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नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन: अगले महीने दो दिनों का विशेष सत्र, 2029 में महिलाओं को मिलेगा आरक्षण

सरकार की योजना है कि इस बजट सत्र के खत्म होने के दस दिनों के भीतर दो दिनों का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा, जिसमें नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन किया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे जीएसटी बिल के वक्त किया गया था. उसके बाद बीजेपी इसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन: अगले महीने दो दिनों का विशेष सत्र, 2029 में महिलाओं को मिलेगा आरक्षण
महिला सांसदों के साथ पीएम मोदी.
  • लोकसभा, विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 % आरक्षण देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की तैयारी है
  • प्रस्तावित संशोधन के तहत परिसीमन का आधार वर्तमान जनगणना की बजाय 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों को रखा जाएगा.
  • लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 543 से 816 करने की योजना है, जिससे उत्तर प्रदेश और बिहार की सीटें भी बढ़ेंगी.
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नई दिल्ली:

लोकसभा, विधानसभा में महिलाओं के आरक्षण से जुड़े ऐतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में सरकार बड़े संशोधन की तैयारी में जुटी है. इसके लिए अगले महीने दो दिनों का संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. जिसके तहत नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए अभी चल रही जनगणना प्रक्रिया से मिलने वाले आंकड़ों की बजाए परिसीमन का आधार 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों को रखा जाए. मालूम हो कि महिला आरक्षण से जुड़े इस ऐतिहासिक बिल के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है. इसे परिसीमन से जोड़ा गया है और यह भी कहा गया कि जो भी अगली जनगणना के बाद लोकसभा सीटों के परिसीमन के बाद महिलाओं को आरक्षण मिलेगा. यानि लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं के लिए उसी बढ़ी हुई सीटों में से आरक्षण दिया जाएगा.

महिला आरक्षण बिल का इतिहास

महिला आरक्षण बिल के इतिहास को देखें तो पिछले करीब तीन दशकों से यह बिल संसद के इस सदन से दूसरे सदन का चक्कर काट रही है.1996 में पहली बार यूनाईटेड फ्रंट की सरकार के समय पहली बार यह बिल लाया गया था, मगर तब इसका जमकर विरोध हुआ. फिर 1998,1999, 2002, 2003 में भी इसे पास कराने की असफल कोशिश होती रही मगर आम राय नहीं बन पाया.

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शरद यादव ने 'पर कटी महिलाओं' का किया था जिक्र

1997 में इसी बिल पर शरद यादव का वो प्रसिद्ध वक्तव्य बहुत चर्चा में रहा था जब उन्होंने “पर कटी महिलाओं“ का जिक्र किया था. शरद यादव इस बिल में पिछड़ी जातियों के महिलाओं को आरक्षण देने के पैरोकार थे और ये भी कहा था कि यदि इन्हें आरक्षण नहीं दिया जाता तो वे जहर खा लेंगे. बहुत सालों बाद शरद यादव की बेटी सुहासिनी ने कांग्रेस का दामन थामा और 2000 का बिहार विधानसभा का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर लड़ीं.

अंत में 2008 में मनमोहन सिंह के यूपीए सरकार के समय महिला आरक्षण बिल लाया गया जो 2010 में राज्यसभा से पारित किया गया लेकिन 15वीं लोकसभा के भंग होने की वजह से महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया.

मोदी सरकार ने सितंबर 2023 में दोनों सदनों से पास कराया

बाद में यही महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप मोदी सरकार की तरफ से सितंबर 2023 में लाया गया और दोनों सदनों से पारित हुआ. किसी पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया और नारी वंदन बिल लोकसभा में 454-0 और राज्यसभा में 214-0 से पास हुआ.

महिला आरक्षण में क्या बदलाव करने जा रही सरकार

अब सरकार इस कानून में एक और संशोधन लाने जा रही है, जिसमें अभी चल रही जनगणना प्रक्रिया से मिलने वाले आंकड़ों की बजाए परिसीमन का आधार 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों को रखा जाए. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी. इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है.

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प्रस्ताव लागू हुआ तो लोकसभा की सीटें बढ़कर 816 हो जाएगी

अगर यह प्रस्‍ताव लागू होता है तो लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी. उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की वर्तमान संख्या 80 से बढ़कर 120 और बिहार में सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो जाएगी. इसी तरह दक्षिण के राज्य तमिलनाडु में सीटें 39 से बढ़कर 58 हो जाएगी.

अभी लोकसभा की 543 सीटों में 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

फिलहाल लोकसभा में सीटों की संख्या 543 ही है. जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. सरकार इस बिल को इसी सत्र में पास कराना चाहती है और इसके लिए विपक्ष के नेताओं के साथ बैठक भी हुई. साथ ही एनडीए के घटक दलों की भी बैठक की गई. मगर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से महिला वंदन बिल में संशोधन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए चिट्ठी लिख दी.

विशेष सत्र के लिए ही सरकार ने बजट सत्र को स्थगित की है

चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए बिना विपक्ष के इस बिल को संसद में पास कराना मुश्किल है, इसलिए सरकार ने अपनी रणनीति बदली और अब सरकार संसद के बजट सत्र को स्थगित कर रही है, ना कि सत्र का सत्रावसान कर रही है और ना ही उसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर रही है बल्कि केवल स्थगित कर रही है.

बंगाल में टीएमसी के महिला वोट बैंक का काट होगा यह संशोधन

सरकार की योजना है कि इस बजट सत्र के खत्म होने के दस दिनों के भीतर दो दिनों का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा, जिसमें नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन किया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे जीएसटी बिल के वक्त किया गया था. उसके बाद बीजेपी इसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी. खासकर पश्चिम बंगाल में कि उनकी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने जा रही है. जानकारों के अनुसार बीजेपी का यह दांव तृणमूल कांग्रेस के महिला वोट बैंक का काट बन सकती है.

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