- पश्चिम बंगाल में भाजपा ने विधानसभा की 294 में से 207 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है
- भाजपा सरकार का सचिवालय नबन्ना से हटाकर ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है
- राइटर्स बिल्डिंग कई दशकों से बंद है और इसके नवीनीकरण में कम से कम तीन महीने का समय लग सकता है
पश्चिम बंगाल में 'पोरिबर्तन' हो गया है. बीजेपी सरकार बनाने जा रही है और 15 सालों से सत्ता में बैठी टीएमसी अब विपक्ष में बैठेगी. बीजेपी ने विधानसभा की 294 में से 207 सीटें जीत ली हैं, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई है. बंगाल में पहली बार सरकार बनाने जा रही बीजेपी अपनी सरकार चलाने का ठिकाना भी बदलने की तैयारी कर रही है.
बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बंगाल सरकार के मुख्यालय को 'नबन्ना' से हटाकर 'राइटर्स बिल्डिंग' में ले जाने की योजना बनाई जा रही है. सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव की जानकारी दिल्ली में आलाकमान को भी दे दी गई है.
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बंगाल बीजेपी के नेता क्या चाहते हैं?
दरअसल, बंगाल बीजेपी के नेता चाहते हैं कि प्रतिष्ठित 'राइटर्स बिल्डिंग' को ही बीजेपी सरकार का अगला सचिवालय बनाया जाए. बंगाल बीजेपी चाहती है कि नई सरकार का कामकाज इसी ऐतिहासिक 'राइटर्स बिल्डिंग' से चलाया जाए.
लेकिन एक दिक्कत है...
हालांकि, इस प्लान में एक दिक्कत भी है. 'राइटर्स बिल्डिंग' लंबे समय से बंद है. इसके रेनोवेशन में कम से कम 3 महीने का वक्त लग सकता है. इस काम को तेजी से पूरा करने के तरीकों पर बीजेपी के भीतर आंतरिक चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं.
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अब तक कहां से चलती थी सरकार?
कोलकाता की ऐतिहासिक 'राइटर्स बिल्डिंग' ही बंगाल सरकार का मुख्यालय हुआ करती थी. आजादी के बाद बनी सभी सरकारों ने यहीं से सरकार चलाई. लेफ्ट के समय में भी यही सचिवालय होता था. लेकिन 2011 में टीएमसी के सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने इसे 'नबन्ना' में शिफ्ट कर दिया था. 'नबन्ना' गंगा नदी के दूसरी ओर बना है.
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क्या है राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास?
कोलकाता में बनी 'राइटर्स बिल्डिंग' लगभग 250 साल पुरानी है. साल 1776 में इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने बनवाया था. इसे थॉमस लियोन ने डिजाइन किया था. ऐसा कहा जाता है कि यह बिल्डिंग शुरू में जूनियर लेवल के कर्मचारियों के रहने की जगह थी, जिन्हें 'राइटर्स' कहा जाता था. इसी वजह से इस इमारत को 'राइटर्स बिल्डिंग' के नाम से जाना जाने लगा.
यह इमारत गहरे लाल रंग की है. यह टेराकोटा ईंटों से बनी हुई है, जो इसे कोलकाता की दूसरी ब्रिटिश काल में बनी इमारतों से अलग बनाता है. यह इमारत 150 मीटर लंबी है और यह 55,000 वर्ग फीट में बनी है. यह इमारत ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय हुआ करती थी.

जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे राइटर्स को फारसी और हिंदी जैसी दूसरी भाषाओं में ट्रेन्ड करने की जरूरत बढ़ती गई. तब इस परिसर के अंदर फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की गई. छात्रों के लिए एक हॉस्टल, एक लेक्चर हॉल, 4 लाइब्रेरी और एक एग्जाम रूम बनाया गया.
यह कोलकाता की पहली 3 मंजिला इमारत थी. इसकी पहली और दूसरी मंजिल पर 128 फीट लंबा एक बरामदा भी बनाया गया था, जिसमें शानदार खंभे लगाए गए थे, ताकि इमारत को बढ़े हुए हिस्से को मजबूती से सहारा मिल सके. कुछ साल बाद जब अंग्रेजों ने भारत पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया तो यह इमारत सचिवालय बन गई.
'राइटर्स बिल्डिंग' कई ऐतिहासिक घटनाओं की भी गवाह बनी. यह वही जगह है जहां बंगाल के तीन क्रांतिकारियों- बिनॉय बसु, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता ने लेफ्टिनेंट कर्नल सिम्पसन की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इन क्रांतिकारियों के नाम पर ही बाद में डलहौजी स्क्वायर का नाम बदलकर 'BBD बाग' रख दिया गया.
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