- असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा वापस लेकर पार्टी में अपनी सदस्यता बरकरार रखी है
- राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेताओं से बातचीत के बाद भूपेन बोरा ने इस्तीफा वापस लेने का निर्णय लिया
- भूपेन बोरा ने इस्तीफा देते समय पार्टी नेतृत्व की उपेक्षा और असम इकाई में अधिकार न मिलने की शिकायत की थी
असम कांग्रेस में वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद सियासी ड्रामा चरम पर है. असम के प्रभारी कांग्रेस महासचिव जीतेंद्र सिंह ने दावा किया है कि सीनियर कांग्रेसी नेताओं और राहुल गांधी से फोन पर बातचीत के बाद भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. वहीं, खबर है कि भूपेन बोरा ने अभी तक अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया है. उन्होंने इस पर सोचने के लिए एक दिन का समय मांगा है. बता दें कि बोरा ने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा भेजा था, जिससे असम विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को बड़ा झटका माना जा रहा था. कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है.
हिमंता ने दिया था ऑफर
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के पार्टी से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी के दरवाजे उनके लिए खुले हैं. शर्मा ने यह भी कहा कि अगर बोरा भाजपा में शामिल होते हैं तो वह उन्हें किसी ‘‘सुरक्षित सीट'' से चुनाव जितवाने की कोशिश करेंगे.
बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई. वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं. शर्मा ने कहा कि बोरा कांग्रेस में ऐसे ‘‘आखिरी हिंदू नेता'' हैं जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की नहीं है.
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