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बिहार : EOU ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले की अपनी जांच बंद की

दिल्ली से सीबीआई की एक टीम के राज्य की राजधानी पहुंचने और मामले से संबंधित सभी सामग्री एकत्र करने के एक दिन बाद ईओयू ने इस आशय का एक बयान जारी किया.

बिहार : EOU ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले की अपनी जांच बंद की
पटना:

बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर अपनी जांच ‘‘समाप्त'' कर दी है. इस मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है. दिल्ली से सीबीआई की एक टीम के राज्य की राजधानी पहुंचने और मामले से संबंधित सभी सामग्री एकत्र करने के एक दिन बाद ईओयू ने इस आशय का एक बयान जारी किया.

ईओयू द्वारा आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘पांच मई को संपन्न हुई नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित अनियमितता से संबंधित पटना के शास्त्रीनगर थाना काण्ड संख्या 358/24, दर्ज किया गया था. तत्पश्चात इस काण्ड का अनुसंधान भार ईओयू द्वारा ग्रहण किया गया तथा इस काण्ड का अनुसंधान कराया जा रहा था.''

विज्ञप्ति के अनुसार,‘‘भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की 23 जून की अधिसूचना संख्या 228/53/2024 के अनुसार बिहार सरकार के गृह विभाग के पत्र संख्या 09/सी0बी0आई0-80-02/2024 गृ0आ0 6752 के माध्यम से उक्त काण्ड की जांच दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत अधिसूचना जारी कर केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को स्थानांतरित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है जिसके आलोक में अग्रतर कार्रवाई के लिउ काण्ड के अभिलेख एवं सभी प्रदर्शों को ईओयू द्वारा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को प्रभार विधिवत सौंप दिया गया है इस संबंध में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, नयी दिल्‍ली द्वारा थाना काण्ड संख्या आरसी221/2024/ई0006 दर्ज किया गया है. आर्थिक अपराध इकाई के स्तर से काण्ड का अनुसंधान समाप्त कर दिया गया है.'' ईओयू ने मामले के सिलसिले में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया.

इस बीच, दो सदस्यीय सीबीआई टीम जिसमें एक डीआइजी और डीएसपी रैंक के अधिकारी शामिल थे, के मंगलवार को पटना में सुरक्षित घर जहां से आरोपियों और उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया गया था और 5 मई को कई सबूत भी एकत्र किए गए थे, का दौरा किए जाने की चर्चा है.

पटना पुलिस ने उक्त सुरक्षित घर से जो सामान इकट्ठा किया था, उसमें जले हुए प्रश्नपत्र, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप/कंप्यूटर और पोस्ट-डेटेड चेक शामिल हैं.

सीबीआई के अधिकारियों ने पटना के शास्त्री नगर था के अधिकारियों और राज्य पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की. ईओयू को सौंपे जाने से पहले मामले की जांच सबसे पहले शास्त्री नगर थाने ने की थी. शास्त्री नगर थाना के अधिकारियों ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के तहत कई आरोपियों के इकबालिया बयान दर्ज किए थे.

सूत्रों ने बताया कि सभी आरोपी पटना में न्यायिक हिरासत में हैं और सीबीआई अधिकारी यहां सक्षम अदालत से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करके विस्तृत पूछताछ के लिए उन्हें दिल्ली ले जा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि सीबीआई तथ्यों के बारे में जिरह के दौरान सभी गिरफ्तार आरोपियों का एक-दूसरे से आमना-सामना करा सकती है. गिरफ्तार आरोपियों में दानापुर नगर परिषद के एक अभियंता सिकंदर यादवेंदु, उनके रिश्तेदार अमित आनंद, नीतीश कुमार, अन्य अभ्यर्थी और उनके माता-पिता और कुख्यात संजीव कुमार उर्फ लूटन मुखिया गिरोह जिन्हें परीक्षा से एक दिन पहले उनके मोबाइल फोन पर नीट यूजी परीक्षा पीडीएफ प्रारूप में हल उत्तर पुस्तिका मिली थी, के सहयोगी शामिल हैं. गिरफ्तार व्यक्ति के बयान के अनुसार प्रश्नपत्र लीक उत्तर पुस्तिका के स्रोत कई अंतरराज्यीय पेपर लीक की साजिश रचने के आरोपी मुखिया गिरोह के सदस्य थे.

इस बीच नीट यूजी पेपर लीक को लेकर बिहार में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर मंगलवार को भी जारी रहा.

इस सप्ताह की शुरुआत में इस मुद्दे ने उस समय राजनीतिक मोड़ ले लिया जब बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने नीट- यूजी 2024 परीक्षा के तार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के एक अधिकारी से जुड़े होने का आरोप लगाया था. इसके बाद से विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है.

राजद की राज्य इकाई ने आरोपी अमित आनंद, नीतीश कुमार और लूटन मुखिया के परिवार के सदस्यों की सत्तारूढ़ राजग गठबंधन के कई सहयोगियों के साथ कई तस्वीरें साझा कीं और उनकी कथित निकटता की गहन जांच की मांग की.

राजद नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी करते हुए भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है और इस अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है. राजद नेताओं को इन मुद्दों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनके नेता लालू प्रसाद ‘‘गुंडाराज'' और ‘‘जंगलराज'' के प्रतीक हैं. यह सर्वविदित तथ्य है कि लालू के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था.''
 

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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