- बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने महिला आरक्षण बिल को महिलाओं का कानूनी हक बताया
- उन्होंने ममता बनर्जी के टीएमसी में महिला टिकट वितरण पर सवाल उठाते हुए कानून बनाए जाने की आवश्यकता बताई
- नितिन नवीन ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या के कारण परिसीमन आवश्यक है, जिससे सीटों की संख्या बढ़ेगी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ NDTV ने खास बातचीत की है. NDTV के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल के साथ एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में नितिन नवीन ने महिला आरक्षण बिल पर बात की. उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधा. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि आधी आबादी को आरक्षण मिलना ही चाहिए. यह उनका हक है. नितिन नवीन से पूछा गया कि क्या भाजपा महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में वास्तव में गंभीर है, जिस पर उन्होंने कहा कि वे महिलाओं को उनका हक दिलाना चाहते हैं, न कि उन पर कोई एहसान कर रहे हैं.
'एहसान नहीं, महिलाओं का कानूनी हक'
ममता बनर्जी के इस दावे पर कि टीएमसी बिना कानून के ही 40% महिलाओं को टिकट देती है, नितिन नवीन ने तंज कसा. उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को किसी के एहसान की जरूरत नहीं है, बल्कि यह उनका हक है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ममता बनर्जी आज अपने कोटे से आज टिकट दे रही हैं, तो कल देंगी, इसकी क्या गारंटी है? अगर कानून बन जाएगा तो महिलाओं को अपना हक मांगने किसी के दरवाजे पर नहीं जाना पड़ेगा.
#NDTVExclusive | 'अगर हम महिलाओं को अधिकार दे रहे हैं, तो इससे विपक्ष को क्या दिक्कत है?'
— NDTV India (@ndtvindia) April 23, 2026
महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर NDTV से #EXCLUSIVE बातचीत में बोले BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन#WestBengalElection | #NitinNabin | #BJP | @NitinNabin | @rahulkanwal pic.twitter.com/lsrnRbhXzS
परिसीमन से क्यों जोड़ा गया?
जब उनसे पूछा गया कि महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से क्यों जोड़ा गया, इस बिल को वर्तमान 543 सीटों पर ही क्यों नहीं लागू कर दिया गया, विपक्ष भी बार-बार यही सवाल उठा रहा है? इस पर बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि देश की आबादी अब 54 करोड़ से बढ़कर 150 करोड़ के करीब पहुंचने जा रही है, इसलिए परिसीमन जरूरी है. उन्होंने तर्क दिया कि अगर परिसीमन के बाद 850 सीटों में से महिलाओं को अधिकार मिलता है और उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो इसमें विपक्ष को दिक्कत क्यों होनी चाहिए? 850 सीटों में तो उनको और ज्यादा सीटें मिलेंगी औ ज्यादा महिलाएं संसद तक पहुंचेंगी.
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दक्षिण के राज्यों का डर निराधार
परिसीमन की वजह से दक्षिण के राज्यों पर क्या असर पड़ेगा? उनके मन में डर क्यों है? इस सवाल का जवाब देते हुए नितिन नवीन ने कहा कि परिसीमन के कारण दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अगर यह लागू होता तो दक्षिण के राज्यों का अधिकार और उनका प्रतिशत आनुपातिक रूप से बढ़ ही रहा था. उन्होंने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में विपक्ष की शंकाओं का समाधान किया था और यहां तक कह दिया था कि यदि कोई आपत्ति है तो वे संशोधन लाने को भी तैयार हैं.
नितिन नवीन ने कहा कि बीजेपी की मंशा एकदम साफ थी और वे समयबद्ध तरीके से महिलाओं को उनका हक दिलाना चाहते थे, जिसे 2026 में परिसीमन के बाद लागू किया जाना तय था.
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