिए KDMC राजनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि यह उनका गढ़ माना जाता है, जबकि मुंबई में भाजपा की मजबूत पकड़ है. ऐसे में दोनों नगर निगमों में सहयोग के बिना सरकार गठन और सत्ता संतुलन मुश्किल हो सकता है. यही वजह है कि शिंदे गुट अब अधिक निगोशिएशन पावर दिखाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा इसे दबाव की राजनीति मानकर नाखुश है. गठबंधन के दोनों दलों को एक-दूसरे की ज़रूरत है, विशेषकर मुंबई और KDMC दोनों ही जगहों पर. 

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