- बीजेपी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में जनसहमति जुटाने हेतु हेल्पलाइन नंबर जारी किया है
- इस अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को तीस प्रतिशत आरक्षण मिलेगा
- 16 से 18 अप्रैल को विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तत्काल लागू होने पर चर्चा होगी
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू कराने की दिशा में बीजेपी ने विशेष प्रचार अभियान शुरू किया है, इस अभियान के तहत पार्टी ने कानून के समर्थन में जनसहमति जुटाने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जिस पर मिस्ड कॉल देकर लोग अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं. बीजेपी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रचार के लिए हेल्पलाइन नंबर 9667173333 जारी किया है. इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर लोग इस अधिनियम के समर्थन में अपनी भागीदारी दर्ज करा सकेंगे.
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में अभियान की जानकारी
इस संबंध में बीजेपी सांसद कमलजीत सहरावत और बांसुरी स्वराज ने आज संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी दी. इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष योगिता सिंह, महिला मोर्चा प्रभारी श्यामबाला, मोर्चा महामंत्री प्रियल भारद्वाज और वैशाली पोद्दार भी मौजूद रहीं. कांफ्रेंस में कमलजीत सहरावत ने कहा कि 2023 में पास किया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है. उन्होंने बताया कि 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें इस अधिनियम को तुरंत लागू करने पर चर्चा की जाएगी.

महिला आरक्षण से बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 13.63 प्रतिशत है, जो इस कानून के लागू होने के बाद बढ़कर 33 प्रतिशत हो जाएगा. वहीं बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं और पुरुषों की समानता की परंपरा रही है. उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से थोड़ा अधिक 65.8 प्रतिशत रहा, जबकि संसद में उनका प्रतिनिधित्व मात्र 13.6 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाओं को नीति निर्माण में ज्यादा भागीदारी मिल सकेगी.
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विशेष सत्र को लेकर सभी दलों से सहयोग की अपील
बांसुरी स्वराज ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन दें, ताकि महिलाएं देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें. उन्होंने कहा कि 16 से 18 अप्रैल का विशेष सत्र इसलिए अहम है क्योंकि इससे यह तय होगा कि कानून 2029 के चुनाव के लिए समय पर लागू हो पाएगा या नहीं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल इस प्रक्रिया का समर्थन करेंगे.
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम
नारी शक्ति वंदन अधिनियम की मांग 1996 से संसद में उठनी शुरू हो गई थी, जब इसे पहली बार 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया. इसके बाद 1998, 1999, 2002 और 2008 में भी इसे विभिन्न सरकारों के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया गया, लेकिन राजनीतिक सहमति न बन पाने और अन्य विवादों के कारण यह हर बार लंबित रह गया या समाप्त हो गया. वर्ष 2010 में यूपीए सरकार ने भी इसे राज्यसभा में पेश किया था, लेकिन लोकसभा भंग होने के साथ यह विधेयक भी लैप्स हो गया.
19 सितंबर 2023 को मोदी सरकार ने विशेष संसदीय सत्र के दौरान नए संसद भवन में इसे 128वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया. लोकसभा में 20 सितंबर और राज्यसभा में 21 सितंबर 2023 को सर्वसम्मति से पारित होने के बाद 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ यह कानून बन गया. यह अधिनियम दशकों से चली आ रही महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है.
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