बिहार की सियासत अब तक दो नेताओं के इर्द-गिर्द थी. लालू यादव और नीतीश कुमार. लालू यादव एक तरह से सालों से बिहार की राजनीति से गायब हैं. और अब बिहार में नीतीश कुमार युग भी खत्म हो गया है. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब बीजेपी के सम्राट चौधरी को ये जिम्मेदारी मिल गई है. यह वही सम्राट चौधरी हैं, जो कभी नीतीश कुमार के धुर विरोधी हुआ करते थे. और अब नीतीश कुमार की ही कुर्सी सम्राट चौधरी को मिली है.
सम्राट चौधरी के साथ ही बीजेपी को बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री मिल गया है. बिहार में बीजेपी लंबे समय से सत्ता में रही है, लेकिन नीतीश कुमार के रहते कभी अपना मुख्यमंत्री नहीं बना पाई. यहां तक कि नीतीश की पार्टी जेडीयू से भी ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद मुख्यमंत्री पद नहीं मिला.
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री चुना जाना बहुत ज्यादा हैरान नहीं करता. क्योंकि जिस दिन नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर आई थी, उसी दिन से सम्राट चौधरी सीएम पद की रेस में सबसे आगे चल रहे थे. हालांकि, यह इसलिए हैरान करता है क्योंकि सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के कई बड़े नेताओं को पीछे छोड़ते हुए इस रेस में जीते हैं. बीजेपी में आए सम्राट चौधरी को अभी 10 साल भी नहीं हुए हैं. और तो और, एक वक्त तो सम्राट चौधरी न सिर्फ नीतीश कुमार के विरोधी थे, बल्कि बीजेपी के विरोध में थे. वह राबड़ी देवी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे. विधानसभा में विपक्ष के चीफ व्हिप भी रह चुके हैं. और अब मुख्यमंत्री बन गए हैं.
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विरासत में मिली राजनीति
सम्राट चौधरी के पिता शकुनि चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं. उनके पिता कभी लालू यादव तो कभी नीतीश कुमार की पार्टी में रहे. उन्हें अपने पिता से राजनीति विरासत में मिली.
राजनीति में सम्राट चौधरी की एंट्री 1990 के दशक में हुई. 19 मई 1999 को राबड़ी देवी की सरकार में वह कृषि मंत्री बने थे. जिस वक्त उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली थी, तब वह न तो विधायक थे और न ही विधान परिषद के सदस्य थे.
साल 2000 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में परबत्ता सीट से वह पहली बार आरजेडी के टिकट पर विधायक बने थे. 2005 में वह हार गए थे. फिर 2010 में दोबारा परबत्ता सीट से विधायक चुने गए.
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बीजेपी में ऐसे ताकतवर बने सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी लंबे समय तक आरजेडी में रहे. वह आरजेडी और जेडीयू के गठबंधन वाली सरकार में मंत्री भी रहे हैं. साल 2018 में सम्राट चौधरी आरजेडी छोड़कर बीजेपी में आ गए. एनडीए सरकार में उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया.
उन्हें नीतीश कुमार का धुर विरोधी माना जाता था. सम्राट चौधरी ने तो एक बार यहां तक कह दिया था कि जब तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा देते, तब तक मुरेठा (पगड़ी) नहीं बांधेंगे.

आरजेडी छोड़कर आने के बाद सम्राट चौधरी का कद बीजेपी में लगातार बढ़ता गया. मार्च 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.
जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार आरजेडी का साथ छोड़कर वापस एनडीए में आए तो इस सरकार में सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया. इसके साथ ही उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई.
2025 के विधानसभा चुनाव में जब एनडीए ने महागठबंधन का सूपड़ा साफ कर दिया और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, तब माना गया कि सम्राट चौधरी को सीएम बनाया जा सकता है. हालांकि, नीतीश के रहते ऐसा नहीं हो सकता था. हालांकि, चुनाव के बाद बनी नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम के साथ-साथ गृह मंत्री भी बनाया गया.
चुनाव नतीजे आने के 6 महीने के भीतर ही सम्राट चौधरी अब बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं. वह कुशवाहा समुदाय से आते हैं.
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